साहित्य चक्र

31 December 2023

नया साल-नई उम्मीदें, नए सपने-नए लक्ष्य





नया साल हमारे लिए नया समय ही नहीं बल्कि नए समय के साथ नई उम्मीदें, नए सपने, नया लक्ष्य, नए विचार और नए इरादे लेकर आता है। हम सभी को नए साल की शुरुआत अच्छे और नेक कामों के साथ करनी चाहिए। नया साल हमारे मन के भीतर आशा की नई किरण जगाता है। नया साल तो हर साल आता है लेकिन क्या कभी हमनें ये सोचने की कोशिश की है कि हमने इस साल क्या नया और खास किया जिससे ये साल हमारे लिए यादगार साल बन जाए। हम अपनी जिंदगी में बहुत से उतार-चढ़ाव का सामना करते हैं और ये जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति के लिए हर साल अच्छा ही जाए या हर साल हर किसी के लिए बुरा ही जाए लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता है कि हम बीते कल को भूल जाएं। बीता हुआ कल तो हमें आज के लिए और आने वाले कल के लिए सीख देकर जाता है कि कैसे हम अपने कल को आज से बेहतर बना सकते हैं-

 बीत गया ये साल तो, देकर सुख-दुःख मीत।
क्या पता? क्या है बुना ? नई भोर ने गीत।।
जो खोया वो सोचकर, होना नहीं उदास।
जब तक साँसे ये चले, रख खुशियों की आस।।

हर साल, साल-दर-साल, हम अपने दिल में एक गीत और कदमों में वसंत के साथ नए साल में प्रवेश करते हैं। हमें विश्वास है कि जादुई वर्ष अपने साथ हमारी सभी समस्याओं का समाधान लाएगा और हमारी सभी इच्छाएँ पूरी करेगा। चाहे वह सपनों का घर हो, सपनों का प्रस्ताव हो, सपनों की नौकरी हो, सपनों का साथी हो, सपनों का अवसर हो... और भी बहुत कुछ बेहतर हो।  लेकिन जैसे-जैसे साल शुरू होता है और हम जो कुछ भी सामने आता है उससे निपटते हैं, नए साल की नवीनता, नए संकल्प, नई शुरुआत पहली तिमाही तक लुप्त होने लगती है। वर्ष के मध्य तक हम बहुत अधिक सामान्यता और कई फीकी आशाओं की चपेट में होते  हैं, जो उस वादे से बहुत दूर है जिसके साथ हमने शुरुआत की थी। और आखिरी तिमाही तक हम अपनी वास्तविकता से इतने अभिभूत हो जाते हैं कि हम साल खत्म होने का इंतजार नहीं कर सकते। हम वर्तमान वर्ष को छोड़ते हुए और एक और 'नया साल' मनाने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते  हैं और शुभकामनाएं बांटते है-

 
बाँट रहे शुभकामना, मंगल हो नववर्ष।
आनंद उत्कर्ष बढ़े, हर चेहरे हो हर्ष।।
गर्वित होकर जिंदगी, लिखे अमर अभिलेख।
सौरभ ऐसी खींचिए, सुंदर जीवन रेख।।

नववर्ष वह समय है जब हमें अचानक लगता है कि, ओह, एक साल बीत गया। हम कुछ पलों के लिए स्तब्ध हो जाते हैं कि समय कितनी जल्दी बीत जाता है, और फिर हम वापिस अपने काम में व्यस्त हो जाते हैं। मजेे की बात यह है कि ऐसा साल में लगभग एक बार तो होता ही है। यदि हम आश्चर्य के इन क्षणों की गहराई में जाएं, तब हम पाएंगे कि हमारे भीतर कुछ ऐसा है जो सभी घटनाओं को साक्षी भाव से देख रहा है। हमारे भीतर का यह साक्षी भाव अपरिवर्तित रहता है और इसीलिए हम समय के साथ बदलती घटनाओं को देख पाते हैं। जीवन की वे सभी घटनाएं जो बीत चुकी हैं, एक स्वप्न बन गई हैं। जीवन के इस स्वप्न-जैसे स्वभाव को समझना ही ज्ञान है। यह स्वप्न अभी इस क्षण भी चल रहा है। जब हम यह बात समझते हैं तब हमारे भीतर से एक प्रबल शक्ति का उदय होता है और फिर घटनाएं व परिस्थितियां हमें हिलाती नहीं हैं। हालांकि, घटनाओं का भी जीवन में अपना महत्व है। हमें घटनाओं से सीखना चाहिए और आगे बढ़ते रहना चाहिए।  नया साल नई उम्मीदें, नए सपने, नए लक्ष्य और नए आइडिया की उम्मीद देता है, इसलिए सभी लोग खुशी से बिना किसी मलाल के  इसका स्वागत करते हैं-

 आते जाते साल है, करना नहीं मलाल।
सौरभ एक दुआ करे, रहे सभी खुशहाल।।
छोटी सी है जिंदगी, बैर भुलाये मीत।
नई भोर का स्वागतम, प्रेम बढ़ाये प्रीत।।

