साहित्य चक्र

08 February 2023

व्यंग्यः चुगली रस

वर्तमान युग की भागम भाग और संघर्षों से भरी ज़िन्दगी में जहां लोगों के पास अपनों की तो छोड़िए,अपने लिए ही समय नहीं है।फुरसत के चंद लम्हें क्या होते हैं,इसको परिभाषित करना आज शायद ही किसी को आता हो।आज हर कोई दूसरे से आगे बढ़ना चाहता है, कम समय में अधिक पाना चाहता है और जीवन में एक नया मुकाम हासिल करना चाहता है ।तो ज़ाहिर सी बात है इस सब के लिए व्यक्ति को अपने दिन रात एक करके मेहनत भी करनी पड़ती है।





इतनी व्यस्तताओं के बावजूद भी एक काम के लिए अधिकतर लोगों के पास भरपूर समय निकल आता है या यूं कहें कि वे उस पावन कार्य को अंजाम देने के लिए कैसे न कैसे वक्त निकाल ही लेते हैं।

वो पावन पुनीत कार्य कुछ और नहीं अपितु चुगली करना ही है।रस से भरपूर इस काम को लोग बड़े ही चाव से आगे बढ़ बढ़ कर करते हैं।यहां तक कि जिनका इस महान कार्य से दूर दराज तक कुछ लेना देना नहीं होता,वे भी बड़ी शिद्दत और लगन के साथ इस कार्य में दूसरों का पूर्ण सहयोग करते हैं और मदद कर मिलने वाले पुण्य के भागीदार बनने का परम सुख भोगते हैं।

बात घर की हो,बाहर की हो या ऑफिस की..चुगली करने वाले कर्मठ कार्यकर्ता आपको हर जगह बिना ढूंढे ही मिल जाएंगे।आपको उन्हें ढूंढने में जरा भी मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी।गली मोहल्ले में सास बहू की और उसके मायके वालों की, पार्क में बहू सास ननदों की और जेठानी देवरानियों की चुगली करते नहीं थकती।यही नहीं,साथ ही घंटों चुगलियां और बुराइयां करने के बाद उनका ये डायलॉग कि..अपनी तो आदत ही नहीं कभी किसी के बारे में कुछ इधर उधर का बोलने की...चुगली प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा जान पड़ता है क्योंकि तड़का तो ऐसे डायलॉग ही लगाते हैं न बातों में...अरे नही नहीं, माफ़ कीजियेगा ..चुगलियों में।

ऑफिस में सहकर्मियों की चुगली करना प्रत्येक सत्यनिष्ठ और कर्त्तव्यनिष्ठ कर्मचारी का जन्मसिद्ध अधिकार है,मानों अपॉइंटमेंट लेटर में यह भी लिखा हो कि जॉब मिलने के बाद यदि चुगली कार्यों से उदासीनता दिखाई तो इंक्रीमेंट नहीं मिलेगी या फिर मिलने वाले बोनस में कटौती की जाएगी।कौन सा कर्मचारी कितने बजे ऑफिस आया कितने बजे बाहर गया,किसका किससे चक्कर चल रहा है,कौन बॉस के पीठ पीछे उसे खडूस बोलता है,कौन प्रमोशन पाने के लिए चमचागिरी करता है ..इन सबकी जानकारी देने वाले महानुभाव चुगलखोरी में मास्टर्स की डिग्री लेकर ही ऑफिस ज्वाइन करते हैं।

राजनीति को ही देख लीजिए...नेताओं के चमचे, कडच्छे सब चुगली रस का भरपूर आनंद उठाते हैं।सफलता की सीढ़ी पर शीघ्रता से चढ़ने की लालसा लिए ये चमचे चुगली करने में भी राजनीति करते हैं।आज जिस पार्टी में हैं उनके सामने विपक्ष को ऐसे शब्दों में पेश करेंगे जैसे उनसे बड़ा पार्टी का शुभचिंतक दूसरा कोई नहीं।पार्टी बदलते ही उनकी चुगली का स्टाइल और शिकार दोनों बदल जाते हैं।उनके राजनैतिक जीवन में ऐसे असंख्य मौके आते हैं जब वे चुगलियों के माध्यम से अपने आला नेताओं की आंख का तारा बनना चाहते हैं और कामयाबी भी हासिल कर जाते हैं।

कहने का तात्पर्य यह है कि आज के समय में ऐसा कोई महकमा,कोई संस्थान,कोई क्षेत्र शेष नहीं जो चुगलियों और चुगलखोरों से खुद को बचा हुआ पाता हो।क्या वाकई में चुगली करने में इतना रस मिलता है।


                                                    - पिंकी सिंघल


कविताः हसीन चेहरा



वो चेहरों में एक हसीन चेहरे को  तरासती रही,
चेहरे तो बहुत देखें पर आपसा  दिल नही दिखा।

अपने आशियाने में तुम्हें बसा कर रख लिया,
बेफिक्र होकर जीने का मकसद बना लिया।

कल भी मोहब्बत हमारी तुमसे थी आज भी‌ रही,
थोड़ी सी दूरियां हो गई पर एहसास आज भी।

आंखों को बंद कर सपनों में बातें किया करते,
हालचाल सब पूछ लेते हैं पर बस देखते नहीं।

