साहित्य चक्र

30 August 2017

• साहित्य और मीडिया-








साहित्य और मीडिया : वर्तमान संदर्भ में शोध सारांश----
     
       साहित्य क्या है? इसकी हमारे समाज में क्या उपयोगिता है? और हमारे समाज के लिए यह क्या भूमिका निभा सकता है..? इसके बारे में शायद हम सब जानते हैं। "साहित्य समाज का दर्पण है"। वर्तमान संदर्भ में सोशल मीडिया का हर तरफ बोल बाला है जिसके कुछ नकारात्मक पक्ष तो है। परंतु यदि सोशल मीडिया के सकारात्मक पक्षों की बात करें तो इसकी नकारात्मकता नगण्य हो जाती है। आज सोशल मीडिया द्वारा हम अपने प्राचीनतम इतिहास की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। हमारे वेद, पुराण, श्रुतियां, उपनिषद, महाकाव्य, काव्य और जितने भी ग्रंथ हैं..। विभिन्न विषयों पर ऋषि मुनियों ने जिनकी रचनाएं की है...। उन सब की जानकारी हमें आज केवल एक क्लिक की दूरी पर प्राप्त हो जाती है जो हमारे लिए सौभाग्य की बात है। प्राचीन समय में कहां इतनी जद्दोजहद के बाद थोड़ी सी जानकारी उपलब्ध हो पाती थी..। परंतु आज हमारी मुट्ठी में ही दुनियां की सारी जानकारी उपलब्ध है। यह विज्ञान और सोशल मीडिया की देन है..। इसके द्वारा अपनी सभ्यता, संस्कृति, परंपराएं और रीति-रिवाज, पौराणिक इतिहास एवं आध्यात्मिक बौद्धिक कथाओं का ज्ञान आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। हमारे प्रमाणिक ग्रंथों की सम्पूर्ण जानकारी Google पर प्रस्तुत है..। जिसे हम आसानी से ग्रहण कर सकते हैं। और साथ-साथ वर्तमान पीढ़ी को इसके बारे में बताते हुए भावी पीढ़ी के लिए भी सहेज कर रख सकते हैं। हमारे नैतिक, सामाजिक मूल्य जिनकी आज सबसे अधिक आवश्यकता है सोशल मीडिया जैसे व्हाट्सएप और फेसबुक के द्वारा हम उसका प्रचार - प्रसार कर सकते हैं। हिंदी साहित्य में लेखन की विभिन्न विधाओं में आज नया लेखक मंच स्थापित हो चुका है एवं सोशल मीडिया पर ही अपनी रचनाओं को प्रकाशित कर रहा है। जिससे लोगों का रूझान पठन - पाठन की ओर बढ़ रहा है जो साहित्य की समृद्धि में सहायक है । यह मेरे मूल विचार है । प्रत्येक सिक्के के दो पहलू हैं। अपवाद हर जगह मौजूद है। तो क्यों ना हम किसी भी चीज के सकारात्मक पक्ष की बात ज्यादा करें.. ताकि हमारे विचार भी सकारात्मकता की ओर उन्मुख हो तथा हमारी भावनाएं विशुद्ध हो। क्योंकि हम जैसा देखते हैं, सोचते हैं, हमारे विचार भी वैसे ही बनने लग जाते हैं। इसलिए-- "सकारात्मक बनो, सकारात्मक सोचो.... साहित्य को, सोशल मीडिया में खोजो"।
विदुषी शर्मा. पीएच.डी शोधार्थी
M- 9811702001
Email - neerjasharma98@gmail.com

