साहित्य चक्र

27 October 2017

*प्रज्ञा रक्त रक्षक*



हमारी शक्ति- हमारा ताकत-हमारा रक्त ही हमारी पहचान है..। इसमें कोई दो राय नहीं की हमारी पहचान हमारे रक्त से होती है...। जी हां...। हर व्यकित का रक्त ग्रुप अलग -अलग होता हैं..। चाहे वह स्त्री हो या फिर पुरूष...। आज जिस तरह लगातार बीमारियां बढ़ रही हैं..। उसे देखते हुए देश में कई ब्लड बैंक बनें हैं...। आजकल की दुनियां में हादसे होना कोई बड़ी बात नहीं रह गई है...। हर दिन पूरे देश में कई हादसे होते है..और कई लोग मरते है...। इसी को देखते हुए...। दिल्ली के निवासी हरीश बहुगुणा जी ने एक रक्त समूह की स्थापना की..। जिसका नाम प्रज्ञा रक्त रक्षक रखा गया...। इस समूह में कई राज्यों के लोग जुड़े हुए है..। यह समूह हिंदू रक्त - हिंदू हेतु पर काम करता है...। इस समूह को गठित करने वाले श्री हरीश बहुगुणा जी है..। जो काफी सालों से इस विषय पर सोच रहे थे..। हरीश जी ने इस पर तेजी से काम करते हुए..। इसे आज आठ राज्यों तक पहुंचा दिया हैं...। जिसमें इस समूह के लोग अपना काम कर रहे है..और लोग तक रक्त की सेवा दे रहे है..।


हरीश बहुगुणा


वैसे हरीश बहुगुणा को यह आइडिया बहुत पहले आया था...। जब उन्होंने देखा की बहुत लोग ब्लड बैंकों में धक्का खाते है..। जिसके बाद बहुगुणा जी ने इस पर विचार किया और तेजी से इस यहां तक पहुंचाया..। आज हमारे देश में भाई-भतीजा वाद और भष्टाचार इतना बढ़ा चुका है..कि ब्लड बैंकों में भी उन्हीं को ब्लड मिलता हैं...। जिनके कोई जानने वाले होते है या फिर जिनके पास पैसा होता हैं...।  यह समूह दूर-दराज से आए लोगों के लिए और मजबूर लोगों की सहायता के लिए ही स्थापित किया गया हैं...। इस समूह में मात्र एक फोन कॉल और एक व्ट्सअप मैसेज या फोन मैसेज करने से रक्त की व्यवस्था हो सकती है..। चाहे फिर वो जरूरतमंद देवभूमि में हो या फिर दिल्ली के अस्पतालों में..। बस हां...वो हिंदू होना चाहिए...। यह समूह मूलरूप से हिंदू धर्म के लोगों के लिए ही काम करता है...।  इस समूह का मूल मंत्र ही 'हिंदू रक्त हिंदू हेतु' है..।
अगर आप रक्तदान और अंगदान करने वालों के आकंडे़ देखेंगे तो अधिकतर इसमें हिंदू समाज के लोग ज्यादा होगें..। हिंदू समाज पहले से ही एक पवित्र समाज के तौर पर जाना जाता है..। इसी को देखते हुए हिंदू समाज के लिए हरीश बहुगुणा जी ने प्रज्ञा रक्त रक्षक सेवा शुरू की है...। इस मुहिम के जरिए...। पीड़ित या जरूरतमंद को अगर रक्त की जरूरत हो...। तो प्रज्ञा रक्त रक्षक उसे रक्त उपलब्ध करने में मदद करता है..। 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' सोशल मीडिया के माध्यम से हर जरूरतमंद हिंदू के लिए हर समय सेवा के लिए तत्पर है..। 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' अभी दिल्ली सहित आठ-दस राज्यों में अपनी सेवा प्रदान कर रहा है..। जिससे आगे उम्मीद है कि 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' पूरे भारत में अपने सेवा प्रदान करेगा..। आपको हम बता दें ..। इसकी संचालन की क्या व्यवस्था है..। 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' पूर्ण रूप से नि:शुल्क सेवा प्रदान करती है..। उन सभी मित्रों से निवेदन हैं जो 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' के माध्यम से हिंदू जन सेवा करना चाहते है...। 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' का प्रयास संपूर्ण भारत में सुगम तरीके से रक्त उपलब्ध हो..।  जिससे स्वस्थ भारत का निर्माण हो..।
'प्रज्ञा रक्त रक्षक' सेवा हेल्पलाइन नम्बर- 9811469908