मरजिया हमारी चलतीं रहीं तुम मुस्कुराते रहें,
गोदी में सिर रखकर हम तुम्हें गीत सुनाते रहे।

बड़ी कशिश वो तुम्हारी आंखों में हम निहारते रहे,
फलक जमी पर नही टिकते जैसे बाहों में आ गये।

गुस्ताखियां हमसे हो जाती तो माफ जल्दी कर देते,
बहुत सी अदा थी तुममें वो आज तक नहीं दिखी।


                                        - रामदेवी करौठिया 


स्मृति लेखः वे दिन भी क्या थे


मुझे आज भी वे दिन याद हैं जब गर्मी की छुट्टियों में मुंबई से मेरे बड़े ताऊ जी - ताई जी, पापा, भैया - भाभी महानगरी ट्रेन से गाँव आते थे। घर के सभी लोग बहुत ख़ुश होते थे। कि मई माह तक सभी लोग साथ में रहेंगे। 1990 तक मेरे घर का पिछला हिस्सा मिट्टी और खपरैल से, आगे का ओसारा ईंट-सीमेंट से बना हुआ सुंदर लग रहा था। 




उत्तर मुखी घर का दिशा होने के कारण घर की बायीं तरफ़ एक नीम का पेड़ था। नीम के पेड़ के नीचे छोटा चबूतरा था जिस पर सुबह-शाम लोग बैठकर चाय पीते थे। पास में ही बहुत सुंदर पक्का बैठिका, उससे लगा हुआ आम का बग़ीचा जो बैठिका के पीछे तक फैला हुआ था। 

घर और बैठिका के सामने ख़ूब बड़ा-सा द्वार, घर के दाहिने ठंडी के मौसम में गाय, भैंस, बैल को रहने के लिए मिट्टी, लकड़ी, खपरैल से बना हुआ घर था। ठीक उसी के सामने बड़ी-सी चरनी थी जिसमें बड़े-बड़े हौदे थे। 

द्वार के बीचों - बीच विशाल पीपल का पेड़, उस पेड़ के नीचे गोलाकार में बड़ा-सा चबूतरा, और उस पर सुंदर शिव मंदिर है। इस मंदिर की पूजा मेरे दादाजी से लेकर आज तक घर के सभी सदस्य करते हैं। पीपल के चबूतरे की दस क़दम दूरी पर पुराना कुआँ था, जो १९९१ के आसपास सूख गया था, मेरे दूसरे नंबर के ताऊ जी ने सभी भाइयों एवं भतीजे के सहयोग से उस कुएँ का पुनर्निर्माण करवाया था। उस समय हम सभी लोगों ने पानी के महत्त्व को भली-भाँति जाना। 


बात तो मैं कर रही थी गर्मी की छुट्टियों की, यह मन भी कहाँ-कहाँ चला जाता है। दोपहर के समय हम सभी आम के बग़ीचे में जाते थे, पेड़ों के नीचे ख़ूब खेलते थे। मुझे आज भी वे खेल याद हैं जैसे; कबड्डी, सिल्लो पत्ती, चिब्भी, कौड़िया बुझावल जिसकी पंक्ति आज भी मुझे याद है—सुमन पारी धीरे से आना शोर न मचाना, पीछे मुड़के ताली बजाना; यह खेल मुझे बहुत पसंद था। 

उसी आम के बग़ीचे में बड़े-बड़े पलंग बिछे रहते थे, तो कुछ पलंग पीपल के पेड़ के नीचे। सब अपने उम्र वालों के साथ हँसी ठहाका लगाते थे, लू चलती थी, फिर भी हमें कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ता था। जहाँ धूप आती थी, वहाँ से चारपाई खिसका कर छाँव में कर लेते थे। 

जब किसी को प्यास लगती थी तो घर का कोई बड़ा व्यक्ति कुएँ से पीतल के गगरा में पानी निकाल लाता था, तो घर की बेटी बड़ी माई से मूँज की बनी डलिया में गुड़ माँग लाती थी। 

सबकी खाने की रुचि अलग-अलग थी, कोई कच्चा आम नमक के साथ, तो कोई सत्तू, कोई लाई चना खाता, तो कोई आम भूनकर पन्ना बना लाता, तो कोई बेल शरबत क्या! सब में प्यार था। 

धीरे - धीरे छुट्टियाँ समाप्त होने लगतीं थी, तो परदेसियों के बैग को घर की महिलाएँ भरना शुरू कर देती थीं जैसे; आम, कटहल का अचार, अरहर की दाल, अलसी का लड्डू, भुना चना, सत्तू आदि। एक महीना हँसी-ख़ुशी कैसे बीत जाता था समय का पता ही नहीं चलता था। मुंबई में 13 जून से स्कूल खुल जाते हैं।