29 August 2017

# डेरा सच्चा सौदा क्या है..?



'डेरा सच्चा सौदा' एक संत आश्रम है..। जो हरियाणा के सिरसा में स्थित है..। जिसकी स्थापना 1948 में संत शाह मस्ताना जी ने की थी..। शंहशाह मस्ताना ने एक झोपड़ी में आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करके डेरा सच्चा सौदा की शुरूआत की...। जिसके साथ-साथ धारे-धीरे डेरा में अनुयायियों की संख्या बढ़ती गई..। एक छोटे-सी झोपड़ी से मस्ताना महाराज ने समाज में एक नई पहल तो की... लेकिन जिस तरह आज गुरमीत राम रहीम ने इसका दुरुप्रयोग कर लोगों व समाज में बाबाओं के प्रति एक विरोध पैदा कर दिया है..। लोग का विश्वास धार्मिक बाबाओं और गुरूओं से टूटने लगा है..। वैसे आपको बताते चलूं...कि महाराज मस्ताना के बाद डेरा के प्रमुख शाह-सतनाम  महराज बनें..। सतनाम ने डेरा की कमान 1990 में अपने अनुयायी गुरमीत सिंह को गद्दी सौंपी..। जब गुरमीत सिंह मात्र सात साल का था..तो सतनाम महाराज ने उनका नाम बदल कर 'गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां'  नया नाम दिया..। डेरा सच्चा सौदा पिछले 68 सालों से चला आ रहा है..। इसकी शाखाएं अमेरिका, कनाडा, इंग्लैण्ड जैसे आदि देशों में भी फैले है..। इस संगठन से करीब-करीब पांच करोड़ से ज्यादा लोग जुड़े हुए है..। इस संस्था में सिख धर्म के लोग, हिंदू धर्म के लोगों के साथ - साथ कई और धर्मों के लोग भी जुड़े हुए है..। इस संगठन की मुख्य विशेषता यहां पर किसी भी धर्म व जाति के साथ भेदभाव नहीं होता है...। डेरा समर्थक इस आश्रम को 'सच्चा धार्मिक आश्रम' कहते है..। डेरा समर्थक मीट-मांस, मदिरा का सेवन नहीं करते है...। डेरा समर्थक समाजसेवा करने में सक्रिय रहते है..। डेरा संगठन ने कई बार रक्तदान शिविर, कई नेत्र शिविर व कई बार बाढ़-सूखा ग्रस्त क्षेत्रों की मदद की है..। 'डेरा सच्चा सौदा' एक एनजीओ की तरह काम करती है...। जो मस्ताना जी ने बनाया था..। मस्ताना जी का मकशद था... कि वह एक संगठन के माध्यम से जनता की सेवा करें..। जिस तरह राम रहीम की पोल खुली है...उसे देख कर लगता है...। अब लोगों का भरोसा सभी धार्मिक संगठनों से उठ जाएगा...। जो हमारे धार्मिक गतिविधियों के लिए खतरनाक साबित भी हो सकता है..। हाँ...! हमारा देश पहले से ही धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा देश रहा है..। कुछ दुष्ट पापियों ने धार्मिक गतिविधियों को भी नष्ट कर दिया है..। अत: हमें अब खुद पर भरोसा करने ही होगा...और हमें खुद पूजा-पाठ और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना शुरू कर देना चाहिए..। हमें जानना चाहिए...हमारे ग्रंथ, हमारी कुरान, हमारी बाइबल में क्या लिख है..? ना कि किसी बाबा, मौलवी, मुनि के कहे अनुसार चलना चाहिए..। हमें खुद के अनुसार चलना चाहिए..। चाहे वह हिंदू हो या फिर किसी और धर्म का व्यक्ति हो..। हमारी पहचान ही हमारा मूल अधिकार है...। 



