साहित्य चक्र

15 August 2023

देश भक्ति




हिंद के नौजवानों उठो शान से,
अपनी हस्ती मिटा दो वतन के वास्ते…

देशप्रेम का दावा है तुमको अगर,
ख़ून देना पड़ेगा चमन के वास्ते,
ना मुड़कर कभी देखना पीछे,
बस बढ़ते ही जाना वतन के वास्ते।

जहाँ अर्जुन, भगतसिंह जैसे वीर पैदा हुए,
वहाँ मरना है तुम्हें नाम के वास्ते,
न गँवाओ यूँ व्यर्थ बैठ इस सुनहरे पल को,
मौक़ा मिला है कुछ कर चलो तुम वतन के वास्ते।

उठो जवान, बढ़ाओ क़दम, थाम लो कमान,
दिखा दो दुनिया को अपनी शान,
झंडा हमारा रहेगा ऊँचा सदा,
जो रहेंगें साथ-साथ हम वतन के वास्ते।

दुश्मनों तुम न आगे बढ़ाना क़दम,
यह तिरंगा ज़माने में लहरायेगा हरदम,
हमको परवाह नहीं अपने तन-मन की,
मिटा दें अपनी हस्ती हम वतन के वास्ते।

हिंद के नौजवानों उठो शान से,
अपनी हस्ती मिटा दो वतन के वास्ते।


                                            - नूतन गर्ग


सैनिक भाइयों और माँओं समर्पित



जहाँ पर्वत के जैसे है सैनिक खड़े,
उस धरा पर कभी आँच आए नहीं।
राष्ट्र जिसके लिए है सर्वोपरि,
उस जहाँ पर कभी आंच आए नहीं।

आँधी तूफान हो या प्रकृति का कहर,
सबसे पहले पहुंचते मेरे कर्मवीर,
मौत के मुंह में जाकर हरे प्राण जो
ऐसे कर्मठ निडर मेरे शूरवीर।
ए मेरे वीर करें तुझको नमन,
तुझसे ही सुरक्षित हमारा वतन।

कितने माँओं ने तज दिए अपने लाल
ताकि चमके हमारे देश का भाल।
प्राण करते जो अर्पित वतन के लिए,
उन सपूतों की मां को करें हम सलाम।

आँखे नम है मगर शीश गर्वित लिए,
कर देती है निज पूत को अंतिम विदा,
हे माता तू धन्य है जो इस वतन के लिए
कर देती है सर्वस्व अर्पण सदा।

जहाँ माओं ने जन्में हों ऐसे लला,
उस वतन पे कभी भी ना आये बला।
ऐ वतन तेरी खातिर समर्पित सदा
मेरी सांसे और धड़कन जो मुझको मिला।


                                    - सविता सिंह मीरा

बलिदान




मात्रभूमि ये वीरों की है, वीरों का बलिदान है,
रक्षा करते सदा वतन की, तिरंगा उनकी शान है।

देश के खातिर मरनेवाले, अमर शहीद कहाते हैं,
भारत मां के लाल यहां हँसकर शहीद हो जाते हैं।

जिन वीरों ने प्राण गंवाए देश में उनका नाम है,
धूल चटादेते दुश्मन को ये वीरों का काम है।

घर परिवार कभी न देखा न देखे बीबी बच्चे,
तान के सीना सूली चढ़गये देश भक्त थे वे सच्चे।

अंग्रेजों से जूझ गये जो करगये काम तमाम थे,
सुखदेव आजाद भगतसिंह राजगुरु वो नाम थे।

आज भी रहतीं दिलों मे जिंदा उनकीं अमर कहानी हैं,
बच्चों से लेकर बूढों को रहती याद जुवानी हैं।

कटे थे सिर जिनके सरहद पर बहा हिंद का खून था,
देश भक्ति का जज्बा था और मन मे भरा जुनून था।

सूने हैं वो आँगन जिनमें जन्मे ऐसे लाल थे,
मात पिता और भाई बहिन बीबी बच्चे बेहाल थे।

आतंकी उन गद्दारों को दफनादो कबरिस्तान में,
मिलजुलकर सब दीप जलायें वीरों के सम्मान में।

हिंदू मुस्लिम सिख्ख ईसाई दंगे क्यों भड़काते हो,
शर्म नहीं आती तुमको क्यों आपस में लड़वाते हो।

हर भारतवासी के दिल में शेरों सी दिलजान है,
शुअरों के सौ झुंड भगा दें इक इक वीर महान है।