हालाँकि नए साल पर अपनी आशाएँ रखना हमारे लिए बहुत अच्छी बात है, हमें यह समझने की ज़रूरत है कि आशाओं के साथ निराशाएँ भी आती हैं। जीवन द्वंद्व का खेल है और नया साल भी इसका अपवाद नहीं है। यदि हम 'बीते वर्ष' पर ईमानदारी से विचार करें, तो हमें एहसास होगा कि  यह आवश्यक नहीं है कि वर्ष ने वह प्रदान किया हो जो हमने उससे चाहा था, लेकिन इसने हमें कुछ बहुमूल्य सीख और अनुभव अवश्य दिए। ये अलग से बहुत महत्वपूर्ण नहीं लग सकते हैं, लेकिन ये संभवतः प्रकृति का हमें उस उपहार के लिए तैयार करने का तरीका है जो उसने हमारे लिए रखा है जिसे वह अपनी समय सीमा में वितरित करेगी। साथ ही, अगर साल ने हमसे कुछ बहुत कीमती चीज़ छीन ली है, तो निश्चित रूप से उसने उसकी समान मात्रा में भरपाई भी कर दी है। वर्ष के अंत में, हमें एहसास होता है कि हमारी बैलेंस शीट काफी उचित है। तो, आइए हम आने वाले वर्ष में इस विश्वास के साथ प्रवेश करें कि नए साल का जादू यह जानने में निहित है कि चाहे कुछ भी हो, हर निराशा के लिए मुआवजा होगा, हर इच्छा की पूर्ति के लिए एक सीख होगी, दर्द-दुखों का अंत होगा, अपनेपन की धूप होगी-

 छँटे कुहासा मौन का, निखरे मन का रूप।
सब रिश्तों में खिल उठे, अपनेपन की धूप।।
दर्द- दुखों का अंत हो, विपदाएं हो दूर।
कोई भी न हो कहीं,  रोने को मजबूर।।

नए साल पर अपने लिए लक्ष्य निर्धारित कर लें। छात्र हों या नौकरीपेशा, सभी के लिए कोई न कोई लक्ष्य होना जरूरी होता है। भविष्य को बेहतर बनाने के लिए क्या कर सकते हैं और किस दिशा में प्रयास करना है, इन सब का निर्धारण करने के बाद उसे पूरा करने का संकल्प ले लें। आपका संकल्प हमेशा लक्ष्य को पूरा करने की याद दिलाता रहेगा। सभी 'नए साल' को जीवनकाल से  जोड़ते हैं और हमारा जीवनकाल आशाओं और निराशाओं, सफलताओं और असफलताओं, खुशियों और दुखों के बारे में है और यह वर्ष भी कम जादुई नहीं होगा। तो इस वर्ष आप अपने संकल्पों को कैसे पूरा कर सकते हैं?  इस बारे सोच समझकर आगे बढिये, दूसरों से समर्थन मांगें, अपने मित्रों और परिवार से आपका उत्साह बढ़ाने के लिए कहें। उन्हें अपने लक्ष्य बताएं और आप क्या हासिल करना चाहते हैं। अपने लिए एक इनाम प्रणाली बनाएं, अल्पकालिक लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें पूरा करने के लिए स्वयं को पुरस्कृत करें। अपने ऊपर दया कीजिये, कोई भी एकदम सही नहीं होता। अपने आप को कोसने की बजाय गहरी सांस लें और नव उत्कर्ष के प्रयास करते रहें-

 खोल दीजिये राज सब, करिये नव उत्कर्ष।
चेतन अवचेतन खिले, सौरभ इस नववर्ष।।
हँसी-खुशी, सुख-शांति हो, खुशियां हो जीवंत।
मन की सूखी डाल पर, खिले सौरभ बसंत।।

ऐसा माना जाता है कि साल का पहला दिन अगर उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाए, तो पूरा साल इसी उत्साह और खुशियों के साथ बीतेगा। हालांकि भारतीय परम्परा के अनुसार नया साल एक नई शुरुआत को दर्शाता है और हमेशा आगे बढऩे की सीख देता है। पुराने साल में हमने जो भी किया, सीखा, सफल या असफल हुए उससे सीख लेकर, एक नई उम्मीद के साथ आगे बढऩा चाहिए। ताकि इस वर्ष की एक सुखद पहचान बने-

 खिली-खिली हो जिंदगी, महक उठे अरमान।
आशा है नव साल की, सुखद बने पहचान।।
छेड़ रही है प्यार की, मीठी-मीठी तान।
नए साल के पँख पर, खुशबू भरे उड़ान।।