                                                             रिपोर्ट- दीपक कोहली


# टिहरी गढ़वाल की महारानी...! माला 'लक्ष्मी'



टिहरी गढ़वाल की महारानी...! या राजरानी के नाम से जानी जाने वाली शाही परिवार की बहू माला 'लक्ष्मी' है..।  जो इस समय देवभूमि के टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद है..। जी हाँ...सही पढ़ा और सही सुना..! माला लक्ष्मी ही शाही परिवार की बहू और टिहरी गढ़वाल की सांसद है..। 
माला राजलक्ष्मी का जन्म 23 अगस्त 1950 में नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुआ..। माला की पढ़ाई - नेपाल के 'रत्ना राज्यलक्ष्मी कॉलेज' ( Ratna Rajya Laxmi College) काठमांडू और Convent of Jusus Mary, Pune से हुई है..। माला नेपाल की राज परिवार की बेटी थी..। जिसके बाद माला की शादी टिहरी गढ़वाल के शाही परिवार के राजा महुजेंद्र शाह साहिब बहादुर (Mahujendera Shah Sahib Bahadur) से 7 फरवरी 1975 हुआ..। शादी के एक साल बाद माला लक्ष्मी ने एक बेटी को जन्म दिया..। जिसका नाम क्षीरया कुमारी देवी (Kshirya Kumari Devi) है..। माला राज्यलक्ष्मी एक समाजसेवी के साथ-साथ एक राजनेत्री भी है..। जो देवभूमि की राजनीति में एक अहम रोल निभाती है..। माला राज्यलक्ष्मी उत्तराखंड की प्रथम महिला सांसद है..। जो उत्तराखंड राज्य गठन के बाद बनीं..। माला राजलक्ष्मी शांत सभाव और सुशील मन की स्त्री है...। जो हर विषय पर राज्य के साथ खड़ी दिखती है..। माला देवभूमि में भारतीय जनता पार्टी की प्रमुख नेताओं में गिनी जाती है...। बीजेपी ने 2014 के आम चुनाव में माला को टिहरी गढ़वाल के लोकसभा सांसद सीट से लड़ाया..। जिसमें माला की जोरदार जीत हुई...। इतना ही नहीं बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तराखण्ड की पांचों सीटों में विजय हासिल की..। इससे पहले माला राज्यलक्ष्मी ने 2012 के उपचुनाव में विजयश्री हासिल की थी..। जिसके बाद पार्टी ने उन्हें टिहरी गढ़वाल से लोकसभा टिकट दिया...। माला राज्य लक्ष्मी एक राजनेत्री ही नहीं बल्कि एक समाजसेविका भी है..। जिन्होंने कई सामाजिक कार्य किए है..। देवभूमि में स्त्रियों की जो दशा है..उसे देखते हुए..। माला राज्यलक्ष्मी का यह सफर शानदार कहा जा सकता है..। माला राज्यलक्ष्मी उन महिलाओं और उन युवतियों के लिए एक ऐसा उदाहरण है....जो राजनीति में आना चाहती है...। माला लक्ष्मी को उत्तराखंड की इंदरा कहा जाए तो गलत नहीं होगा..। शाही मान...राजनीति आन... माला की शान..। यहीं राजलक्ष्मी की पहचान..।


                                                               रिपोर्ट- दीपक कोहली

28 August 2017

बाबा राम रहीम की हकीकत...?



'गुरमीत राम रहीम सिंह' एक भारतीय सिख धर्म गुरू थे..। जो सिद्धू मूल के पंजाबी जाट है...। जिनका जन्म राजस्थान के जिला गंगानगर के  गुरूसर मोडिया गांव में हुआ...। जिनके पिता का नाम- माघर सिंह तो, माता का नाम- नसीब कौर था...। गुरमीत राम रहीम 'डेरा सच्चा सौदा' के प्रमुख थे..। डेरा सच्चा सौदा एक धार्मिक संस्था है...। जिसकी स्थापना 29 अप्रैल 1948 में संत 'शाह मस्ताना' ने की थी...। आपको बता दूं... 23 सितम्बर 1990 में राम रहीम 'डेरा सच्चा सौदा' के प्रमुख बनें..। जिसके बाद गुरमीत का काला खेल बढ़ता रहा..। वैसे राम रहीम की शिक्षा को लेकर ज्यादा जानकारी तो नहीं मिली...लेकिन इतना जरूर कह सकते है...कि इनकी शिक्षा इनके पैतृक गांव से ही हुई थी..। राम रहीम एक पागल किस्म का धर्मगुरू था...। जो फिल्में बनाता था..और लड़कियों के साथ रंगीनी रचाया करता था..। राम रहीम को लोग गुरू की तरह पूजते थे...। लोग उसे अपना भगवान माना करते थे..। अपको बता दूं...राम रहीम को चार बच्चे और एक पत्नी है...। वैसे राम रहीम के कई फिल्में और अल्बम भी बनाए हैं..। जिनमें 'एमएसजी' एक है..। राम रहीम के संबंध राजनीतिक पार्टियों से भी रहे है।
चाहे वह कांग्रेस पार्टी हो या दूध की धूल बीजेपी..। राम रहीम की पहचान इतनी बड़ी है.... कि उनके यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कांग्रेस के कई बड़े राजनेता आया करते थे..। इन बातें से आप अंदाजा लगा सकते है। कि हमारे देश में हर राजनेता किसी ना किसी काले पर्दे से जुड़ा हुआ है..। जिस तरह आए दिन हमारे देश में राजनेताओं और बाबाओं व मौलवियों की पोल खुल रही है..। उसे देखकर यहीं लगता है...कि हमारे देश मेंं जब तक ये कीड़े रहेगें...। तब तक देश की उन्नति-विकास होना असंभव है..।
शायद आपको पता नहीं होगा...। गुरमीत राम रहीम को हमारे देश के एक न्यूज पेपर ने  2015 में 100 Most Powerful Indian में रखा था..। जी हां वह न्यूज पेपर The Indian Express था..। वहीं 2016 में गुरमीत राम रहीम को हमारी केंद्र सरकार ने सिनेमा जगत का सबसे बड़ा अवार्ड 'दादा साहेब फाल्के आवर्ड' से सम्मानित भी किया है..। सामजिक कार्यों के लिए राम रहीम को 'Giants International Award' भी मिला हुआ है..। वहीं सर्वश्रेठ अभिनेता और सबसे बहुमुखी व्यक्तित्व के लिए 'Bright Award' दिया गया है..। राम रहीम को 'विश्व योगा चैंपियन' बनाने के लिए भारतीय योग महासंघ (वाईएफआई) द्वारा द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए सम्मानित भी किया गया है..। इसके लिए कौन जिम्मेदार है...?