मात्र भूमि ये वीरों की है वीरों का बलिदान है ,
रक्षा करते सदा वतन की तिरंगा उनकी शान है।


                                               - राणा भूपेंद्र सिंह




14 August 2023

तिरंगा



महोत्सव है आज़ादी का,
मन हुआ रंग-बिरंगा,
आओ फहरायें हम मिलकर,
अपने देश का तिरंगा।

माह अगस्त महीना था,
देश हुआ आज़ाद,
शहादत देशभक्तों की,
रखनी है हमें याद,
देख साहस वीरों का,
भागा हर फ़िरंगा,
आओ फहरायें हम मिलकर,
महान देश का तिरंगा।

राष्ट्र एकता की अलख जगी,
जिस पर हमको गर्व है,
संकल्प लें भाईचारे का,
आज़ादी का पर्व है,
तभी बहेगी मन में हमारे,
सदा प्रेम की गंगा,
आओ फहरायें हम मिलकर,
प्यारे देश का तिरंगा।

शांति और अमन की अब,
करते हैं सभी कामना,
देश सेवा का भाव हो,
बस यही है शुभकामना,
अब ना हो कभी भी,
जाति-धर्म का दंगा,
आओ फहरायें हम मिलकर,
भारत देश का तिरंगा।

- आनन्द कुमार


आजादी का महापर्व



अपनी आजादी के महापर्व को
मिलजुल साथ मनाए

तमाम ज़माने की खुशियों को
मिलकर साथ जुटाए

हो संकल्पित न भूखा न
कोई नंगा अब रहेगा

असल में आज़ादी का
अमृत महोत्सव बनेगा

मान मर्यादा और प्यार
मोहब्बत है पहचान हमारी

कुछ सियासती निकम्मों ने
छीनी हमसे शान हमारी

चलो सियासत का निबाला
होने से सबको बचा ले

प्रेम सौहार्द वाला तिरंगा
हर घर पे फहरा दें

आओ प्रेम सौहार्द....


- नरेन्द्र सोनकर


आजादी



आजादी के पचहत्तर साल
तेरा पंचवर्सिय योजनाएं हुए

विकास को ढूंढते मिलकर नेता
नेताओ के घर महल हुए

गरीबों से वसूला ब्याज यहां
सांसदों के हर कर्ज माफ हुए

नेताओ को एम्स,ट्रेन,प्लेन में सीट
खानाबदोशो को जमीन न नसीब हुए

अमीर महा अमीर हुए
गरीब और गरीब तो
कुछ मिडिल क्लास हुए

परोसा गया जात पात यहां
दंगों में जनता शहीद हुए

लोकतंत्र का परचम लेकर
चुनावो के नाम मशहूर हुए

आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में
असल मुद्दे कोशो दूर हुए

विकास विकास चिल्लाते नेता
विकास को ही बेरोजगार किए।


                                                   - धीरज 'प्रीतो'


आज़ादी




आज आजादी का महोत्सव है आया।
सलाम है उन शूरवीरों को
जिन्होंने देश के लिए सब कुछ है लौटाया।
भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव,
सुभाष ये सब है देश की शान।
इन्होंने देश के लिए
हंसते-हंसते दी अपनी जान।
गरीबी-अमीरी की नहीं थी
कोई दीवार।
सब ने मिलकर दुश्मनों
पर किया प्रहार।
आज हम जिस आजादी को मना रहे हैं
उसे किसी ने अपने खून से है सींचा।
हमारा भी ये है कर्तव्य कि
देश का नाम रखें ऊंचा।

                                                     - विनोद वर्मा


सोने की चिड़िया




कैसे कह दूँ डाल डाल पर सोने की चिड़िया गाती है ?
कदम कदम हो रही लहूलुहान भारत की छाती है।।

बदरंग हो रही तस्वीर है, उतरा उतरा हर चेहरा है,
सिर्फ कौवों की काँव काँव है कोयल कहाँ गाती है ?