आज भी! मुझे वे दिन याद हैं। जब मेरे पापा, ताई-ताऊजी, भैया-भाभी मुंबई जाते थे तो घर के सदस्यों में से बहुएँ, मँझली अम्मा, मम्मी को छोड़कर सभी लोग सड़क तक बैग, अटैची, बॉक्स लेकर जाते थे और बस का इंतज़ार करते थे, कितना प्रेम था! बीस मिनट आधे घंटे बाद रोडवेज़ बस भी आ जाती थी,  तो इतने में पापा , बड़े पापा, भाभी - भैया अपने से बड़ों का चरण स्पर्श करते थें तो हम सभी छोटे बच्चे भी उनका चरण स्पर्श करते थे | हम लोगों को चॉकलेट खाने का पैसा  मिलता था। 

हमारे घर से डेढ़ घंटे का सफ़र था, इसलिए मेरे घर के लोग बनारस ही उतरते थे और बनारस से ही मुंबई के लिए ट्रेन पकड़ते थे। परदेसियों का जाने से एक ओर मन दुखी रहता था तो दूसरी ओर हम भाई-बहन एक दूसरे से पूछते थे- तुमको पापा ने कितना पैसा दिया, हमको ताई जी ने इतना दिया। हम लोग हाथ में पैसे लिए सीधे गाँव की छोटी दुकान पर चले जाते थे। हम सब भाई-बहन अपनी पसंद का चॉकलेट लेते थे, एक दूसरे को खिलाते थे और उनका भी खाते थे, आपस में बात करते हुए घर आते थे और हम सभी को इंतज़ार रहता था गर्मी की छुट्टियों का। 


आज भी! वे दिन याद है मुझे! 
हमेशा याद रहेंगे, 
जो ख़ुशी के पल बिताए हैं हम अपनों के साथ, 
चेतना ने जिया है उन पलों को 
आज के युग में
धनी व्यक्ति वही है जिसके पास परिवार है, 
माता-पिता का आशीर्वाद साथ है, 
भाई का प्यार है, बहन का दुलार, 
ज़िन्दगी ना मिलेगी फिर दोबारा, 


मैं जब भी किसी को याद करती हूँ, तो उसकी अच्छाइयों के साथ और उसे याद करके कुछ पल के लिए मैं अतीत में खो जाती हूँ। मन ही मन कह उठती हूँ, “वे भी क्या दिन थे! वे दिन भी क्या थे!”


                                                  - चेतना प्रकाश चितेरी



हे युवाओं




हे युवाओ, अब तुम सब आगे बढो,
रूकने का अब,नाम भी मत लो।

उठी सब जागो, आगे बढो,
लक्ष्य अपना हासिल कर लो।

अब बैठने का नही रहा वक्त, 
हो जाओ तुम सब अब,तैयार।

होना पड़ेगा अब तमसबो को सख्त,
लेना होगा अपना अधिकार ।

ये दुनिया है बहुत ही स्वार्थी, 
कर्म पथ के तुम सब हो अभ्यर्थी,।

अनुनय विनय का नही है समय,
कर्म करने से मत कर,संषय।

तुमसब निडर बनो और साहसी,
नही हो कायर,लक्षय को रहे अभिलाषी।

लक्ष्य हासिल करने के प्रति, 
सब लगाये अपना शक्ति ।

तुमसबो को यहाँ कर्म किये  बिना,
कठिन होगा कुछ भी हासिल करना।

तुमसब रूककर अब न करो वक्त बेकार,
उठो, जागो आगे बढीं, ले निज अधिकार ।

युवा हो तुमसब हमारे इस वक्त का,
बहाव प्रवाल है तन मे तेरे रख का।

फिर किसी भी कार्य से क्यों डरना,
कर्मे कर लक्ष्य है तुमसबो को हासिल करना।

कहते है चुन्नू कवि समस्त युवा ओ से,
पीछे कभी मत मुडना भविष्य के संभावनाओं से।

हे युवाओं अब तुम सब हो एकत्रित, 
एकता का ताकत ही है हमारा संगठित।


                                            - चुन्नू साहा


लघुकथाः उपकार

रमाशंकर की कार जैसे हो सोसायटी के गेट में घुसी, गार्ड ने उन्हें रोक कर कहा, "साहब, यह महाशय आपके नाम और पते की चिट्ठी ले कर न जाने कब से भटक रहे हैं।"




रमाशंकर ने चिट्ठी ले कर देखा, नाम और पता तो उन्हीं का था, पर जब उन्होंने चिट्ठी लाने वाले की ओर देखा तो उसे पहचान नहीं पाए। चिट्ठी एक बहुत थके से बुजुर्ग ले कर आए थे। उनके साथ बीमार सा एक लड़का भी था। उन्हें देख कर रमाशंकर को तरस आ गया। शायद बहुत देर से वे घर तलाश रहे थे। उन्हें अपने घर ला कर कहा, "पहले तो आप बैठ जाइए।" इसके बाद नंकर को आवाज लगाई, "रामू इन्हें पानी ला कर दो।" 

पानी पी कर बुजुर्ग ने थोड़ी राहत महसूस की तो रमाशंकर ने पूछा, "अब बताइए किससे मिलना है?"