रिपोर्ट- दीपक कोहली

* नर कंकाल से ..।



नर कंकाल से तू भी है और मै भी जन्मी
है तन नस ,माँस, लहू से भरा बस एक घड़ा

तुझको भी है मुझको भी है कोख ने ही जना
फिर क्यौ तू पुरुष पौरुष मै नारी अबला

जिसने हर जीव को जीवन दिया वो भी है मानता
कि शक्ति  बिना कुछ भी सम्भव नही वो जानता

फिर क्यों अहम में तू मान मेरा तोड़कर
देता ग्यान क्यों पुरुषत्व का निचोड़कर

सुन मैं धरती हूँ सहलेती हूँ तेरी यातना
सहन करने की करती हूँ क्या कोई साधना

सुन में प्यार में बस दूब सी बिछ जाऊँगी
तेरे हिस्से का सारा जहर मैं पी जाऊँगी

पर बदले में तुझसे बस यहीं मैं चाहूंगी
मेरा मान हो सम्मान से जी जाऊँगी

गर आ गई अपने प्रचंड स्वभाव पे
तो काल की भी राह डगमगाएगी

मैं प्रेम के लिए प्यार से प्रभु ने रची
मेरे रोम रोम में वात्सल्य ममता है भरी

हूँ शान्त जीवन देने को हूँ मैं बनी
गर तूने मेरी आत्मा को डस दिया

फिर न कहना माँ कुमाता हो गई
देती हूँ जीवन दूध छाती क पिला

काली जो बन गई लिए खप्पर हाथ में
सारा धधकता लहू मैं पी जाँऊगी

फिर न करना कर जोडंकर ये प्रार्थना
देने लगे माँ भी तुम्हें जो यातना

नर कंकाल से......।।
                                 
                                                     स्वरचित- सुमन गौड़

23 August 2017

# नशे की लत #



कितने खुश किस्मत वो बच्चे,
हो जिनके मम्मी -पापा अच्छे
आप नशे में रहते हो हर दम
घुट घुट कर जीते रहते हम।

हमें किस बात की सजा दे रहे हो,
अंधेरे से डरते हैं फिर भी अंधेरा दे रहे हो,
  आपसे खपा भी नही रह सकते है,
पर हद हो गई चुप भी नही रह सकते है,

  पीकर आप हमें जिन्दा ही मार रहे हो,
लेकिन कुछ फायदा नही खुद से ही हार रहे हो,
    बच्चों की जिंदगी पर क्यों ग्रहण लगाते हो,
क्या हमे जीने का हक़ नही जो इतना सताते हो,

आपकी फ़िक्र हैं हमे इसलिए मना करते है,
बीमारी न घेर ले कहीँ इसी बात से डरते है।
आपकी वजह से बहुत कुछ सहना पड़ रहा है,
शराब के कारण बच्चों का भविष्य बिगड़ रहा है।


पिने में नुकसान है फिर भी  समझ नही पाते
मान जाओ पापा क्यों इतना कहर हो ढाते,
आप शराब न पीते तो कितना अच्छा होता?
हम हँसते-हँसते जीते तो कितना अच्छा होता?