                                                                          -प्रियंका सौरभ 


नववर्ष 22 जनवरी 2024 को बजेगा भारत का आध्यात्मिक डंका



वैश्विक स्तरपर दुनियां का हर देश नए वर्ष 2024 की खुशियों में सारोबार होकर मना रहा हैहर देश में नववर्ष 2024 का जोरदार ढंग से स्वागत किया जा रहा है जहां मदिरा पान से लेकर डिजिटल डांस तक तो वही श्रद्धा सुमन सादगी से लेकर आध्यात्मिक भाव से झूम कर अपने-अपने आध्यात्मिक स्थलों पर नववर्ष 2024 का स्वागत करने में दुनियां मशगूल है, परंतु भारत में सबकी नज़रें नववर्ष के प्राथमिक द्वारा यानें प्रथम माह की 22 जनवरी 2024 पर टिकी हुई है, जो प्रभु श्री राम के सैकड़ो वर्षों से टेंट विराजमान से विशाल पक्के आध्यात्मिक घर में विराजमान की अनमोल यादगारक्षण साक्षी बनेगा,जिसपर पूरी दुनियां की नज़रें लगी हुई है, जिसकी तैयारियों में संतरी से लेकर मंत्री तक लगे हुए हैं, जिसे यादगार पल बनाने मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक हरस्तर की तैयारी का जायजा लेकर हजारों करोड रुपए की व्यवस्था कर कार्य किया जा रहा है जो सारी दुनियां ने दिनांक 30 दिसंबर 2023 को देखा कि माननीय पीएम, सीएम सहित अनेक महत्वपूर्ण व्यक्तित्वो ने तैयारी का जायजा व अयोध्या धाम जंक्शन को सुगम बनाने प्रयासों की झड़ी लगा दी है। 

चूंकि रामोत्सव 22 जनवरी 2024 नव वर्ष 2024 को बजेगा भारत में आध्यात्मिक डंका, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, विश्व को नए वर्ष 2024 का नायाब तोहफा प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 साथियों बात अगर हम 22 जनवरी 2024 को प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की करें तो, हिंदू धर्म में 22 जनवरी 2024 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया जाएगा, क्योंकि इस दिन सालों बाद अयोध्या में रामलला अपने भव्य राम मंदिर में विराजित होंगे। श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां अंतिम दौर में है। पूरी दुनियां इस ऐतिहासिक पल की साक्षी बनेगी।अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की रूपरेखा तय हो चुकी है। 15 जनवरी से 22 जनवरी तक कई अनुष्ठान होंगे। हर घर अयोध्या बनाने की तैयारी न्यास के द्वारा 22 जनवरी को राम उत्सव मनाने के लिए विभिन्न बैठकों में महिलाओं से लाल व पीले रंग के पारंपरिक परिधान पहनने, मेंहदी रचाने, घरों में रंगोली सजाने, पूरे दिन भजन कीर्तन करने सहित शाम को दीपोत्सव का कार्यक्रम आयोजन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। 


साथियों बात अगर हम पूरे विश्व में मूल भारतीयों द्वारा 22 जनवरी 2024 को रामोत्सव मनाने की करें तो, वैश्विक स्तरपर दुनियां के कोने-कोने में बसे मूल भारतीयों की अपने वतन भारत के प्रति आध्यात्मिक आस्था उनके रग रग में समाई है, यही कारण है कि हजारों किलोमीटर सात समंदर पार अपने वतन से दूर रहने के बावजूद वहां अपने देश में विभिन्न भगवानों का मंदिर बनाकर नित्य नियम पूजा पाठ करते हैं, जिसका सटीक उदाहरण हम ब्रिटेन के पीएम द्वारा हिंदू त्योहार मनाने मंदिर जाने और जी-20 के समय भारत आने पर अक्षरधाम मंदिर का दौरा करना इस आस्था की पुष्टि करता है। भारत में दिनांक 22 जनवरी 2024 को प्रस्तावित प्रभु श्री राम मंदिर की संभावित प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन की घोषणा के उपरांत अमेरिका सहित पूरी दुनियां में मूल भारतीयों द्वारा वहां स्थित मंदिरों में तैयारियां शुरू की गई है। अमेरिका के शिकागो के एक समुदाय नेता ने प्रेस में बताया कि, यह सपने सच होने जैसा है। वीएचपी ऑफ अमेरिका इन समारोहों में शामिल होने, हजार से अधिक मंदिरों और व्यक्तियों की भागीदारी की सुविधा के लिए वेबसाइट भी लॉन्च कर दी है। यह जानकारी अमेरिका के डॉक्टर साहब ने दी जो 22 जनवरी 2024 के मंदिर उद्घाटन समारोह में अमेरिकी अतिथियों में से एक है।चूंकि मंदिर उद्घाटन की तिथि घोषित की गई है, श्रद्धालियों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी गई है और वीवीआईपी आमंत्रण में माननीय प्रधानमंत्री राष्ट्रपति से लेकर तमाम नेता शामिल होंगे, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, भारत अमेरिका सहित पूरी दुनियां में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन धार्मिक रैलीयां दीप वंदन सहित अनेक कार्यक्रम कर देश खुशी मनाएगा। 