"तुम्हारे बाबा देवकुमार जी ने भेजा है। बहुत दयालु हैं वह। मेरे इस बच्चे की हालत बहुत खराब है। गांव में इलाज नहीं हो पा रहा था। किसी सरकारी अस्पताल में इसे भर्ती करवा दो बेटा, जान बच जाए इसकी। एकलौता बच्चा है।" इतना कहते कहते बुजुर्ग का गला रुंध गया।

रमाशंकर ने उन्हें गेस्टरूम में ठहराया। पत्नी से कह कर खाने का इंतजाम कराया। अगले दिन फैमिली डाक्टर को बुलाकर सारी जांच करवा कर इलाज शुरू करवा दिया। बुजुर्ग कहते रहे कि किसी सरकारी अस्पताल में करवा कर दो, पर रमाशंकर ने उसकी एक नहीं सुनी। बच्चे का पूरा इलाज अच्छी तरह करवा दिया।

बच्चे के ठीक होने पर बुजुर्ग गांव जाने लगे तो रमाशंकर को तमाम दुआएं दीं। रमाशंकर ने दिलासा देते हुए एक चिट्ठी दे कर कहा, "इसे पिताजी को दे दीजिएगा।"

गांव पहुंच कर देवकुमारजी को वह चिठ्ठी दे कर बुजुर्ग बहुत तारीफ करने लगा, " आप का बेटा तो देवता है। कितना ध्यान रखा हमारा। अपने घर में रख कर इलाज करवाया।"

देवकुमार चिटठी पढ़ कर दंग रह गए। उसमें लिखा था, "अब आप का बेटा इस पते पर नहीं रहता। कुछ समय पहले ही मैं यहां रहने आया हूं। पर मुझे भी आप अपना ही बेटा समझें। इनसे कुछ मत कहिएगा। आपकी वजह से मुझे इन अतिथि देवता से जितना आशीर्वाद और दुआएं मिली हैं, उस उपकार के लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूंगा।-आपका रमाशंकर।"
देवकुमार सोचने लगे, आज भी दुनिया में इस तरह के लोग हैं क्या ?


                                       - वीरेंद्र बहादुर सिंह 


सेंसेक्स से संसद अब सड़क तक एक्शन- कारपोरेट ज़गत में कोहराम ?

धड़ाम - अरे बाप रे - ओ माय गॉड 


वैश्विक स्तरपर 1 फ़रवरी 2023 को आने वाले बजट पर पूरी दुनिया की नजरें लगी हुई थी। भारतवासियों का भी पूरा ध्यान बज़ट पर था। बजट आया अनेकों सौगाते लाया, परंतु स्वाभाविक रूप से कहीं खुशी तो कहीं थोड़ा बहुत गम भी लाया।पक्ष विपक्ष ने अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं दी परंतु, अरे बाप रे! ओ माय गॉड! इनमें से कई लोग एक वित्तीय विपत्ति से अनजान थे, जिसकी नीव 24 जनवरी 2023 को ही पड़ गई थी। 




जिसका प्रभाव चूंकि, तभी सब 26 जनवरी 2023 के महापर्व में डूबे थे इसलिए इसके बाद धीरे धीरे उजगार होते रहा, जो बजट घोषित होने के बाद आज भी चरमस्तर पर है। कभी 2022 में कंपनी का मालिक रेटिंग में दूसरे नंबर पर था जो आज रेटिंग में 20 के भी नीचे आ गए हैं।सेंसेक्स से संसद अब सड़क तक एक्शन देखने को मिल रहा है! कारपोरेट जगत में कोहराम छाया हुआ है? 

कई हमारे वित्तीय विनियोगाकर्ताओं की स्थिति चरमरा गई है, तो कुछ लोगों के सरकारी वित्तीय संस्थाओं में विनियोग है जिन्होंने बड़ी मात्रा में उस कंपनी में विनियोग किया है, उनकी चिंताएं बढ़ गई है। स्वाभाविक रूप से बज़ट से ध्यान हट कर अब इस वित्तीय समस्या पर सारे देश सहित विदेशों के कारपोरेट क्षेत्र का ध्यान भी लगा हुआ है इसलिए आज हम टीवी चैनलों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आई जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे कि संसद से अब सड़क तक एक्शन, कारपोरेट क्षेत्र में कोहराम, एक रिसर्च रिपोर्ट से कंपनियों के शेयर रेट ऐसे गिर रहे हैं मानो पतझड़ में पेड़ों से पत्ते!दुनिया के निवेशक हैरान हैं।यह आलेख मीडिया में आई जानकारी के आधार पर है डाक्यूमेंट्स हमारे पास नहीं है। 


साथियों बात अगर हम इस कंपनी को अब तक के नुकसान की करें तो चूंकि अभी अभी बजट आया है इसलिए हम इसके कंपैरिजन में कहेंगे कि,रिसर्च कंपनी की रिपोर्ट सामने आने के बाद उद्योगपति का साम्राज्य किस तेजी से डूबा है, इसेहमर यूं समझ सकते हैं, वित्त वर्ष 2023-24 के लिए भारत का बजट कुल45.03 लाख करोड़ हैं, इतनी बड़ी रकम का करीब एक चौथाई भाग यानी 10 लाख करोड़ का घाटा अब तक ग्रुप को सिर्फ दस दिन में हो चुका है। ग्रुप का घाटा भारत के रक्षा बजट 4 लाख 32 हजार करोड़ रुपये से भी दोगुना है। 