* सुमन जांगड़ा *

21 August 2017

* पत्थर *

कवि बलवन्त बावला

ताजमहल का आकर्षण हो
या लाल किले का गर्जन हो
स्तम्भ लेख हो या शिलालेख हो
या कोई पुरातन अभिलेख हो
शिक्षा का केन्द्र तक्षशिला हो
या कोई पुरातात्विक जिला हो
इन सभी धरोहरो स्थलों का पत्थर से गहरा हमारा नाता है
पत्थर को पत्थर न समझ पत्थर तो इतिहास हमारा गाता है
*   *   *   *   *   *   **

पार किया विशाल समुद्र राम दलन ने
पत्थर ही था पथ का राम बना
पत्थर ही है हर मन्दिर मे
जो है भक्तों का धाम बना
किसी ने पत्थर पूजने में जीवन बिता दिया
किसी ने पत्थर तोड़ने में खुद को खपा दिया
'बावले' यह किसी का दाता तो किसी का भाग्य विधाता है
पत्थर को पत्थर न समझ पत्थर तो इतिहास हमारा गाता है
*   *   *   *   *   *   **

आज हमारे पास गोला बारूदों का अम्बार है
आधुनिक हथियारों की ललकार है
हम सलामी भी देतें है  तोप की
तब पत्थर से ही मिलता था आहार
क्योंकि पत्थर ही था एकमात्र हथियार
उत्तर में पत्थर ही वो प्रहरी है जो हमारी सुरक्षा का व्याख्यान हमें सुनाता है
पत्थर को पत्थर न समझ पत्थर तो इतिहास हमारा गाता है
*  *  *   *   *   *   **

सूरज वही है तपन वही है
धरा वही है  गगन वही  है
धरम वही है चमन वही है
आज बस फर्क इतना है 
तब दौर पत्थर का था अब लोग पत्थर के हैं
इन्ही पत्थर दिलों मे से कोई नेता/व्यापारी/मजदूर/किसान
तो कोई घाटी का पत्थर बाज कहाता है
पत्थर को पत्थर न समझ पत्थर तो इतिहास हमारा गाता है
*   *   *   *   *   *   **

रचनाकार-- कवि बलवन्त बावला

* आहार ही हमारी ताकत है।।

Dr. Charu sharma 


हमारा उद्येश्य है... 'स्वस्थ हम - स्वस्थ भारत' 

आज के समय में स्वस्थ रहना सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है..। जी हाँ.. मैं चारू शर्मा... एक आहार विशेषज्ञ होने के नाते आप सभी के लिए एक ऐसे उत्पाद लेके आई हूँ..। जो एक साथ हमें बहुत सारे बीमारियों से बचाकर रखें...। जैसा की हर व्यक्ति जानता है हेल्दी रहने के लिए फलों का सेवन जरूरी है...। हाल ही में एक शोध के अनुसार एक व्यक्ति के हेल्दी रहने के लिए प्रतिदिन 3.5 किलो फलों का जूस पीना जरूरी है...। जिन फलों में एंटी- ऑक्सीडेंट की मात्र भरपूर हो। वही फल हमारे लिए लाभदायक होते है..। परन्तु यह आसान और संभव नहीं है..। जैसा आप जानते ही होगें भारत में पिछले कई वर्षों से इस विषय पर शोध चल रही है..। इसी शोध के चलते हमने एक ऐसे उत्पाद का निर्माण किया है..। जिसका नाम I-Pulse है। यह एक प्रकार का जूस है..। इस जूस में 15 से ज्यादा फलों का रस मिला हुआ है..। इस जूस का 60 ml रोजना खाली पेट सेवन करने से आप लम्बे समय तक स्वस्थ रह सकते है..। इसके 60 ml रस में 3.5 किलो फलों का मिश्रण रस है..। जिसमें मुख्य तौर पर असाई बेरी का मिश्रण है..। जो अमेजन के जंगलों में मिलता है..। यह फल दुनिया का इकलौता ऐसा फल है जिसमें सबसे ज्यादा एंटी-ऑक्सीडेंट होता है..। वहीं साथी ही इसमें नाशपाती, ब्लैकबेरी, ब्लूबेरी, नारंगी, कीवी जैसे फलों का मिश्रण इस प्रोटेक्ट में प्रयोग किया गया है..। इस जूस के 60 ml रस में संपूर्ण पोषण तत्व मिलते है..। जो हमारे लिए जरूरी भी है..। इतना ही नहीं यह जूस मोटापे में भी मददगार है। अब हम बात करेंगे..उन बीमारियों की जिन बीमारियों को यह रोकने में मदद करती है..।