बंजर जमीं हो रही सफ़र में जलती रेत है,
प्यास कंठ में चटकती भूख बावली हो बिललाती है।

सत्ता के सिर पर बैठकर कर रहे कैसी रहनुमाई है,
सच पर गला बैठ जाता है पर झूठ पर गाल बजाती है।

सिर्फ बातों में अंतिम व्यक्ति की ही चर्चा है,
सारे मालपुए पहली ही सफ़ में बंट जाती है।

रहनुमाई का गुरूर सातवें आसमान पर चढ़ बैठा है,
पहले नजर नहीं आती गर नजर आये तो गुर्राती है।

थामकर जिनको बैठाया वही थाली खींच रहे,
अब तो उनको देख भूख भी थर्राती है।

बेबस वैद है बरबस हाथ मीज रहा विकास ,
दवा वही दे रहा जो मरीज को भाती है।

                                                        - राधेश विकास


स्वतंत्रता दिवस पर सुंदर ग़ज़ल



संकट-ग्रस्त को उबार देगा
अन्यायियों को सुधार देगा

पड़ी जरूरत अगर देश को
हर एक हाथ में कुठार देगा

स्वर बुलंद कर इंकलाब का
ललकार देगा ; पुकार देगा

ऑंख दिखाने वालों का तो
धड़ से गरदन उतार देगा

राष्ट्र- विरोधी हरेक ताकतों को
उन्ही के भाषा में दुत्कार देगा

समझा शोषकों को उनकी भाषा
दलित-शोषितों को उभार देगा

गिरा के नफरत की दीवारें सारी
चमन ए वतन को निखार देगा

माॅं भारती के रक्षार्थ 'सोनकरन'
लहू का एक एक बूंद निसार देगा


                                      - नरेन्द्र सोनकर 'कुमार सोनकरन'


हमारा तिरंगा




देश कि आन बान शान है तिरंगा
आसमान में शान से लहराता है तिरंगा 

तीन रंगों से बना है ये तिरंगा 
हिन्दुस्तान की पहचान है ये तिरंगा 

तीनों रंगों की महत्व बतलाता है ये तिरंगा 
देश की समृदि को बतलाता है ये तिरंगा 

केसरिया रंग से बल, शक्ति भरता है 
सफेद रंग सच्चाई को इंगित करता है 

हरा रंग देश की हरियाली दिखाता है 
तिरंगा शान से आसमान में लहराता है 

तिरंगा मे नीली रंग की पहिया दिखता है 
ये दुनिया को एक नया संदेश देता है 

हमेशा गतिमान रहे हमारा ये देश 
विश्व गुरु बनाना है हमारा ये देश

तिरंगा को संभाल रखे ये देश वासी 
दिल मे मिलेगा एक अलग ही खुशी 

तिरंगा हमारे देश की शान है 
यही से हमारे हिन्दुस्तान की पहचान है 

आओ हमसब तिरंगा को करे सलाम 
चुन्नु कवि करते हैं सबो को आह्वान 

देश की आन बान शान है तिरंगा 
आसमान में शान से लहराता है तिरंगा 


                                                - चुन्नू साहा 


मेरी जान हिन्दुस्तान



हैं मेरी जान हिन्दुस्तान
हैं मेरा अभिमान हिन्दुस्तान।

मेरा वतन हैं सबसे महान
भारत देश हैं अपनी पहचान।

मेरे देश में सुख शांति हैं
अमन चैन की आजादी हैं।

देश की खातिर खुद को मिटा देते हैं
हम सच्चे देशभक्त हैं जान की बाज़ी लगाते हैं।

देश में हरियाली खिलती रहे
वृक्षों की ठंडी छांव मिलती रहे।

संस्कार हमारी संस्कृति बनी रहे
मिट्टी की खुशबू दिल में बसी रहे।

मेरा देश मेरी जान हैं
हिन्दुस्तान वीरों की शान हैं।

तिरंगा प्यारा आसमान में लहराता रहे
हिन्दुस्तान की गौरव गाथा सुनाता रहे।


                                     - क्रांति देवी आर्य


शीर्षक- फांसी का दिन




फांसी के दिन मां राम प्रसाद बिस्मिल को मिलने जेल जाती है तो जेलर राम को मां से मिलाने को बाहर लाता है। राम के पीछे से दोनों हाथों में लोहे की जंजीर और हथकड़ी बंधी होती है। राम सीना फुलाए बड़े फख्र से मां के पैरों में अपना शीश झुकाते है और मां उसको उठाती है और गले लग जाती है अपने लाल से कहती है कि तुमने मेरी कोख को धन्य कर दिया मेरे राम...

और मां के आखों में आंसू छलक आते है मां तुरंत आंसू पोंछ लेती है तो राम प्रसाद बिस्मिल मां को बोलते है मां तुम्हारे आखों में ये आंसू क्यों है ?