रिसर्च रिपोर्ट सामने आने के बाद ग्रुप की कंपनियों के शेयर ऐसे गिरे हैं, जैसे पतझड़ में पेड़ों से पत्ते! 24 जनवरी 2023 के बाद से ग्रुप के शेयर हर दिन टूटे और ऐसा टूटे कि दुनिया के अमीरों की सूची से उद्योगपति टॉप-20 से बाहर हो गए! शेयरों में आई गिरावट की वजह से ग्रुप के मार्केट कैपिटलाइजेशन में अब तक कुल 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट आई है,ये रकम कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा हमर इस बात से लगा सकते हैं कि, वित्त वर्ष 2023-24 के लिए भारतीय रेल का बजट 2.40 लाख करोड़ का है, जबकि ग्रुप का घाटा 10 लाख करोड़ रुपये का है। लगभग पांच गुना अधिक! 

रिसर्च रिपोर्ट आने के बाद से ग्रुप के शेयर लगातार गिरते जा रहे हैं। शेयर मार्केट में तो जैसे भूचाल आ गया है। ग्रुप की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, मुंबई में शेयरों में जारी गिरावट से मार्केट में हाहाकार मचा है तो देश की राजधानी दिल्ली में विपक्ष ने संसद में जमकर हंगामा काट रहे है।विपक्ष कीमांग है कि ग्रुप पर लग रहे आरोपों पर चर्चा होनी चाहिए। 

जांच के लिए जेपीसी का गठन होना चाहिए।मतलब एक अमेरिकी रिपोर्ट से हिले ग्रुप साम्राज्य पर अब पॉलिटिक्स शुरू हो गई है। बड़ा सवाल ये कि ग्रुप का आगे क्या होगा, आज पूरी दुनिया की नजरें ग्रुप पर हैं। चाहे निवेशक हो, चाहे लोन देने वाले बैंक हो या फिर आम लोग। बीते कुछ दिनों से ग्रुप के नाम पर संसद ठप हैं, बजट पेश हो चुका है लेकिन बजट पर चर्चा नहीं हुई हैं। विपक्ष इसी बात पर अड़ा है कि जब तक जेपीसी का गठन नहीं होता तब तक संसद नहीं चलेगी। मतलब ये हंगामा अभी थमने वाला नहीं है। वहीं प्रमुख विपक्षी दल द्वारा मामला सड़क तक ले जाया गया है छह फरवरी को सभी जिलों में एलआईसी कार्यालयों और एसबीआई के बाहर मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इस बारे में एक परिपत्र जारी कर कहा है कि सभी नेता और कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लें और इसे सफल बनाए। 

साथियों बात अगर हम अमेरिकन वित्तीय रिसर्च कंपनी की करें तो, इन मामलों पर रिसर्च करती है, इस कंपनी का मुख्य काम शेयर मार्केट, इक्विटी, क्रेडिट, और डेरिवेटिव्स पर रिसर्च करना है. इस रिसर्च के जरिए कंपनी ये पता करती है कि क्या शेयर मार्केट में कहीं गलत तरह से पैसों की हेरा-फेरी हो रही है?कहीं बड़ी कंपनियां अपने फायदे के लिए अकाउंट मिसमैनेजमेंट तो नहीं कर रही हैं? कोई कंपनी अपने फायदे के लिए शेयर मार्केट में गलत तरह से दूसरी कंपनियों के शेयर को बेट लगाकर नुकसान तो नहीं पहुंचा रही है? कई बार इसकी रिपोर्ट का दिखा है असर। इस तरह रिसर्च के बाद कंपनी एक रिपोर्ट पब्लिश करती है।

कई मौकों पर इस कंपनी की रिपोर्ट का दुनियाभर के शेयर मार्केट पर असर देखने को मिला है। इसी कंपनी ने हाल ही में ग्रुप को लेकर एक रिपोर्ट जारी की, इस रिपोर्ट में ग्रुप पर मार्केट में हेरफेर और अकाउंट में धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। इसके बाद ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई है। हालांकि, उद्योगपति के नेतृत्व वाले ग्रुप ने आरोपों को निराधार और भ्रामक बताया। उन्होंने दावा किया कि इस रिपोर्ट में जनता को गुमराह किया गया है।अमेरिका की इनवेस्टमेंट रिसर्च फर्म ने कहा है कि वह ग्रुप की कंपनियों के शेयर बेचकर जल्द ही निकल लेगी क्योंकि समूह भारी कर्जें में है। 

मीडिया में छपी खबर में कहा गया है कि समूह ने टैक्स हेवन्स में कंपनियाँ खड़ी करने की सुविधा का नाजायज़ फायदा उठाया है।रिसर्च फर्म ने दावा किया है कि यह रिपोर्ट दो साल की तहकीकात के बाद जारी की गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रुप कई सालों से स्टॉक मैनिपुलेशन और अकाउंटिंग फ्रॉड में शामिल है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह रिपोर्ट जारी करने से पहले रिसर्च फर्म ने समूह में काम कर चुके कई वरिष्ठ अधिकारियों सहित दर्जनों लोगों से बात की ? हजारों दस्तावेजों की पड़ताल की और लगभग आधा दर्जन देशों में समूह के ऑफिसों के चक्कर काटे हैं ? 

