साहित्य चक्र

26 December 2022

कविताः शोख़ सा दिसंबर




कभी मिलन का दिसंबर
कभी विरह का दिसंबर
कभी ख़ुशियों का दिसंबर
कभी शिकवों का दिसंबर! 

कभी खिज़ा का तो 
कभी बहारों का दिसंबर
कभी  छेड़ता- सा
कभी सिसकाता -सा दिसंबर! 

कभी गुमगुनी धूप- सा
कभी ठिठुरती शाम-सा दिसंबर
कभी लाल सुर्ख़ अलाव- सा
कभी तुम्हारे सपनों की रज़ाई सा दिसंबर!

तुम्हारी यादों के रंगीन छींटों से
मेरे आँचल को सजाता -सा दिसंबर
जाने कितने ज़ायके और रंग बिखेरता
आ पहुँचा है,अलहदा शोख़ -सा दिसंबर!


                                       - वन्दना रानी दयाल


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