जिसमें मुख्यरूप से कैंसर,  गठिया, शंकुआतीस, बवासीर, न्यरोजेनिक समस्याएं, गेस्ट्राइटिस आदि जैसे बीमारियोंं में यह जूस मददगार होता है..।


अगर आप भी चाहते है..इन बीमारियों से दूरी तो आप हमारे इस जूस को अपने उपयोग में ला सकते है..। या आपके भी इस रस की जरूरत है..। तो आप हमें संपर्क कर सकते है...। 



हमारा संपर्क नंबर है-  8708880112

हमारा e-mail id- cherrynbhatt65@gmail.com


                                               रिपोर्ट- चारू शर्मा



20 August 2017

* खतरे में भविष्य *

सुमन जांगड़ा


हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है,
ये आज की बात नही सदियो से दुनियां कहती है,
पर क्या गंगा पवित्र हुई इस कलयुगी संसार में, 
जहाँ कचरे का ढेर लग जाता है जल के निर्मल धार में।

भारत जैसे महान देश में हम -सब अपनी मनमानी कर रहे है ,
हम क्यों नही समझते की ऐसा कर खुद की हानि कर रहे है,
अपने सपनों की चाह में हम देश से खिलवाड़ करने पर लगे है,
जिस भारत पर गर्व है हमे उसको ही बदनाम करने पर लगे है।

भारतवासी हो तो भारत के प्रति अपना फर्ज निभाओ ,
  यहाँ होने वाले हर जुल्म को राजनिति का मोहरा मत बनाओ,
कुछ भी हो देश में तो सरकार पर थोप देते है अपना गम
ईमानदारी से बताओ भारतीयो क्या अपनी जगह सही है हम।

सही होते तो देश का ये हाल नही होता आज के युग में,
दस साल की मासुम माँ नही बनती इस घोर कलयुग में,
इंसान ने इंसानियत को गिराया है कमीनापन दिखाया है,
इसमे मासुम का क्या दोष सब अपराध का काला साया है।

अगर इस मासुम को इंसाफ नही मिला तो इंसानियत मर जायेगी,
बड़ी शर्म की बात है हम सब के लिए अगर ये बेटी बोझ बन जायेगी,
जागो भारतीयों समय आया है सर्वनाश होने से बचालो हिन्द को,
वरना ऐसे तो बेटियां न बचेंगी, न पढेगी , और न आगे बढ़ पाएंगी।

अगर देश को बर्बादी से बचाना है तो नारी जाती का सम्मान करो,
जितनी इज्जत अपनी माँ-बहनो की करते हो उतनी ही सबकी करो,
जिस दिन समाज का हर एक नागरिक जिम्मेदार हो जायेगा,
उस दिन सच्चे अर्थो में मेरा देश सोने की चिड़ियां बन जायेगा।
                         
                                                                                                       
                                                                                                                     सुमन जांगड़ा

18 August 2017

* चंचल मन *

नूतन शर्मा


चंचताता चल चपल मन की,
तरलता तरल नयन भर की।
श्रृंगार किए नव दुल्हन की,
मन में उमड़े अनेकों प्रश्नों की,
क्या होगा, कैसे होगा....।।

नव जीवन के नव संबंधों की,
आशाओं की, अभिलाषाओं की,
एक दिन में जीए कई पलों की,
भावनाओं की, अरमानों की,
नव जीवन में प्रवेश की कल्पना की,
परिंदों की, उड़ानों की,
चंचलता चल चपल मन की,
तरलता तरल नयन भर की......।