अगर आप भी 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' से जुड़ना चाहते है...। तो 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' से संपर्क करें..।
मो. न.- 9811469908
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                                                                                                    रिपोर्ट- दीपक कोहली



24 October 2017

*आंगन*










आंगन खिल उठता जब बेटी घर मे आती है,
आते ही माँ की लाडली बन जाती है...।

घर की इज़्ज़त कहलाती है,

जब जब बेटी पढ़ने जाती ,
पिता की आंखे भर आती...।

पढ़ते ही जब वापस आती,
माँ को सारा हाल बताती।
भाई भी खुश हो जाता है,
हर पल बहन की खुशी मनाता है...।

बेटी बड़ी जब हो जाती है,
पिता को शादी की चिन्ता हो जाती है...।

माँ को नींद नही आती है,
भाई की भी आंखे सोच सोच भर आती है..।

शादी जब हो जाती है,
बेटी डोली में जाती है...।

सभी की आंखे भर आती है,
पहले पिता के घर की लक्ष्मी थी,
अब ससुराल के घर की लक्ष्मी है...।

बेटी भी चिड़िया की तरह बन जाती है,
फिर पिता के घर से 
ससुराल के लिए उड़ जाती है...।

पहले पिता के घर की इज़्ज़त थी,
अब ससुराल की इज़्ज़त बन जाती है...।

धन्य है वो मात पिता जिनके 
आंगन में बेटी आती है...।

बेटी कभी परायी नही होती,
ये तो दोनों घर का दीया जलाती है...।

ओर फिर हर पल, हर त्यौहार पर ,
दोनों घर के लिए खुशियां मनाती है...।
                     



                                                                                 कवि- अमन वशिष्ठ




* सत्य वचन...!





पृथ्वी पर प्रकाश पड़ा सूर्य देव 
का, तो संसार झूम उठा..।

और जब होने लगा, चन्द्रग्रहण 
तो अंधकार उमड़ उठा..।

न जाने मनुष्य किस
बात से इतना विचलित है..।

अरे संसार तो प्रभु श्री राम का था, 
अब तो फिर से अंधकार हो चला..।

हाथ की लकीरें बता देती, 
जीवन भर की सच्चाई...।

अब तो खुद अपने हाथ से
मनुष्य अपना ही घर बसाने चला..।

मत करना बेर किसी से,
ये दुनिया एक बहाना है...।

कल सब आये थे, एक दिन 
कल ही सबको जाना है..।

बुरा लगे किसी की बात का,
तो खुद से बेर मत कर लेना।

उसको मित्र कहकर खुद को 
समझा लेना....।

               कवि- अमन वशिष्ठ

09 October 2017

* सड़क सुरक्षा *




सड़क सुरक्षा


तुम हैल्मेट पहन के जाओगे,तो क्या घट जायेगा!
 मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा
कहना मानो राजा ज़ी रिश्ता तब ही निभ पायेगा!
मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा।

सुना है मैने लापरवाही , हद से कर जाते है!
कितने घरोँ के दीपक ऐसे सडकों पे बुझ जाते है!
महंगी जाती है जल्दी ,जो भी कर जायेगा!
मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा।

चुड़ी और सिन्दुर मुझको प्राणो से भी प्यारे है!
रखना हरदम याद हमें दिन इंतजार में गुजारे है!
देखेगें तब तक रस्ता,जब तक तु न आएगा!
मेरे सजना ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा।

हर जगह है नाका बन्दी,हर जगह पर पुलिस खड़ी!
सड़क सुरक्षा जिम्मेदारी हम सब की है हर घड़ी!
जागो और जगाओ फिर वक्त न हाथ में आएगा!
मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा।

हाथ जोड़कर विनती है रूल ट्रैफिक मत तोड़ो!
जिन्दगी मिली है एक बार तुम इससे मत तोड़ो!
कहे सुमन घमण्ड न करना मिट्टी में मिल जायेगा!
मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा

                                                                 


                                     (सुमन जांगड़ा हांसी हिसार)


07 October 2017

* जिंदगी के मोड़ पर *



बालों में चांदी
दांतों में सोना आ गया
उम्र के इस पड़ाव में

तू साया बन मिल गया
शिकायत खुद से करूँ 
या करूँ रब से
तुझ बिन साथी मैं
तन्हा थी न जाने कब से
तेरी ताप न मिली तो क्या
तेरी छांव ही सही
कुछ तो मिला सार्थक
इस निर्रथक जीवन में
अंतस के रसातल में
ग़मों का कारोबार था
फैला हर तरफ 
आंसुओं का बाजार था
खारे अश्कों का वृहद् 
समंदर था जिसने
कभी डूबने भी न दिया
शायद इसलिए ही कि
मिलना तय था तुमसे
जीवन के अंतिम मोड़ पर


