साहित्य चक्र

11 March 2026

भारतीय रेलवे की दयनीय स्थित!



अक्सर मैं इधर-उधर जाने के लिए भारतीय रेलवे की सेवाओं का अधिक इस्तेमाल करता हूं। कुछ दिन पहले मैंने जयपुर से कोलकाता और कोलकाता से जयपुर आना-जाना किया। इस दौरान मुझे भारतीय रेलवे की दयनीय स्थिति को देखकर बहुत ही दुःख हुआ। बतौर भारतीय नागरिक मेरे मन में कई विचार उत्पन्न हुए। जैसे- क्या हम भारतीयों में अभी शिक्षा की कमी है ? क्या हम भारतीय अपनी सरकारी संपत्ति को व्यक्तिगत संपत्ति के मुकाबले सम्मान और उसके रखरखाव का ध्यान नहीं दे पाते हैं ? सरकारी संपत्ति के प्रति हम भारतीयों का इतना गंदा व्यवहार क्यों होता है ?






जयपुर से ट्रेन में बैठने के बाद दिल्ली जाने तक ट्रेन के शौचालय इतने गंदे हो गए थे कि शौचालय जाने तक का मन खत्म हो गया। लोग शौचालय जाते हैं और फ्लैश तक नहीं चलते हैं। आखिर लोग ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं मेरी समझ से परे है। जो बात मैं कह रहा हूं यह कोई स्लीपर या जनरल बोगी की बात नहीं है, बल्कि 2 एसी और थर्ड एसी बोगी के अनुभव मैं आपके साथ साझा कर रहा हूं। रेलवे के 2 एसी और थर्ड एसी में अधिकतर अपर मिडिल क्लास ज्यादा सफर करता है और इस क्लास को सबसे अधिक शिक्षित और एडवांस माना जाता है। उसके बावजूद भी सरकारी संपत्ति के प्रति इनका व्यवहार चिंतनीय है। ऐसी शिक्षा का क्या महत्व जब आपको मूलभूत सेवाओं का इस्तेमाल तक करना ही नहीं आता हो। ऐसी अमीरी का क्या जब आपको इतना भी नहीं पता कि शौचालय जाने के बाद फ्लैश चलाना होता है, जबकि यह काम आप और हम अपने घरों में हर रोज एक-दो टाइम करते ही हैं।

 इतना ही नहीं बल्कि लोग तो खाना खाकर या चाय कॉफी पी कर, नमकीन कुरकुरे खा कर, कोल्ड ड्रिंक पी कर कूड़े को सीट के नीचे या साइड में डाल देते हैं, जबकि रेलवे के हर बोगी के बाहर गेट पर डस्टबिन लगा रहता है। यह एक साधारण सी समझ है कि कूड़े को डस्टबिन में डालना है। मगर हम भारतीय जब भी सरकारी चीजों का इस्तेमाल करते हैं, इतने गंदे तरीके का व्यवहार करते हैं कि मानो उस सेवा का दोबारा हमें इस्तेमाल ही नहीं करना हो। आखिर हम भारतीयों में सरकारी संपत्ति के प्रति प्रेम और अच्छे व्यवहार की जागरूकता कब आएगी ?





भारतीय रेलवे को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ट्रेनों के अंदर अच्छी क्वालिटी का खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके और ट्रेनों में काम करने वाले स्टाफ का व्यवहार थोड़ी नरम व अपने काम के प्रति ईमानदार हो। जिन कंपनियों को रेलवे ठेके पर सफाई या अन्य चीजों की जिम्मेदारी देता है, उन कंपनियों के व्यवहार पर भी रेलवे को पैनी नज़र रखनी चाहिए। इतना ही नहीं बल्कि अगर संभव हो सके तो यात्रियों से कंपनी की सेवा (जिम्मेदार) के प्रति फीडबैक भी लिया जाना चाहिए। इससे रेलवे की सुविधाएं और बेहतर होंगी।

अंत में इतना ही कहना चाहूंगा कि शिक्षा का मतलब सिर्फ नौकरी प्राप्त करना नहीं होता है, बल्कि आपके व्यवहार और बोली में शिक्षा की कुशलता झलकनी चाहिए। देशभक्ति और देश प्रेम सिर्फ सेना में जाना नहीं होता बल्कि देश की संपत्ति के प्रति प्रेम और आदर का भाव भी देश प्रेम की श्रेणी में आता है। आपकी गली में लगा सरकारी स्ट्रीट लाइट हो या रेलवे और परिवहन बस सेवाएं आदि सभी सरकारी सेवाओं व संपत्ति का बतौर नागरिक हमें सुरक्षा और देखभाल करनी होगी, तभी एक बेहतर राष्ट्र का निर्माण हो पाएगा। हां! हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सरकारी संपत्तियों व सेवाओं में हम सभी नागरिकों के टैक्स का ही पैसा लगता है।



                                                                - दीपक कोहली





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