साथियों बात अगर हम कंपनी के एक्शन की करेंतो समूह ने रिसर्च रिपोर्ट को भारत पर साजिश के तहत हमला बताया है। ग्रुप ने 413 पन्नों का जवाब जारी किया। इसमें लिखा है कि समूह पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। ग्रुप ने यह भी कहा कि इस रिपोर्ट का असल मकसद अमेरिकी कंपनियों के आर्थिक फायदे के लिए नया बाजार तैयार करना है।समूह ने एक बड़ा ऐलान किया है। उद्योगपति के नेतृत्व वाले समूह ने अपनी फ्लैगशिप कंपनी एंटरप्राइजेज का एफपीओ वापस लेने की घोषणा की है। 

कंपनी का 20 हजार करोड़ रुपये का फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर एक दिन पहले ही ओवर सब्सक्राइब्ड होकर बंद हुआ था। समूह ने एक बयान में कहा है कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग में एफपीओ को वापस लेने का फैसला किया गया है। निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने ये फैसला किया है और वह निवेशकों के पैसे वापस लौटाएगी। 
साथियों बात अगर हम मामले के सुप्रीम कोर्ट में जाने की करें तो,कोर्ट में याचिका दाखिल कर विवादास्पद रिसर्च कंपनी के मालिक और संस्थापक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। यह याचिका एक अधिवक्ता ने दाखिल की है। याचिका में रिसर्च कंपनी के मालिक को को शार्ट सेलर बताते हुए उसके खिलाफ निर्दोष निवेशकों का शोषण और धोखाधड़ी करने के आरोप की जांच की मांग की गई है। याचिका ने उनके के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए निवेशकों को मुआवजा दिलाने की मांग की गई है। अब विपक्ष भी इसी बात पर अड़ा है कि जब तक जेपीसी का गठन नहीं होता तब तक संसद नहीं चलेगी।मतलब ये हंगामा अभी थमने वाला नहीं है। 
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि धड़ाम, अरे बाप रे, ओ माय गॉड, सेंसेक्स से संसद अब सड़क तक एक्शन! कारपोरेट जगत में कोहराम! एक रिसर्च रिपोर्ट से कंपनियों के शेयर रेट ऐसे गिर रहे हैं मानों पतझड़ में पेड़ से पत्ते, दुनिया के निवेशक हैरान हैं।


                                                  - किशन सनमुख़दास 


कविताः तब समझो आ गया बसंत





डाली डाली फूल खिले है
बगिया महक रही है 
फुदक फुदक कर डाल डाल पर
कोयल कूक रही है

पेड़ो पर अब लगी झांकने
नई पत्तियां और नए कोंपल
बसंत आ गई चुस्ती लाई
सुस्ती हो गई ओझल

भंवरा भी अब गुंजन करता
मस्ती में ढूंढे कली कली
बसंत अब पतझड़ से कहे
तू भाग जा अब मैं बागों में चली

मन में जब जागे नई उमंग
समझो अब आ गई बसंत
वसुंधरा भी गायेगी खुशी के गीत
हर तरफ खुशियां छायेंगी अनंत

जब मौसम बदलने लगे
सर्दी का होने लगता है अंत
बागों में जब आ जाती बहार
तब समझो आ गया बसंत


                        - रवींद्र कुमार शर्मा


कविताः शख्स



वो शख्स।
मुझको मुझसे ही मांग कर
ले गया वो शख़्स ।
आंखों के रास्ते दिल में
उतरगया वो शख़्स । 
करता रहा दिल से वो
दिल्लगी पता न चला ।
न जाने कब लूटकर चला 
गया मुझे वो शख़्स । 
हर ख़ुशी अपनी मैंने तो 
न्योछावर कर दी उस पर ।
रातों को जागने की सज़ा 
मुझे दे गया वो शख़्स । 
न जाने किस अंदाज़ से
आँखों में समाकर । 
मेरे दिल की धड़कनों 
में उतर गया वो शख़्स । 
मालूम न थ कैसी होती
है मुहब्बत मुश्ताक़ ।
सारी दुनिया से बेख़बर
कर गया वो शख़्स । 

                                   डॉ  मुश्ताक अहमद शाह


वैलेंटाइन डे पर फ्लोलेस मेकअप लुक के लिए आजमाएं ?