                                                                आरती लोहनी

"करवा चौथ "




सासु माँ बडे प्यार से बोली
बहू करवा चौथ है कल
पति की लंबी उम्र के लिए
व्रत करना
बहू ने सिर झुका कर कहा
जी माँ जी
ओर चल दी अपने कमरे की ओर
बंद कमरे में जाकर सोचने लगी
रोज रोज की यातना
जिस्म को नोचता जानवर
बात बात पर गालियाँ
देता
शराब की दुर्गन्ध को
 बिखेरता सेज पर रात भर
साल भर नोचता खसोटता
फिर भी व्रत रखे उसके लिए
क्योकी वो पति है
ओर पति परमेश्वर माना जाता है
पत्नी के अरमानो को
कुचलता वो
अपने पुरुष होने पर गर्वित होकर
लहू लुहान कर देता
पत्नी की हर इच्छा को
दिखावे की खातिर फ़िर
क्युँ रखे करवा चौथ
आंखो में भरकर आँसु वो
कमरे से बाहर निकल आयी
सासु माँ से बोली
माँ व्रत करूँगी लंबी उम्र के लिय नही
जुल्मो से
छुटकारा पाने के लिए
पति रुप में हैवान पाकर
कैसे उसकी लंबी उम्र की कामना करू
बोलो तो माँ जावब दो माँ
सास बहू के सामने निरुतर हो गयी




                                                                                रामेश्वरी नादान


* प्रेम *




प्रेम अब एफ.बी  पर दिखता है
अहसास वटसप पर चलता है
व्यस्त सब अपनी अपनी दुनिया में
अनजाना भी पहचाना सा लगता है।।

विश्वास लाइक कमेंट में बिकता है
कोई तन्हा है, कोई अकेला हँसता है
गुरूप गुरूप के खेल में
कोई गिरता कोई संभलता है।।

अपनो के लिए वक्त नहीं निकलता है
गैरो से अटूट बना रिश्ता है
चार दीवारो से बना मकान
घर सा नहीं लगता है।।

डी.पी पर प्यार छलकता है
सैल्फी का नशा सिर चढता है
साथ बैठा पूरा परिवार
परिवार सा नहीं दिखता है 
परिवार सा नहीं दिखता है।।




                                                                    कवियात्री- रामेश्वरी नादान


05 October 2017

# एक कदम स्वच्छता की और...!


 
हम सबकी हो सांझेदारी
मीलों तक हो नहीं बीमारी
देखा हमने सपना प्यारा,
भारत देश हो स्वच्छ हमारा...।

साफ़ सुथरे हो स्कूल विद्यालय
जहा सोच हो वही शौचालय
हर घर में गूँजे ये नारा
भारत देश हो स्वच्छ हमारा..।

हम निभाएं सब जिम्मेदारी
पेड़-पौधे और बगिया क्यारी
महक उठे ये गुलशन सारा
भारत देश हो स्वच्छ हमारा....।

गाँधी जी का था ये सपना,
स्वर्ग से सुन्दर भारत अपना,
इनका सिदांत है सबसे न्यारा
भारत देश हो स्वच्छ हमारा....।

      
                                                   ( सुमन जांगड़ा)

* सयाली छंद- करवा चौथ

गुंजन गुप्ता


करवाचौथ
पूजन को
सजी है थाल
बनाई है
चौक  ॥

दो 
वरदान माता
सुखी रहे जीवन
अमर हो
सुहाग  ॥


सजाये
हैं  हाथ
मेहँदी से मैंने
तुम्हारे प्यार
 में  ॥

 करके
सोलह श्रृंगार
उतारूँ आरती तुम्हारी
जनम-जनम
सजना  ॥

तुमको
 निहारती हूँ
चाँद में  प्रिय
उपवास तोड़ने
को  ॥

चाँद
सा शीतल
बने हमारा प्रेम
चहुँ ओर
 चमके  ॥

 करूँ
पूजन मैं
बढ़े आयु तुम्हारी
प्रार्थना है
हमारी  ॥

                                                गुंजन गुप्ता
                                                प्रतापगढ़ (उ.प्र.)