साथियों बात अगर हम माननीय पीएम द्वारा दिनांक 30 दिसंबर 2023 को अयोध्या में प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा उत्सव संबंधी अपने संबोधन और बयान की करें तो, ये ऐतिहासिक क्षण, बहुत भाग्य से हम सभी के जीवन में आया है। हमें देश के लिए नव संकल्प लेना है, खुद को नई ऊर्जा से भरना है। इसके लिए 22 जनवरी को आप सभी अपने घरों में, मैं पूरे देश के 140 करोड़ देश्वासियों को अयोध्या की इस पवित्र भूमि से प्रार्थना कर रहा हूं, अयोध्या की प्रभु राम की नगरी से प्रार्थना कर रहा हूं, मैं 140 करोड़ देश्वासियों को हाथ जोड़कर के प्रार्थना कर रहा हूं, कि आप 22 जनवरी को जब अयोध्या में प्रभु राम विराजमान हों, अपने घरों में भी श्रीराम ज्योति जलाएं, दीपावली मनाएं। 22 जनवरी की शाम पूरे हिन्दुस्तान में जगमग-जगमग होनी चाहिए। लेकिन साथ ही, मेरी सभी देशवासियों से एक करबद्ध प्रार्थना और भी है। हर किसी की इच्छा है कि 22 जनवरी को होने वाले आयोजन का साक्षी बनने के लिए वो स्वंय अयोध्या आएं लेकिन आप भी जानते हैं कि हर किसी का आना संभव नहीं है। 

अयोध्या में सबका पहुंचना बहुत मुश्किल है और इसलिए सभी राम भक्तों को, देशभर के राम भक्तों को, उत्तर प्रदेश के विशेषकर के राम भक्तों को मेरा हाथ जोड़कर के प्रणाम के साथ प्रार्थना है।  मेरा आग्रह है कि 22 जनवरी को एक बार विधिपूर्वक कार्यक्रम हो जाने के बाद, 23 तारीख के बाद, अपनी सुविधा के अनुसार वो अयोध्या आएं,  अयोध्या आने का मन 22 तारीख को न बनाएं। प्रभु राम जी को तकलीफ हो ऐसा हम भक्त कभी कर नहीं सकते हैं। प्रभु राम जी पधार रहे हैं तो हम भी कुछ दिन इंतजार हरें, 550 साल इंतजार किया हैं, कुछ दिन और इंतजार कीजिए। 

और इसलिए सुरक्षा के लिहाज से, व्यवस्था के लिहाज से,  मेरी आप सबसे बार-बार प्रार्थना है कि कृपा कर, क्योंकि अब प्रभु राम के दर्शन अयोध्या का नव्य, भव्य, दिव्य मंदिर आने वाली सदियों तक दर्शन के लिए उपलब्ध है। आप जनवरी में आए, फरवरी में आए, मार्च में आए, एक साल के बाद आए, दो साल के बाद आए, मंदिर है ही। और इसलिए 22 जनवरी को यहां पहुंचने के लिए भीड़-भाड़ करने से आप बचिये ताकि यहां जो व्यवस्था है, मंदिर के जो व्यवस्थापक लोग हैं, मंदिर का जो ट्रस्ट है, हमें इतना पवित्र उन्होंने काम किया है, इतनी मेहनत करके किया है, पिछले 3-4 साल से दिन-रात काम किया है, उनको हमारी तरफ से कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए, और इसलिए मैं बार-बार आग्रह करता हूं कि 22 को यहां पहुंचने का प्रयास न करें। 

कुछ ही लोगों को निमंत्रण गया है वे लोग आएंगे और 23 के बाद सारे देश्वासियों के लिए आना बड़ा सरल हो जाएगा।प्राचीन काल में अयोध्यानगरी कैसी थी, इसका वर्णन खुद महर्षि वाल्मीकि जी ने विस्तार से किया है।उन्होंने लिखा हैकोसलो नाम मुदितः स्फीतो जनपदो महान्। निविष्ट सरयूतीरे प्रभूत-धन-धान्यवान्। अर्थात्, वाल्मीकि जी बताते हैं कि महान अयोध्यापुरी धन-धान्य से परिपूर्ण थी, समृद्धि के शिखर पर थी, और आनंद से भरी हुई थी। यानी, अयोध्या में विज्ञान और वैराग्य तो था ही, उसका वैभव भी शिखर पर था।अयोध्या नगरी की उसी पुरातन पहचान को हमें आधुनिकता से जोड़कर वापस लाना है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि नव वर्ष 2024-22 जनवरी 2024 को बजेगा भारत का आध्यात्मिक डंका विश्व को नए वर्ष 2024 का नायाब तोहफा-प्रभु श्री राम की प्राणप्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024।रामोत्सव 22 जनवरी 2024-प्रभु श्रीराम का टेंट विराजमान से विशाल पक्के आध्यात्मिक घर में विराजमान अनमोल ऐतिहासिक यादगार क्षण बनेगा।


                                        - एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी




पढ़िए 16 कविताएं एक साथ...