वैलेंटाइन डे प्रेमियों के लिए खास दिन होता है। प्रेमी पूरे साल इस दिन की राह देखते हैं। वैसे तो फरवरी महीने के दूसरे सप्ताह को वेलेंटाइंस सप्ताह कहा जाता है। वेलेंटाइंस सप्ताह सात दिनों तक रहता है। वेलेंटाइंस सप्ताह की शुरूआत सात फरवरी से होती है और 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे होता है। वेलेंटाइंस डे के लिए कपल काफी तैयारियां करते हैं। वे एक-दूसरे को गिफ्ट देते हैं और प्यार का इकरार करते हैं। वेलेंटाइंस डे को लेकर लड़कियों में अधिक क्रेज देखने को मिलता है। वेलेंटाइंस डे के लिए लड़कियां महीनों पहले से तैयारी शुरू कर देती हैं।






वैलेंटाइन डे के लिए आकर्षक और सुंदर लुक के लिए लड़कियों को सेल्फ केयर पर अधिक ध्यान देना चाहिए। प्यार के स्पेशल डे के लिए लड़कियां फ्लोलेस लुक के लिए क्विक मेकअप रूटीन फाॅलो करना पसंद करती हैं। आप भी वैलेंटाइन डे पर स्टनिंग लुक के लिए इस क्विक मेकअप रूटीन को फाॅलो कर सकती हैं।

चेहरा क्लीन करें

याद रखिए फ्लोलेस लुक के लिए चेहरा क्लीन करना बहुत जरूरी होता है। खास कर जब आप मेकअप करने जा रही हैं तो पहले आप फेस क्लींजर से चेहरा जरूर साफ करें। इससे चेहरे की गंदगी और ऑयल साफ हो जाएगा। चेहरा साफ करने के लिए अच्छी क्वॉलिटी के फेसवाश का उपयोग करें।

क्विक मेकअप के लिए फाउंडेशन के साथ मोइश्चराइज मिक्स करें

ग्लोइंग और क्विक मेकअप लुक के लिए फाउंडेशन के साथ मोइश्चराइज मिक्स करें। फाउंडेशन और मोइश्चराइज मिक्स कर के चेहरे पर लगाने से लाइट मेकअप लुक मिलता है। इससे आप का चेहरा नेचुरल लगेगा। मोइश्चराइज और फाउंडेशन बराबर मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगाएं।

हाइलाइटर

आज के समय में हाइलाइटर के बिना मेकअप अधूरा लगता है। हाइलाइटर का उपयोग फीचर को हाइलाइट करने के लिए किया जाता है। नेचुरल लुक के लिए आप हाइलाइटर का उपयोग दो तरह से कर सकती हैं। हाइलाइटर को चीक्स बोंस, नोजब्रिज और लिप्स लगाएं। उसके बाद अंगुली पर थोड़ा हाइलाइटर ले कर आंखों पर लगाएं। इससे आप को आई मेकअप करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

चीक्स और लिप्स मेकअप लिपस्टिक की मदद से करें

क्विक मेकअप के लिए आप लिपस्टिक की मदद से ब्लशर पर लगा सकती हैं। एक लिपस्टिक लें, उसे लिप्स पर लगा लें। उसके बाद थोड़ी लिपस्टिक चीक्स पर लगा कर उसे अच्छी तरह ब्लेंड कर लें। इससे आप को नेचुरल ब्लश मिलेगा। लिपस्टिक को ब्लशर की तरह उपयोग करने के लिए आप अपनी अंगुलियों का उपयोग कर सकती हैं।


                                                   - स्नेहा सिंह 


कविताः पिता




अपने परिवार की
मजबूत जड़ है पिता
पेड़ की तरह शीतल 
छांव है पिता
हर परेशानी में
मजबूत ढाल है पिता
टूटकर भी जो न बिखरने दे
वो मजबूत हाथ है पिता
कठिन स्थिति में भी जो
हंसता हुआ दिखे
वो अनुपम डोर है पिता
हमारे भविष्य के ताने-बाने बुनता
संघर्षशील है पिता
एक बेटी का सहारा है पिता
बेटे का सच्चा साथी है पिता
परिवार की मुस्कान है पिता
घर की हर ईंट में शामिल है पिता
हर घर की इज्ज़त और अभिमान है पिता
चट्टान सी शख्सियत है पिता
बच्चे के वजूद की पहचान है पिता
कठोर आवाज में जिसकी छिपा है प्यार
हिम्मत का ऐसा दरिया है पिता
कमर झुक जाती है जिसकी हमें निखारने में
परिवार की ऐसी शान है पिता


                         - तनूजा पंत


05 February 2023

अब भी उम्मीद है मुझे



अब भी उम्मीद है मुझे 
तेरे  लौट आने की
कि लौट आओगी तुम एक दिन अवश्य ही 
क्योंकि इतनी भी कमजोर नही था मेरा प्यार 
कि तुम तोड़कर दुर चली जाओगी मुझसे 
टूट कर भी अटूट चाहते हैं तुम्हें 
तो फिर कैसे मुँह मुड़कर चली जाओगी छोड़ हमें 
जानता हूँ मैं
तुम दुनियां के रस्मोरिवाज से डरती हो
रिश्ते नाते,परिवारों के बंधन में बंधी रहती हो
मेरे सुरक्षा हेतु परवाह करती हो
लेकिन यदि प्यार सच्चा हो 
तो किसी से डरने की जरूरत ही नही है 
जहाँ हम दोनो खुश रहे, वही सही है 
सबकुछ जायज होता है प्यार मे
साथ आ ही जाता है, लड़ते हुए परिवार मे 
अतः तुम अब डरो नहीं 
लौट आओ जाना न होगा तुम्हें कहीं 
बहुत ही उम्मीद तुमसे लगा रखे हैं 
कि लौटकर तुम्हें अब आना ही है 
अब भी है मुझे उम्मीद कि, लौट आओगी तुम