04 October 2017

* हरिद्वार का रमेश- 'निशंक'

जब उत्तराखंड की बात हो और 'निशंक' का नाम ना हो...ऐसा हो ही नहीं सकता..। देवभूमि के भूतपूर्व सीएम रमेश पोखरियाल 'निशंक' की हकीकत और हैसियत क्या है...? हम आपको बताएगें 'निशंक' की पूरी कहानी...। एक शिक्षक से कैसे एक राजनेता बने 'निशंक'...। हर बिंदु से होगी हमारी जांच - पड़ताल...। 




जी हाँ...! हर हकीकत से रूबरू कराएगें..। आपको...! आपको हर वो हकीकत बताएगें...। जो आपने कभी ना देखी होगीं और ना ही कभी सुनी होगीं...। चलिए आपको कराते  है...। 'निशंक'  की हकीकत से वाकिफ...।

'निशंक' का जन्म 15 अगस्त 1958 में पौड़ी जिले के चौकट्टाखाल तहसील के 'पिनानी' गांव के एक सामान्य परिवार में हुआ...। इनका जीवन बहुत ही संघर्षमय रहा..। संघर्षमय जीवन के बावजूद इन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की...। इनके पिता श्री 'प्रेमानंद पोखरियाल' एक सामान्य व्यक्ति थे...। इनकी माता श्रीमती 'विशम्भरी देवी' एक कुशल गृहणी थी...। अगर इनकी जीवन संगिनी की बात करें तो 'कुसुमकांत पोखरियाल' इनकी धर्मपत्नी है...। 'निशंक' को बचपन से ही पाठन-लेखन का बहुत ही शौक हुआ करता था...। इन्होंने हिंदी साहित्य में कई विधाएं लिखी है..। चाहे फिर वो कविताएं हो या फिर उपन्यास हो...। 'निशंक' ने कई साहित्य संग्रह लिखे है...।  


'निशंक' की पढाई की बात करें तो इनकी पढ़ाई हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से हुई...। इन्होंने कला से 'स्नातकोत्तर' और 'पीएचडी', 'डी लिट' की डिग्री प्राप्त की है..। आपको बता दूं...! 'रमेश पोखरियाल' उत्तराखंड के पांचवें सीएम भी रह चुकें है..। 'निशंक' उत्तराखंड बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं...। रमेश जितने परिपक्व राजनेता है...। उतने ही सरल - शोभित हिंदी साहित्यकार भी है...। अगर इनकी राजनीति जीवन की बात करें तो...। सन् 1991 में इन्होंने राजनीति में कदम रखा...। जिसमें इन्होंने पहली बार उत्तरप्रदेश विधानसभा के लिए कर्णप्रयाग से चुनाव लड़ा था...। 'निशंक' कभी भी राजनीति में नहीं आना चाहते थे...। राजनीति में आने से पहले 'निशंक' एक शिक्षक की भूमिका निभाया करते थे...। 'निशंक' की पहली किताब 'समर्पण' थी..। जो सन् 1982-83 में प्रकाशित हुई थी...। तब 'निशंक' जोशीमठ के एक शिशुमंदिर में प्रधानाचार्य हुआ करते थे..। आज एक सांसद या एक राजनेता हुआ करते है..। 1991 से 2012 तक 'निशंक' पांच बार विधानसभा में विधायक रहे है...। इनके उत्कृष्ट कामों के लिए इन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है...। 27 जून 2009 से 11 सितम्बर 2012 तक 'निशंक' देवभूमि के सीएम या मुख्यमंत्री भी रह चुके है..। 2002 में उत्तराखंड के थालिसियां निर्वाचन क्षेत्र से 'निशंक' ने विधानसभा चुनाव लड़ा..। जिसमें 'निशंक' की करारी हार हुई..या कहे 'निशंक' के हार का सामना करना पड़ा...। 'निशंक' उत्तराखंड बनने से भी पहले उत्तरप्रदेश की राजनीति में अहम रोल में निभाया करते थे..। चाहे फिर उत्तराखंड निर्माण में सक्रिय भूमिका की ही बात क्यों ना हो...। रमेश पोखरियाल 'निशंक' का हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर को उत्तरप्रदेश से उत्तराखंड में मिलाने में एक अहम योगदान रहा है...। 