फिर आ गया नया साल

आ गया फिर अब देखो नया साल 
दे गया खट्टी मीठी कुछ यादें बीता कल
ऐसी तबाही मचाई थी कुदरत ने
डर के साये में बीता था हर लम्हा हर पल

भारी बरसात में कुदरत ने जो मचाई थी तबाही
खंडहर देते रहेंगे जीवन भर उसकी गवाही
समय तो मरहम लगा देगा हर जख्म पर
भूलेंगे कैसे वो जिन्होंने खोये परिवार माँ बाप भाई

डूबा देश पीड़ा में उपद्रवियों ने मणिपुर जलाया
सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बना इतिहास रचाया
जी20 का सम्मेलन करके भारत का लोहा मनवाया
क्रिकेट विश्व कप में भारत को ऑस्ट्रेलिया ने हराया

एक ऐतिहासिक पल भी आया इस वर्ष
जब चंद्रमा पर उतरा भारत का चंद्रयान
पूरा विश्व चकित होकर देखता रह गया
इसरो के वैज्ञानिकों की यह अद्भुत उड़ान

धारा 370 पर सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया
देशप्रेमी तो खुश हुए पर कुछ को रास न आया
नव वर्ष में होंगे देश में लोकसभा के चुनाव
सत्तापक्ष को चुनौती देने विशाल गठबंधन बनाया

करें स्वागत नव वर्ष का दिल खोल कर
मन में न रखें ईर्ष्या द्वेष न कोई मलाल
रहना पड़ेगा सबको वैसे ही जैसा समय चाहेगा
घुट घुट के जियें या रहें खुशहाल

                                                   - रवींद्र कुमार शर्मा

*****


नया साल नयी आशा
नया साल आ रहा है,
नयी आशा ला रहा है,
नए सपने मन को लुभा रहे है,
लगता है कुछ नया होने वाला है,
ठण्ड बढ़ती जा रही है,
चारो तरफ नए साल की धूम है,
अमीरो अपना नया साल होटल में मनाते हैं, 
गरीबो के लिए हर दिन एक जैसा होता है, 
नयी आशा यही है की दूरी मिट जाएगी,
नया साल नयी आशा लेकर आया है,
प्यार का रंग होगा देश में,
सबके चेहरे पर होगी ख़ुशी,
आने वाला साल ख़ुशी अपार लाये,
ढेरो सौगात लाये हम डूब जाये उन खुशियों में,
नफरत की दीवार न रहे सबके बीच में,
नयी ऊर्जा का प्रकाश हो,
हर कोई मस्त हो नए साल में,
कोहरे में लिपटी जिंदगी है, 
नए साल का इंतजार कर रही है,
नया साल नया खुशियाँ ला रहा है,

                                                     - गरिमा

*****

नया वर्ष

नया वर्ष नया पैगाम लाया है।
नफरत नहीं मोहब्बत का
एहसास लाया है।
नया वर्ष नया जुनून लाया है।
हार नहीं जीत का
ख्वाब लाया है।
नया वर्ष नई बहार लाया है।
खिलती नहीं जो कलियां
उनको फूल बनाने आया है।
नया वर्ष नया इतिहास लाया है।
मिला नहीं जो आज तक
उसकी आशीष लाया है।
नया वर्ष नया अंदाज लाया है।
बिखर चुके है जो जज्बात
उनका हिसाब लेने आया है।

                                              - डॉ.राजीव डोगरा


*****


करिये नव उत्कर्ष

मिटे सभी की दूरियाँ, रहे न अब तकरार।
नया साल जोड़े रहे, सभी दिलों के तार।।

बाँट रहे शुभकामना, मंगल हो नववर्ष।
आनंद उत्कर्ष बढ़े, हर चेहरे हो हर्ष।।

माफ करो गलती सभी, रहे न मन पर धूल।
महक उठे सारी दिशा, खिले प्रेम के फूल।।

गर्वित होकर जिंदगी, लिखे अमर अभिलेख।
सौरभ ऐसी खींचिए, सुंदर जीवन रेख।।

छोटी सी है जिंदगी, बैर भुलाये मीत।
नई भोर का स्वागतम, प्रेम बढ़ाये प्रीत।।

माहौल हो सुख चैन का, खुश रहे परिवार।
सुभग बधाई मान्यवर, मेरी हो स्वीकार।।

खोल दीजिये राज सब, करिये नव उत्कर्ष।
चेतन अवचेतन खिले, सौरभ इस नववर्ष।।

आते जाते साल है, करना नहीं मलाल।
सौरभ एक दुआ करे, रहे सभी खुशहाल।।

हँसी-खुशी, सुख-शांति हो, खुशियां हो जीवंत।
मन की सूखी डाल पर, खिले सौरभ बसंत।।


- डॉ सत्यवान सौरभ


*****

नय नया साल आया है

इंतेज़ार तेरा है कि 
नया साल आया है, 
आ भी जाओ कि फिर
दौरे जाम आया है, 
वाइज़ सभी चल दिये 
जानिब ए मैखाना , 
हमको मगर बस तेरा 
ही ख्याल आया है, 
सजने लगी महफ़िलें 
के नया साल आया है, 
बता हमारे लिए भी क्या
कोई इंतेज़ाम आया है,
साल आया है खुशियों में 
डूबा डूबा हर शख़्श
नज़र आता है, 
क्यों न हो उम्मीदों का 
जो नया साल आया है , 
हर कोई मुब्तिला है, यहां,
नए साल की खैर आमद में,
वो भी ,आ गए मुश्ताक़ , 
ख़्याल मेरा उनको आया है । 