तो मां कहती है बेटा मैं नहीं रो रही हूं ये आंसू तो इसलिए नहीं है कि तुझे फांसी हो रही है ये आंसू तो इसलिए है कि मुझे आज अपने दूध पे गर्व हो रहा है ये आंसू तो इस लिए है राम जब आज फांसी हो जाएगी तो इस देश की सैकड़ों माएं भी अपने अपने पुत्रों को इस देश पर न्योछावर करने को भेजेंगी...

और मुझे आज इस बात का पछतावा है कि मेरे पास न्योछावर करने के लिए कोई और दूसरा पुत्र नहीं है मेरे लाल और मां फफक फफक कर रो पड़ती है और राम की भी आंखों में भी आंसू आ जाते है...

इतने में उनका मिलने का टाइम खत्म हो जाता है और सिपाही राम प्रसाद बिस्मिल को लेके जाने लगते है जैसे जैसे राम दरवाजे के पास पंहुच जाते है तो मां जोर से चीख पड़ी मेरे बेटे राम.... और मां आखों में गर्व के आंसू लिए वापस घर लौटने के लिए रास्ते लग जाती है....

राम प्रसाद बिस्मिल को हिंदुस्तान का बच्चा बच्चा जनता है उनको अंग्रेजों द्वारा फांसी पर लटका दिया था उनकी उम्र बहुत छोटी थी.... अपने देश पर शहीद होकर उनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया और वह युगों युगों तक अमर हो गए।


राम प्रसाद बिस्मिल अमर रहे, धन्य है वो मां जिन्होंने ऐसे लाल को जन्म दिया।

जय हिन्द...

                                               - सुमन डोभाल काला



वीर सुभाषचंद्र बोस




देश पर मर मिटने वाले,
कितने ऐसे होते मतवाले।
मातृभूमि पर सर्वस्व न्यौछावर,
भोले पर जैसे चढ़ते कांवर।

ऐसे ही कितने स्वतंत्रता सेनानी,
भारत के देशभक्त बलिदानी।
वीर सुभाषचंद्र बोस उनमें एक,
राष्ट्रसेवा के लिए विचार थे नेक।

नरम नहीं अपितु गरम दल के नेता,
क्रांतिकारी विचारों के अमर प्रणेता।
रक्त- अर्घ्य देने को सत्वर,
राष्ट्रसेवा के सदैव तत्पर।

उनके सत्कर्मों का कर स्मरण,
अनुशीलन करें जहाँ पड़े चरण।
वीरोचित मार्ग का अनुसरण कर,
जाने कैसा होता अमर मरण।

- डॉ० उपासना पाण्डेय


ये मेरा संविधान है




ये शान है, ये वतन का सम्मान है
और यही मेरा अभिमान है
ये मेरा संविधान है।

ये क्षमता है, ये बंधुता है
और यही एकता है
ये हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई
सभी धर्मो को समेटता है
यही एकता की पहचान है
ये मेरा संविधान है।

कर्तव्य है, अधिकार है
ये हर धर्म, हर संस्कृति का अभिमान है
और यही अखंडता और निरपेक्षता का मान है
ये मेरा संविधान है।

ये आजा़दी का गहना है,
ये न्याय का चेहरा है
ये पूरे भारतवर्ष का अभिमान है
और इसी से वतन महान है
ये मेरा संविधान है।

                                          - डॉ.सारिका ठाकुर “जागृति”


देशभक्ति गीत





सोन चिरैया जिसको कहते ,ऐसा प्यारा देश हमारा।
एक तिरंगा शान जहाँ की, सबसे न्यारा देश हमारा।

नृ्त्य देखकर मोह रहा मन, हँसी मोर की शान निराली।
कमल खिला कीचड़ में फिर भी, पुष्प राष्ट्रीय शोभा लाली।
वृक्ष राष्ट्रीय वट बतलाता, धैर्य शक्ति सम जीवन सारा।
सोन चिरैया जिसको कहते, ऐसा प्यारा देश हमारा।

सकल विश्व में भारत अपना, विश्व गुरू बन जाना जाता।
शून्य खोज कर सृजन शक्ति में, प्रथम राष्ट्र यह माना जाता।
ओम् शक्ति है मूल सृष्टि की, सत्य सनातन पर जग वारा।
सोन चिरैया जिसको कहते, ऐसा प्यारा देश हमारा।।