'निशंक' एक राजनीतिज्ञ के साथ-साथ एक हिन्दी साहित्यकार भी है...। जिन्होंने अब तक कई कविताएं, उपन्यास, लिखें हैं...। वहीं आज इनकी साहित्य रचनाओं पर शोध भी हो रहा है...। 'निशंक' पिछले 25 सालों से पत्रकारिता से भी जुड़े हुए है...। जिसमें 'नई चेतना, नई राह - नई चेतना' जैसे कई पत्र-पत्रिकाओं का संपादन कर रहे हैं...। 'निशंक' 'दैनिक सीमांत वार्ता' पत्रिका से पिछले कई सालों से जुड़े है...। वहीं वर्तमान में 'निशंक' लगभग दो दर्जन से अधिक साहित्यक, सामाजिक,  सांस्कृतिक संस्थाओं से भी जुड़े हुए है..। 

'देश हम जलनें ने देंगे' कृति के लिए राष्ट्रपति श्री ज्ञानी जैल सिंह द्वारा सम्मानित किए गए...। वहीं 'मातृभूमि के लिए' कृति हेतु राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा, 'ऐ वतन तेरे लिए' कृति के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा 'साहित्य गौरव' से सम्मानित किया गया...। 

'खड़े हुए प्रश्न' कृति के लिए भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी द्वारा 'साहित्य भारती' पुरस्कार से सम्मान करना..। 'हिमालय रक्षा मंच' द्वारा 'हिमपुत्र' पुरस्कार से सम्मानित किया गया...। वहीं भारत अंतर्राष्ट्रीय मैत्री समिति द्वारा 'भारत गौरव सम्मान- 2007' भी दिया गया..। उत्तराखंड उत्थान समिति द्वारा 'गढ़ रत्न' और हिमालय लोक कला संस्थान द्वारा 'साहित्य भूषण' पुरस्कार से सम्मानित किया गया...। इसके अतिरिक्त देश-विदेश में स्थित 300 से अधिक सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्थाओं द्वारा कई बार 'निशंक' को सम्मानित किया जा चुका है..। कई कविता संग्रह और कथा संग्रह अभी तक प्रकाशित हो चुके है...। वर्तमान में 'निशंक' बीजेपी से हरकी की पौड़ी 'हरिद्वार' से सांसद है...। 'निशंक' अपने आप में एक महान राजनेता के साथ-साथ एक अच्छे अध्यापक और कवि भी है...। हम कामना करते है..। 'निशंक' ऐसे ही राजनीति में अपना दम दिखते रहे और देवभूमि को एक नये आयाम तक ले जाए....।   


                                                     रिपोर्ट- दीपक कोहली



03 October 2017

* महान अर्थशास्त्रीय 'डॉ. मनमोहन'

जब-जब हमारे देश की अर्थव्यवस्था की बात होती है...। डॉ. मनमोहन सिंह का नाम तब-तब सबसे आगे आता है..। देश के 13वें प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह अपनी योग्यता के लिए पूरे विश्व में विख्यात है...। चाहे फिर यूएन में सेवा देने की बात हो या फिर देश की अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम देने की बात हो...। हर मोड़ पर डॉ. मनमोहन देश के काम आए है...। 




डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितम्बर 1923 में पंजाब प्रांत में हुआ..। इनके पिता का नाम 'गुरूमुख सिंह' तो वहीं माता का नाम 'अमृत कौर' था..। डॉ. सिंह के परिवार में उनकी पत्नी 'गुरशरण कौर' और उनकी तीन बेटियां हैं...। वैसे ये पाकिस्तान प्रांत पंजाब में रहते थे..। विभाजन के समय इनके पिता भारत चले आए...। पंजाब विश्वविद्यालय से डॉ. मनमोहन ने स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की..। जिसके बाद डॉ. मनमोहन पढ़ाई के लिए कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गए..। जहां से डॉ. मनमोहन ने पीएचडी की पढ़ाई की...। उसके बाद डॉ. सिंह आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय गए..। जहां से डॉ. सिंह ने डी. फिल की डिग्री प्राप्त की...। जिसके बाद डॉ. सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के अध्यापक के रूप में काम करना शुरू कर दिया...। कुछ समय बाद डॉ. सिंह दिल्ली चले आए...। जहां डॉ. सिंह ने प्रतिष्ठित 'दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स' विद्यालय में प्राध्यापक पदभार पर कार्य किया..। इसी बीच डॉ. सिंह 'संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन'  के सचिवालय में सलाहकार चुने गए...।