                                            - डॉ. मुश्ताक अहमद शाह 

*****


वो इंकलाब के शोर को इस तरह दबा रहा...
वो इंकलाब के शोर को इस तरह दबा रहा है
जैसे नई नवेली भोर को कोहरा मिटा रहा है
अब खौंफ निगाहों में दस्तक दे रहा है उसकी
मानो तख्त ए बादशाहत कोई रोज़ हिला रहा है
वो इंकलाब के शोर को इस तरह दबा रहा...
बड़ी अच्छी है साजिश तेरी अब न चलेगी
झूठी है ये गुजारिश तेरी अब न चलेगी
अवाम उम्दा अदायेगी से वाकिफ हैं हर तरह
तू आंख से आंसू नहीं पानी बहा रहा है
वो इंकलाब के शोर को इस तरह दबा रहा...
काफ़िर कभी रस्म को सादगी से निभा ले
हुजरे में बीता रात बिछौना धरती बना ले
फितरत में उसकी शुमार है विलासता इस कदर
जो लोगों में खुदको फकीर बता रहा है
वो इंकलाब के शोर को इस तरह दबा रहा...

- नरेन्द्र सोनकर बरेली


*****

प्रेम
प्रेम अहसास है दिलों का,
जवाब है मुश्किलों का,
ज़रूरत है संसार की,
तपस्या है इंतज़ार की,
आरज़ू ख़ुश देखने की,
चाहत बस मिलने की,
समर्पण है सम्मान का,
दर्पण नव निर्माण का,
बंधन सच्चे रिश्ते का,
साथ किसी फरिश्ते का,
जिज्ञासा है विचारों की,
उम्मीद है नए सवेरे की,
खुशियाँ है अपनेपन की,
पहचान है धड़कन की,
अवसर सजने सवरने का,
उत्साह है कुछ करने का,
भय है तुम्हें खोने का,
कारण है जो रोने का,
साज़ है इस जीवन का,
राज़ है भीगे सावन का,
ज़रिया है नेक बनने का,
जीवन साथी चुनने का,
उमंग है फिज़ाओ की,
तरंग है अदाओं की,
मिसाल है मानवता की,
शुरुआत है सुंदरता की,
आवाज़ है आत्मा की,
इच्छा है परमात्मा की,
आस है और उम्मीद है,
इस जीवन का संगीत है,
आस्था है विश्वास है,
रास्ता है उल्लास है,
बुराई इससे ख़त्म है,
अच्छाई की ओर कदम है,
ईश्वर मन के अंदर है,
प्रेम सत्य है,शिव है,सुंदर है।

- आनन्द कुमार

*****


घड़ी
टिक टिक का राग सुनाती हूँ।
कोई सुने या न सुने मैं बस गाती जाती हूँ।।
सुबह हो या शाम, दिन हो या रात मैं चलती जाती हूँ।
जो मेरी राह पर चले उन्हें सफलता के शिखर पर पहुंचाती हूँ।।
कलाई पर पहने तो कलाई की शोभा बढाती हूँ।
कमरे की दीवार पर लगूँ तो कमरे को चार चांद करती हूँ।।
रूप मेरा छोटा हो या बड़ा।
सबको समय का महत्व बताती बच्चा हो चाहे हो बूढ़ा।।
मेरी खासियत तो सभी है जानते।
जो जानकर भी नहीं समझते वो जरूर है पछताते।।
बच्चे जब भी मेले में है जाते।
खरीदकर मुझे घर जरूर हैं लाते।।
चाहे लोग मुझे पहनना कर दे बंद।
शायद मेरे वगैर लोग नहीं ले सकते जीवन का आनंद।।

- विनोद वर्मा

*****

सामने मंजिल थी,
पीछे थी आवाज उसकी,
रुकते तो सफर छूट जाता,
चलते तो उससे बिछड़ जाते,
मंजिल की भी हसरत थी,
और उससे मोहब्बत भी,
ए दिल यह बता मुझको,
उस वक्त मैं कहां जाता,
मुद्दत का सफर भी था,
और बरसों की चाहत भी थी,
रुकते तो बिखर जाते,
चलते तो दिल टूट जाते,
यूं समझ लो की...
लगी प्यास गजब की थी,
और पानी में भी जहर था,
पीते तो मर जाते,
और ना पीते तो भी मर जाते..