                             नूतन शर्मा

* स्त्रियों की सुरक्षा *


नूतन शर्मा


आज न्यूज़ में चंडीगढ़ की बलात्कार बच्ची के बारे देखा...कि एक 10 वर्ष की बच्ची ने एक बच्चे को जन्म दिया..। इस खब़र को सुनकर मन बहुत विचलित हो गया..। और सोचने को मजबूर हुआ कि उस 10 वर्षीय बच्ची का क्या कसूर था...। कि इस उम्र में उसे माँ बनना पड़ा...। जबकि उसकी खुद खेलने की उम्र थी..। सुप्रीम कोर्ट ने उसके गर्भपात की याचिका को खारिज कर दिया था..। क्योंकि  इससे उसकी जान को खतरा था...। अब सोचने की बात यह है कि एक 10 साल की बच्ची क्या एक नवजात बच्ची को संभाल पाएगी..। क्या यह समझ पाएगी कि उसके साथ क्या हुआ..? क्यों हुआ...? डरी सहमी उस नवजात के लिए भी कही न कही उसके मन में डर होगा..। इस पुरूषवादी समाज में क्या स्त्री सिर्फ एक देह मार्ग हैं..। 10 वर्ष की बच्ची अपनी गोद में एक बच्चे को लेकर कैसे जीएगी..? 

अपनी स्कूल जाने की उम्र में और खेलने की उम्र में एक बच्चे की जिम्मेदारी...। कैसी मनोदशा होगी उसकी..? क्या समाज उसे अपना पाएगा..? उम्र चाहे पांच साल हो या 25 साल हो या फिर 55 साल ही क्यों ना हो..। आज स्त्री कहीं भी सुरक्षित नहीं है..।  ऐ मेरे देश के ठेकेदारों अब तो जागो....? अब तो स्त्रियों की सुरक्षा के लिए कोई उचित कदम उठाओ...।

                                                              रिपोर्ट- नूतन शर्मा

17 August 2017

* माँ *


माँ एक एहसास है,
माँ मेरे पास है..।
माँ एक साया है,
माँ में ही सारी माया है।

माँ सोच है,
माँ सच है,
माँ शहनाई है,
माँ गूंज है..।

माँ अविकल है,
माँ मेरा आजकल है,
माँ अगर मौन है,
शून्य सारा कल है...।
                             कवियत्री- नूतन शर्मा

* जलमंच *


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हमारी आन है जलमंच ,
हमारी शान है जलमंच,
पानी की बर्बादी रोकना,
एक अभियान है जलमंच।

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सेमीनार के जरिये हम ,
लोगो को समझाते है,
जीवन में पानी का महत्व ,
उन सब को बतलाते है।

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जीवनदान है जलमंच,
शक्तिमान है जलमंच,
पानी की बर्बादी रोकना,
एक अभियान है जलमंच।

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टीम है इसकी बड़ी निराली,
सर्वश्रेष्ठ और हिम्मत वाली,
सबको मिलता मान सम्मान,
काम है सबका बड़ा महान।

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एक वरदान है जलमंच,
स्वाभिमान है जलमंच,
पानी की बर्बादी रोकना,
एक अभियान है जलमंच।

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एक दिन ऐसा आएगा,
जब जुनुन बन जायेगा,
जलमंच ये छोटा सा नाम,
दुनिया पर छा जायेगा।

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सबकी जान है जलमंच,
एक पहचान है जलमंच,
पानी की बर्बादी रोकना,
एक अभियान है जलमंच।

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                                                                 कवियत्री- सुमन जांगड़ा
                                                                  हरियाणा

गुरू


गुरूओं ने हमको ज्ञान दिया,
हमने ना उनको मान दिया..।
हम भूले भटके नादानों को,
गुरू ने एक नया मार्ग दिया..।।

ज्ञान दिया, ना हमें मान दिया,
जन-जन तक पैगाम दिया..।
माता-पिता का सम्मान करो,
उनका ना कभी अपमान करो..।


भगवान से बढ़कर है गुरु,
ज्ञान का है एक दीप गुरु..।
मार्ग दिखाने वाले गुरु को,
शत्-शत् प्रणाम करू...।।