सन् 1987 से 1990 तक डॉ. सिंह 'जेनेवा' 'साउथ कमीशन' के सचिव भी चुने गए..। वहीं सन् 1971 में मनमोहन 'भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय' में बतौर आर्थिक सलाहकार भी रहे...। इसके तुरंत बाद डॉ. सिंह को 'वित्त मंत्रालय' का मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया..। वहीं कुछ वर्षों बाद डॉ. मनमोहन 'योजना आयोग' के उपाध्यक्ष और 'आरबीआई' (भारतीय रिजर्व बैंक) के गवर्नर भी बनाया गया...। डॉ. सिंह प्रधानमंत्री के 'आर्थिक सलाहकार' और 'विश्वविद्यालय अनुदान आयोग' के भी अध्यक्ष रहे हैं...। देश के इतिहास में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब डॉ. सिंह सन् 1991 से 1996 तक 'वित्त मंत्री' रहे..। जिस पद पर रहकर डॉ. सिंह देश की आर्थिक स्थिति सुधार डाली...। डॉ. सिंह को देश का आर्थिक सुधारों का 'प्रणेता' भी माना जाता है..। आम जनता डॉ. सिंह को 'मौन प्रधानमंत्री' के तौर पर याद करती है..। डॉ. सिंह अपने स्वभाव के लिए पूरे विश्व में लोक प्रसिद्ध है..। डॉ सिंह ने 'अतंर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष' और 'एशियाई विकास बैंक' के लिए काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है..। जिसके लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है...। डॉ. सिंह एकमात्र ऐसे व्यक्ति है जिन्होंने कई राष्ट्रीय और अतंर्राष्ट्रीय संगठनों में देश का प्रतिनिधित्व किया है..।


आइए एक नज़र डॉ. सिंह के जीवन उपाधि पर डालते है..। 

  • 1957 से 1965 तक चंडीगढ़ में स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में अध्यापक रहे।
  • 1969 से 1971 तक दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रोफेसर रहे...। 
  • 1976 में दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के मानद प्रोफेसर रहे।
  • 1982 से 1985 तक भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर रहे..।
  • 1985 से1987 तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे...। 
  • 1990 से 1991 तक भारतीय प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार रहे..।
  • 1991 में प्रधानमंत्री नरसिंहराव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में वित्त मंत्री रहे..।
  • 1991 में पहली बार असम से राज्यसभा सदस्य रहे..।
  • 1994 में दूसरी बार राज्यसभा सदस्य रहे..।
  • 1996 में दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मानद प्रोफेसर रहे..।
  • 1999 में पहली बार (दक्षिण दिल्ली) लोकसभा चुनाव लड़ा और हार गए..। 
  • 2001 में तीसरी बार राज्यसभा सदस्य और सदन में विपक्ष नेता रहे..।
  • 2004 में देश के 13वें प्रधानमंत्री बने..।
  • 2009 में लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने..।


आइए एक नज़र डॉ. सिंह के सम्मान एवं पुरस्कारों में डालते है..।

  • 1987 में डॉ. सिंह को 'पद्य विभूषण' से सम्मानित किया गया..। 
  • 2002 में 'सर्वश्रेष्ठ सांसद' पुरस्कार से सम्मानित किया गया..।
  • 1994 में 'इंडियन साइंस कांग्रेस' का जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार1993 और 1994 में 'एशिया मनी अवार्ड फॉर फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर' पुरस्कार से सम्मानित किया गया...।
  • 1994 में 'यूरो मनी अवार्ड फॉर द फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर' से सम्मानित किया गया...।
  • 1956 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने 'ए़डम स्मिथ पुरस्कार' से सम्मानिक किया...।  

डॉ. सिंह ने आर्थिक उदारीकरण को आर्थिक उपचार के रूप में प्रस्तुत किया...। जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व के बाजार से जोड़ा गया..। जिससे आयात और निर्यात करना बहुत ही सरल हो गया...। जिसका लाभ आज हमारे देश को मिल रहा है..।  जब हमारी देश की नई अर्थव्यवस्था घुटने टेक रही थी... तब डॉ. सिंह ने ही हमारी देश की अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम के साथ मजबूत जोड़ भी दिया...। पंडित नेहरू के बाद मनमोहन एक मात्र ऐसे प्रधानमंत्री है...जिन्होंने अपना पहला कार्यकाल पूरा कर दूसरा कार्यकाल भी पूर्ण रूप से पूरा किया...। 'मनमोहन' को एक महान अर्थशास्त्री के रूप में पूरे विश्व में पहचाना जाता है..। इन्हें देश का मन भी कहा जाता है..। ये देश के महान अर्थशास्त्रियोंं में गिने जाते हैं...।  

                                                       संपादक- दीपक कोहली