- अभिषेक सक्सेना


*****

शीर्षक - माँ

"माँ", "अम्मी", "आई"
इन सभी पर्यायों में मानो पूरी सृष्टि हो समाई ||
झूठ फरेब सब धोखा और माया है,,
इक मात्र उसके आँचल में मिलती छाया है ||
माँ हैं हमारी प्रथम गुरु,
ईश्वर की रचना प्रथम ,,
संतान के कल्याणार्थ निभाती भूमिका अहम् ,
जीवन में सबसे बड़ा भाग्य है 'माँ' का होना,
माँ की दुआओं से सिंचित होता है घर का कोना-कोना।।
कर्तव्यों और कर्मों से बनी ईश्वर के समकक्ष,
सच्चे दोस्त और साथी सम हासिल कराती लक्ष्य,,
त्याग, सहनशीलता, समर्पणता का हैं सागर,,
ईश्वर सदृश्य प्रेरणा देती इनकी जीवन गागर ||
घुटने-घुटने गिरना-उठना,,
उसकी गोदी में ही सो जाना कई बार ,,
शरारतें करता मेरा बचपन....
माफियां देता उसका प्यार ||
धूप हुई तो आँचल बन कर ,,
कोने-कोने छाई "माँ"...
"धरती", "अम्बर", "आग", "हवा", "जल"
जैसी ही सच्चाई "माँ" ||
घर में झीने रिश्ते मैंने ,,
लाखों बार उधड़ते देखा है...
चुपके-चुपके कर देती है,
जाने कब तुरपाई "माँ" ||
सारे रिश्ते जेठ दुपहरी,,
गर्म हवा, आतिश अंगारे ,,
झरना, दरिया, झील, समंदर,
भीनी सी पुरवाई "माँ" ||
माँ कैसे पढ़ लेती है मीलों दूर से,
अंतः मन की आवाज।
कैसे कहती है हम बच्चों को हमेशा कि,,
जा ऐश कर 'अच्छे हैं हालात' ||
माँ को अपना हर सपना,
अपने बच्चों के अक्श से जीना है ,,
क्यों हम बच्चों का हर दर्द तुझे
'हम' से ज्यादा सताता है ||
"ऐ माँ" तू कैसे टूट कर भी खुश रहती है ,,
तू किस माटी का है आकार ....
इस पूरी सृष्टि में ना मिल सकेगा,
ना कर सकेगा कोई ,
"माँ" तेरे जैसा बिना शर्तों वाला प्यार...||
- सौजन्या

*****

तुम क्या समझोगे

खातिर पेट औरों का भरने ,
भरी दुपहरी में जब ,
कर सिंचित खेत को पसीने से अपने ,
खिलाकर दूसरों को पेटभर ,
भूखे सोना पड़ता है खुद जब ,
मुझ पर क्या गुजरती है ,
तुम क्या समझोगे।
पी सकें दूध बच्चे तुम्हारे ,
हर मौसम में इसलिए ,
चार गाय ,भैंस का लाने ,
जंगल –जंगल भटककर ,
बच्चों को अपने सिर्फ ,
पानी पिलाकर सुलाता हूँ जब ,
हाल मेरा क्या होता है तब ,
तुम क्या समझोगे।
रह सको चैन से तुम ,
ठंड ,धूप और बर्षा में ,
खातिर तुम्हारे आशियाने बनाने ,
कर देता हूँ एक रात –दिन ,
और खुद खुले आसमां तले,
क्या –क्या सह कर सो जाता हूँ ,
तुम क्या समझोगे।
ढो –ढोकर दिन भर ,
तेरे एशो आराम की चीजें ,
सब्जियां ,मिठाइयां ,कपड़े ,
देख – देख सब सीना पसीजे ,
रख दिल पर पत्थर जब ,
खाली हाथ लौट घर आता हूँ ,
मेरे बच्चों पर क्या गुजराती है तब ,
तुम क्या समझोगे।
गटक जाता हूँ तेरे कटु बचनों को प्रसाद समझ जब ,
और तो कहीं देखा नहीं बस ,
भगवान तुम्हीं में पाता हूँ ,
नफरत तेरी देख ,
दिल मसोस कर नजरें नहीं मिलाता हूँ ,
मेरी आत्मा कैसे झकझोर होती है तब ,
तुम क्या समझोगे।
इतना सब सहकर भी ,
भूखा ,नंगा रहकर भी ,
तेरी खातिर ,
गर्मी से झुलस ,ठंड से ठिठुर ,
बाड़ में बह-बहकर भी,
जब मैं तुझे सुख पहुँचाता हूँ ,
कितना संतोष मुझे होता है तब ,
तुम क्या समझोगे।

- धरम चंद धीमान

*****

कर्नल जसवंत सिंह चंदेल कलोल वाले

ना देखे हिंदू ,मुस्लिम ना देखे इन्होंने ईसाई,
सबकी मदद करते दिल खोलकर,
नाम है जिनका कर्नल जसवंत सिंह कलोल वाले,
बन के किसी के साथी,संरक्षक तो किसी के भाई।

थोड़ी सी भी अक्कड़ नहीं स्वभाव में इन्होंने पाई,
दिल खोल कर सहायता करते जरूरतमंदों की,
ऐसा लगता है जैसे जानते हैं ये सब की पीर पराई।

जिस किसी सदस्य से भी पता लगता है इनको,
जरूरत है किसी को किसी प्रकार की सहायता की,
किसी को दो ,तो किसी को चार,तो किसी को 6000 की, 
सहायता राशि है इन्होंने तुरंत भिजवाई।