तीन रंग से रंगा झंडा, शाश्वत मौलिक सत्य बताता।
केसरिया जोगी का चोला, श्वेत रंग यह अति सुख लाता ।
हरा रंग वृक्षों की शोभा, धरती माँ शुभ कर की दाता।
हिल मिल कर तीनों रंग सुंदर, सतत रहे रंग मधु हिय प्यारा ।
सोन चिरैया जिसको कहते , ऐसा प्यारा देश हमारा।।


                                  - डॉ. मधु शंखधर '"स्वतंत्र"


तिरंगा





मेरे देश की जान तिरंगा ,
मेरे देश की आन तिरंगा।

मेरे देश की शान तिरंगा ,
व मेरे देश का अभिमान तिरंगा।

प्रेम ,त्याग ,शांति ,पवित्रता व
खुशहाली का संदेश देता।

नीला चक्र मेरे देश के,
विकास को दर्शाता।
मेरे देश की आन तिरंगा।

मेरे देश की शान तिरंगा,
मेरे देश की जान तिरंगा।
मेरे देश का अभिमान तिरंगा।

एक देश, एक तिरंगा,
विभिन्नताओं में,
समानता का संदेश देता।

दुश्मन के आगे न,
झुकना कभी,
आज स्वतंत्रता दिवस के,
अवसर पर,
आसमान मे लहरा-लहरा ये, 
पैगाम देता।

मेरे देश की आन तिरंगा,
मेरे देश की शान तिरंगा।
मेरे देश की जान तिरंगा,
मेरे देश का अभिमान तिरंगा...

- विजय कुमारी सहगल 

हम तिरंगे पर अभिमान कर लें....




चलो फिर से वह बीता अविस्मरणीय नज़ारा याद कर लें।
शहीदों के दिल में जली आज़ादी की ज्वाला याद कर लें।

क़ुर्बानी वतन परस्ती के लिए उस जज़्बे को श्रद्धा नमन
परचम लहराया स्वतंत्रता का उस साहस की बात कर लें।

फिर हौंसला रगों में अपने वतन के लिए आबाद कर लें।
भेद-भाव सब मिटा, एकता को हम अपनी पहचान कर लें।

हम विश्व मंच पर भारत का नाम बुलंद कर शान बढ़ाये
आओ तिरंगा फहराकर नव हौसलों का आग़ाज़ कर लें।

जो संविधान बना गणतंत्र देश का उसका मान कर लें।
अपने देश की उपलब्धियों पर फिर से गुमान कर लें।

ऐतिहासिक दिन है निष्ठा कर्तव्य निर्वाह का वादा लिए
अपने वतन पर गौरान्वित हम तिरंगे पर अभिमान कर लें।

जय हिंद

- डॉ. प्रतिभा गर्ग



दास्तां आजादी की



वैर विरोध, वैमनस्यता के कारण
दो सौ साल से परतंत्र था भारत
सहन किया अंग्रेजों का शोषण
हर भारतवासी का दिल था आहत

मनमानी करते थे हर शासक
चारों ओर अराजकता थी व्याप्त
अंग्रेजों ने तब जाल बिछाया
देख आपसी रंजिश पर्याप्त

हिंदू-मुस्लिम का कराया भेद
सोने की चिड़िया था तब देश
सोने चांदी के भंडार देख
आये लुटेरे बदल कर भेष

जकड़ लिया भारत मां को दरिंदों ने
गुलामी की जंजीरों में
न जाने कहां से आ गई दासता
मजबूत हाथों की लकीरों में

भूल कर सब व्यापक अंतर्द्वंद
हर भारतवासी ने किया संघर्ष
कूदे रणभूमि में रणबांकुरे
हर चुनौती को स्वीकारा सहर्ष

माताओं ने अपने लाल अर्पण किए
बहनों ने दिए अपने प्रिय भाई
वीरांगनाओं ने अपने वीर दिए
तब 15 अगस्त को आजादी पाई

अखंडता भारत की रहेगी सदा
न इसे खंडित कोई कर पाएगा
बहादुरी, बलिदान की अद्भुत मिसाल
यह तिरंगा अविच्छिन्न लहराएगा

