साहित्य चक्र

06 December 2022

हिंदू धर्म में दलित-अछूतों की आस्था और भक्ति पर हमेशा सवाल क्यों ?

भारत में इन दिनों हिंदू राष्ट्र की मांग सोशल मीडिया पर जोरों शोरों से चल रही है। ऐसे में सवाल उठता है- क्या अब भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र ना होकर हिंदू राष्ट्र बनने जा रहा है ? 





वैसे हिंदू राष्ट्र से पहले हमें हिंदू धर्म के बारे में जानना चाहिए। हिंदू शब्द एक पारसी भाषा का शब्द है। हिंदू धर्म को ही सनातन धर्म कहा जाता है। हिंदू धर्म में मुख्य रूप से 4 वर्ग और कई जातियां, उपजातियां हैं। हिंदू शास्त्रों के अनुसार चार वर्गों में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र है। ब्राह्मण और क्षेत्रीय, वैश्य के बीच सिर्फ रोटी का रिश्ता है यानि यह तीनों वर्ग एक साथ बैठकर खाना खा सकते हैं जबकि शूद्र का ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य के साथ ना ही रोटी का रिश्ता है ना ही बेटी का रिश्ता है। ऐसे में जो लोग हिंदू राष्ट्र की कल्पना कर रहे हैं क्या वह लोग अपने शास्त्रों के विरुद्ध जाकर हिंदू राष्ट्र की कल्पना कर रहे हैं या फिर अपने शास्त्र के अनुसार छुआछूत, भेदभाव वाला हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं ? 

अगर छुआछूत, भेदभाव वाला हिंदू राष्ट्र बनता है तो सबसे ज्यादा शोषण और अत्याचार किन लोगों के साथ होगा ? यह सवाल हिंदू राष्ट्र की कल्पना को जड़ से खत्म कर देता है। इसके जीते जाते उदाहरण आपको सोशल मीडिया पर अलग-अलग वर्ग, जाति और सरनेम से बने फेसबुक पेज और अन्य सामाजिक मंचों से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हिंदू राष्ट्र की कल्पना में कितनी सच्चाई है। 

इतना ही नहीं बल्कि हिंदू धर्म में आज भी दलित, अछूत, आदिवासी लोगों को हिंदू धार्मिक स्थलों में प्रवेश तक नहीं मिल पाता है। आखिर ऐसे हालातों में हिंदू राष्ट्र की कल्पना करना आकाश में जाने के लिए सीढ़ी बनाने जैसा है। आज भी हिंदू धार्मिक स्थलों में आचार्य और पुजारी सिर्फ एक ही जाति या वर्ग के लोग दिखाई देते हैं। अगर कोई दलित-अछूत अपने धार्मिक आस्था और भक्ति के लिए पूजा अर्चना या शास्त्र का अध्ययन करता है, तो उसकी आस्था और भक्ति पर ऊंची जाति के लोग सवाल खड़ा कर देते हैं। जैसा- दलित अछूत मंदिर का पुजारी कैसे बन सकता है ? 

ब्राह्मण को हिंदू धर्म के शास्त्रों में भगवान, देवी-देवताओं से भी बड़ा बताया गया है। आखिर क्यों और किस लिए बढ़ाओ बताया है ? क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र अगर ब्राह्मण से नीचे हैं तो कैसे हैं ? क्या ब्राह्मण भोजन, वायु, पानी आदि ग्रहण नहीं करता व क्या ब्राह्मण के नसों में खून नहीं दौड़ता ? अगर ब्राह्मण ईश्वर से बड़ा है तो फिर ईश्वर का होना एक प्रकार से साजिश दिखाई देती है। हिंदू धर्म के हर शास्त्र ब्राह्मण को सर्वश्रेष्ठ घोषित करते हैं क्या यह अन्य वर्ग और जाति के लोगों के साथ अन्याय नहीं है ? 

सोचिए हिंदू राष्ट्र बनने पर सबसे अधिक फायदा किसे होगा ? अगर भारत हिंदू राष्ट्र बनता है तो सबसे अधिक फायदा ब्राह्मणों को होगा। यह हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि हिंदू राष्ट्र की कल्पना ही ब्राह्मण को सर्वश्रेष्ठ घोषित करती हैं। जरा इतिहास में चाहिए और जानिए हिंदू क्षत्रिय राजाओं के साथ किन लोगों ने धोखा किया है और अपने निजी स्वार्थ के लिए हिंदू क्षत्रिय राजाओं का विषम परिस्थितियों में साथ किसने छोड़ा ? अगर आप यह जान लेंगे तो आपको पता चल जाएगा हिंदू राष्ट्र की कल्पना और बनने से सबसे अधिक फायदा किसे है। 

खैर छोड़िए ! आप को हिंदू राष्ट्र की कल्पना का नशा करवाया जा रहा है और आप सोशल मीडिया फेसबुक यूनिवर्सिटी इत्यादि के माध्यम से इस नशे का शिकार होते जा रहे हैं। याद रखिए दलित अछूतों के साथ आज भी अन्याय और शोषण होता है मगर उसके खिलाफ कोई भी हिंदू संगठन सार्वजनिक रूप से आवाज नहीं उठाता है। एक प्रकार से अगर बुलाया जाए तो हिंदू राष्ट्र की कल्पना, दलितों के लिए गुलामी, शोषण और अत्याचार की कल्पना है। हिंदू राष्ट्र की कल्पना करिए मगर सभी को एक साथ रखकर करिए और सभी हिंदू में रोटी, बेटी इत्यादि का रिश्ता होना चाहिए। भेदभाव, अत्याचार, छुआछूत जैसी मानसिकता का खात्मा के लिए भी आवाज उठाइए तभी आपको सभी हिंदू (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) का साथ और समर्थन मिलेगा। 

भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है यहां पर कई धर्म, जाति, समुदाय, पंथ निवास करते हैं। धर्मनिरपेक्षता में ही किसी राष्ट्र की प्रगति और विकास संभव है। 

                                            जय भारत जय संविधान


                                - भारत हवलदार


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