इतने बड़े रैंक से रिटायर हुए फिर भी,
धेले भर की अक्कड़ नहीं है इनमें,
बिल्कुल सबका अपना बनकर,
गरीबों को है हमेशा सहायता राशि पहुंचाई।

मंजूषा बेटी नहीं सिर्फ इनकी अब,
मंजूषा तो है बेटी अब हम सब ने अपनी बनाई,
हर मां, बहन ,बेटी में दिखती हमको मंजूषा,
हर हाल में सहायता करेंगे हम भी,यह कसम है अब हमने खाई।

दूसरों की सहायता के लिए दान कर रहे,
 आप अपनी मेहनत की पाई– पाई,
धन्य है कर्नल जसवंत सिंह चंदेल कलोल वाले आप,
जो मंजूषा जैसी बेटी अपने पाई।


                                                  - लेफ्टिनेंट जय महलवाल

*****


कुछ अभी बाकी हैं "
मिला कुछ, तो
कुछ अभी बाकी है
सपने पूरे हुए कुछ ,तो
बहुत अभी बाकी है
मिले कुछ ऐसे पराये
जो अपने हो गए ,तो
कुछ अपनाना अभी
अपने को बाकी है
देखा आसमां- जमीं को
बहुत दूर से एक साथ ,तो
देखना अभी उस
क्षितिज को भी बाकी है
सफल पाया खुद को
हमने बहुत से बेड़ियोँ से ,पर
अभी भी बहुत से
इम्तहां देने बाकी है
आएंगे बहुत से मंजिल
लेके बहुत से रास्ते ,पर
उन रास्तो का असर
अभी बाकी है
- फूल कुमारी

*****

प्रेम सहज सुबास रे मन
मन में रह गईं मन की बाते,
बीत गया यह साल रे मन।
मैं तो निशि दिन लिख रही थी,
हिय के नूतन पात रे मन।
फिर क्यों ऐसा लग रहा है,
बात बच गई खास रे मन।
तेरे मन की मैं ही बाचूँ ,
तू मेरा मन बाँच रे मन।
वर्ष भर मैं तो ना समझी,
तू क्यों समझे साँच रे मन।
बाँचते रहना अहर्निश ,
गीत मेरे साथ रे मन।
सखा सखी मेरे हृदय में,
रह रहें है साथ रे मन।
वर्ष भर हृदय प्रफुल्लित,
अमिय कर रसपान रे मन।
जैसे प्रतिपल साथ बीता,
मधुर मधुमय साल रे मन।
बीत जाए सरल सुन्दर,
प्रेम सहज सुबास रे मन।
बीतने वाले पलों में,
स्वयं का अहसास रे मन।
डोर पकड़े है हमेशा,
आ रहा नव साल रे मन।

- स्नेहलता द्विवेदी

*****

किसी सूखती नदी के कूल से बँधी
प्रतीक्षित स्पंदन को,
कागज की नाव मैं
किसी के बीत जाने के क्रम में
बचे चटक उन्मादी से,
चिपके पदचिन्ह मैं
अपनी बीन अपनी रागिनी में
झूमते उछलते पुलकित से,
त्योहारों का शेष भाग मैं
छूटती आसक्ति, ढुलकते वर्ष का
सहते परिचित सा आघात,
स्मृतियों मे विस्मृत मैं
'कहाँ रह गया देने को कम मुझसे?'
स्नेह मधु पर मधुप सा बौराया,
अपनी क्षमताओं पर उठता प्रश्न मैं
अभिनन्दन किया था पाँवड़ी पलकों से जिनका
उनकी उल्टी गिनतीयों की साझी - साक्षी जिसकी अंतिम साँसे,
वो वहीँ ठहरा दिसंबर मैं
यकीन मानो! दिसंबर हो जाना आसान नहीं,
शुभकामनाएँ तुम्हें नव माह, नव वर्ष की
किन्तु! सत्य यह है कि
दिसंबर होना आसान नहीं।

- सुषमा तिवारी


*****


फरवरी और दिसंबर
तुमसे मिलने के मौसम फरवरी थे
हमारे बिछड़ने के दिसंबर
होठों के चुम्बन फरवरी थे
आलिंगन दिसंबर
लाल गुलाब फरवरी थे
पीले टेसू दिसंबर
माथे की बिंदिया फरवरी थी
पैरों के नूपुर दिसंबर
सावन भादों फरवरी थे
उबलते जेठ दिसंबर
त्यौहार सारे फरवरी थे
पीड़ा बन गई दिसंबर
मधुर गीत फरवरी थे
वेणुनाद दिसंबर
कोरे कागज़ फरवरी थे
नीली कलम दिसंबर
प्रार्थनाएं सारी फरवरी थी
प्रतीक्षा बनी दिसंबर
राधा रमण फरवरी थे
खारी यमुना दिसंबर
कृष्ण हमारे फरवरी थे
गाय गोपियां दिसंबर
द्वारिकापुरी फरवरी थी
कुंज बना दिसंबर
कविताएं सारी फरवरी थी
किस्से कहानियां दिसंबर।

- जुवि शर्मा

*****