                          - चुन्नू साहा


कविताः जिंदगी





ज़िंदगी धुएं की तरह उड़े जा रही है,
कभी काली कभी सफेद हुए जा रही है।

हम आस लगाए बैठे है ये मखमल की तरह चली जा रही है,
पर ये तो कभी सीधी कभी आड़ी तिरछी हुए जा रही है।

हम सोच रहे है ये खुशहाली ही खुशहाली ला रही है,
पर ये तो हर इक मोड़ पर नई परीक्षा लिए जा रही है।

हर रोज़ मुलाकात हो जाती है किसी अनजान चेहरे से,
और ये कहीं न कहीं किसी से दुश्मनी भी बढ़ाए जा रही है।

बदल देता है मिल कर कोई शख्स किसी की जिंदगी के मायने,
पर ये उसके मिलने की भी परीक्षा लिए जा रही है।

"जय"अखिर जिंदगी क्या क्या रंग दिखा रही है,
हर कदम पर तुझको ये क्यूं आजमाए जा रही है।


                          - लेफ्टिनेंट जय महलवाल


कविताः युवा





तुम युवा हो आज के, नयी पीढी को कुछ सिखा देगे,
तुम ठान लो अगर तो इतिहास रच दोगे।

कदम कदम पर नया पथ अपनाओ तुम,
पथ कितना भी कठिन क्यों ना हौसला तुम रखो।

स्वास्थ्य शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग करो तुम
सूर्य नमस्कार के बारह प्रणायाम मिलकर रोज करो तुम।

रोगों से तुम्हें मुक्ति मिलेगी ऐसा कुछ कर दिखाओ तुम,
स्वास्थ्य शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का बास होगा ।

स्वाभिमान से जीने का हौसला अफजाई करो तुम
स्वामी विवेकानंद जैसा तेज चेहरे पर वैसा कर तुम।

जीवन के इस रंगमंच में खेलों को अपनाओं तुम ,
आज का भविष्य भी तुम हो कल का भविष्य भी तुम हो।

योग के गुरुओं का सम्मान करो तुम ताकि सीख उनसे मिले,
बाबा रामदेव देब जी सभी योग आचार्यों का मान रखो तुम।

हो अगर निरोगी काया तुम लम्बा जीवन पाओगे तुम,
शिक्षा का जितना ज्ञान बढाओगे उतना नाम कमाओगे।

छल कपट से दूर रहो तुम सत्य का मार्ग तुम अपनाओ,
जीत सत्य की एक दिन होती तुम फातखा लहराओगे।।


                                              - रामदेवी करौठिया


गोपाल बाबू कौन थे ?





गोपाल बाबू गोस्वामी जी, आओ आज बताते हैं।
उत्तराखंड को दी उनकी, सौगातें याद दिलाते हैं।।

कहॉं लिए वह जन्म और, प्रसिद्धि कैसे पाए -
आओ आज फिर से हम, बात यह दोहराते हैं।।

उत्तराखंड जनपद अल्मोड़ा, सुंदर रानीखेत।
उससे आगे चौखुटिया के, गॉंव चॉंदीखेत।।

चॉंदीखेत में जन्म लिया, श्री मोहन गिरी के द्वार।
माता चनुली देवी के तुम, खुशियों के संसार।।

बाल्यकाल में पिता आपके, छोड़ चले संसार।
तब फिर कंधे आपके, आया घर का भार।।

करी पढ़ाई आठवीं, निकल गये परदेश।
नहीं मिला परदेश में, एक अच्छा परिवेश।।

पलट गये फिर हारकर, जन्मभूमि की ओर।
मन लगाया खेती में, सम्भली जीवन की डोर।।

गायन लेखन आपका, रहा सदा ही शौक।
सुनकर जनता आपको, जाती थी तब चौंक।।

गायन के फिर क्षेत्र में, बढ़ गये आगे आप।
उत्तराखंड संग देश में, छोड़ी अपनी छाप।।

कैल बजै मुरली आपका, सबसे पहला गीत।
बेडू पाको बारोमासा, से सबको है प्रीत।।

ऐसे सुंदर गीत अनेकों, दिए हमें उपहार।
हरूहित मालूशाही राजुला, कथा पे गीत अपार।।

जीवन आगे बढ़ गया, बना सुखी परिवार।
वक्त से पहले आकर एक दिन, करा काल प्रहार।।

काल से डटकर लड़े आप पर, हो गई अंत में हार।
पचपन बरष की आयु में, छोड़ चले संसार।।

लेखन सुंदर मधुर गायकी, छोड़ी जग में छाप।
हर उत्तराखंडी के दिल में, सदा जीवित हैं आप।।

- चंपा पांडे