- वसुंधरा धर्माणी


भारत माँ के लाल





भारत मां के लाल हैं,
वतन से हमें प्यार है।

शहादत नही किसी से,
वतन पर हम कुर्बान है।

आजाद हुआ अब भारत
हिन्दुस्तान हमारी जान है।

अंग्रेजों को मार भगया है,
स्वतन्त्रता हुआ भारत है।

वीरों ने प्राण गंवा दिए,
उन मांओं को प्रणाम है।

आज जश्न आजादी का
राष्ट्रीय स्तर पर मनातें हैं।

जगह जगह शहीदों को,
सबके द्वारा नमन किया जाता है।

भारत है सोने की चिड़िया,
देश विदेश में नाम लिया जाता है।

देश की खातिर जो झूले फांसी पर,
आज इतिहास में नाम लिया जाता है।

चन्द्रशेखर आजाद हो गये है,
गोली खाकर शहीद हो गए।

जब आयी हिन्दुस्तान पर विपत्ति,
जाने कितने वीर तैयार हो गए।


                                               - रामदेवी करौठिया


आज़ादी जानों की कीमत




लाखों ने जानें देकर,
आज़ादी को हासिल किया।
फिर आज़ाद भारत को,
अपने ही राज्यों ने शरमिन्दा किया।

कभी जला पंजाब,
सालों से कश्मीर सुलगता रहा।
मणिपुर-हरियाणा भी अपनों से लड़ता रहा।

लाखों ने जानें देकर,
आज़ादी को हासिल किया।

क्यों.... आज़ादी की कीमत को,
आज़ादी पाने वाले जान नहीं पायें।
जिस लिए देश को काटा।
उसी बात पर अब भी बंटते आयें।

लाखों ने जानें देकर,
आज़ादी को हासिल किया।
फिर आज़ाद भारत को,
अपने ही राज्यों ने शरमिन्दा किया।

अपनों से लड़ -लड़ तिरंगे को लाल करते आये।
भारत मां को अपने ही सपूत शर्मसार करते आये।

मत लड़ो आपस में पहचानों आज़ादी की कीमत।
घाती दुश्मन को फिर ना देनी पड़े जानों की कीमत।

आपसी मतभेदों से देश का कोना -कोना मत सुलगाओ।
'सोने की चिडिय़ा' भारत को विश्व में स्वर्णित तुम कर जाओ।।


                                - प्रीति शर्मा 'असीम'



10 August 2023

जयदीप पत्रिकाः जुलाई माह का अंक- 2023

आप सभी के लिए जुलाई माह का अंक पीडीएफ के रूप में उपलब्ध हैं।




हम आशा करते है कि आपको यह अंक पढ़कर अच्छा लगा होगा। जयदीप पत्रिका का यह अंक पढ़ने के लिए धन्यवाद।






रुकना न कभी



तू रूकना न कभी, डरना न कभी
झुकना न कभी इन परिस्थितियों के आगे।
ये आएंगी तुम्हे डराने के लिए,
राह से भटकाने के लिए ,
पर तुम भटकना नहीं।
ये आएंगी तुम्हारे जमीर को मिटाने के लिए,
पर तुम बहकना नहीं,
तुम्हे ललकारने के लिए,
पर तुम जोश मे होश खोना नहीं।
ये आएंगी बिन चिता के जलाने के लिए,
पर तुम जलना नहीं।
कौन ...?
"रुकावटे"
पर तुम रुकना नहीं,
बन फौलाद खड़े हो जाना ,
परिस्थितयो के आगे।
खुद ही को ढाल बना के,
सर्वस्व यहां बिछा के।
प्रकृति परीक्षा लेती है,
हर पौरुष, हर बल की
तू धीरज का ध्वज लेकर,
शौर्य पराक्रम दिखा दे।
तू रुकना न कभी, डरना न कभी ,
झुकना न कभी, इन परिस्थितयो के आगे।
लोभ, क्षोभ, क्षमा, याचना
सब कुछ तुमको घेरेबंदी,
लगा पाबंदी समय की सीमा
तुमको बंदी कर लेंगी।
रख साहस ,हौसला प्रचण्ड
आगे को बढ़ते रहना।
सफलता एक दिन चूमेगी कदम,
भले गिरो पर उठते रहना।
तू रुकना न कभी, डरना न कभी
झुकना न कभी इन परिस्थितयो के आगे।
मेहनत की दहाड़ लगा देना,
घुटनो को सहला लेना।
है जीवन तो सुख-दुख दोनो है,
तुम तालमेल बिठा लेना।
तू रुकना न कभी,डरना न कभी
झुकना न कभी इन परिस्थितयो के आगे।


- विभा श्रीवास्तव "विभांजली"