                                        कवियत्री- गंगा जोशी 
                                                  अल्मोड़ा

# पुरुषों की दशा #

आज हम आपको कुछ अलग और कुछ रोचक बातों से वाकिफ़ कराने जा रहे हैं। जो आपने पहले कभी भी नहीं सुनी होगी। अक्सर हम बात करते है लड़कियों & महिलाओं की, जिन पर कई विद्वानों ने अपने-अपने विचार प्रकट किए हैं। जो कि अब एक सामान्य बात हो गई है...। आज हम जिस विषय पर बात कर रहे है, वह विषय कुछ खास है...। हम आज उन पुरुषों की बात करेगें, जो खुद परेशानियां सह कर अपने परिवार को खुश रखते हैं। अपनी परेशानी किसी को बताते भी नहीं हैं। मैं मानता हूं, महिलाएं मानसिक तौर पर उतनी मजबूत नहीं होती हैं, जितने पुरुष होते हैं। क्या कभी आपने सोचा जिन पुरुषों की आप बात कर रहे हैं। वो भी कभी कभार मानसिक रूप से दु:खी हो जाते है। आज भी हमारे देश में कई ऐसे इलाके है... जहां पुरुषों पर आर्थिक, मानसिक भेद-भाव होता रहता है।

जहां देश में एक तरफ आज भी लड़का पैदा होते ही खुशी की लहर दौड़ पड़ती है, तो वहीं देश के कई इलाके ऐसे है जहां पर आज भी लड़कों के साथ कुकर्म किए जाते हैं। लेकिन फिर भी वो बच्चे या लड़के सह लेते है। तो वहीं आजकल पुरुषों के साथ रेप जैसी घटनाएं भी सामने आ रही है। अगर आपको इन बातों में विश्वास नहीं हो रहा हो तो आप गूगल पर सर्च कर इन घटनाओं के बारे में विस्तार से जान या पढ़ सकते हैं। वैसे हमारे समाज में पुरुषों को बचपन से ही मजबूत माना जाता है। लेकिन हमारे समाज में सभी एक जैसे नहीं होते है। देश में कई ऐसे बच्चे भी है, जो अपने टीचर और अपने रिश्तेदारों के कुकर्मों के शिकार होते रहे हैं। ऐसी कई घटनाएं आए दिन सामने आती रही हैं। कई घटनाएं तो दब जाती है। जो देहात क्षेत्रों में होती है। लड़कों के साथ कुकर्म करना, या उनका शोषण करना आज एक चुनौती बनी हुई हैं। वहीं देश के कई स्टार बचपन में शोषण का शिकार हो चुके है..। इससे आप अंदाजा लगा सकते है..। इस विषय पर हमें व हमारे समाज को आगे आने कि जरूरत है..।  अगर ऐसा ही चलता रहा तो, वो दिन दूर नहीं जब देश में एक भूचाल आ जाएगा...। सरकार को इस विषय पर सर्वे कराने चाहिए..। एक कमेटी बनाकर इस पर शोध करना चाहिए...।   




                                      रिपोर्ट- दीपक कोहली


10 August 2017

साहित्यकार की सहित्य पहचान- 'विदुषी' शर्मा



जी हाँ...! हर साहित्यकार की अपनी एक पहचान होती है..। चाहे कलम की नोक से हो... या फिर शब्दों की रचना से..। हर साहित्यकार की एक अलग पहचान ही उसे अपने आप में अलग बनाती है..। वैसे होने को साहित्य में कई महान साहित्यकार पैदा हुए है...। लेकिन कुछ ऐसे भी साहित्यकार रहे हैं..। जिन्हें अपनी पहचान नहीं मिल पाई या नहीं मिल पाती है...। आज हम एक ऐसे साहित्यकार की बात करेंगे जिनका बचपन साहित्य की गलियों में बिता है। जी हाँ..! हम बात कर रहे है..। विदुषी शर्मा की..। जिसके परिवार में लगभग सभी लोग साहित्य से जुड़े हुए हैं। 

आइए जानते & पढ़ते है..। साहित्यकार विदुषी शर्मा और जयदीप पत्रिका के संपादक दीपक कोहली की खास बातचीत...। 

सवाल- आप एक साहित्यकार है..?  इस पर आपका क्या कहना है..?
जवाब- हाँ..! मैं एक साहित्यकार हूँ..। साहित्य के क्षेत्र में काम कर रही हूँ..और काम करना चाहती हूँ..। मैं युवाओं को साहित्य से जोड़ने के लिए प्रयास कर रही हूँ..। साहित्य ही हमारी पहचान है..साहित्य ही हमारी शान है...।


सवाल-  आज और पहले के साहित्य और शिक्षा में क्या अंतर है...?
जवाब- पहले की शिक्षा भावनात्मक होती थी..। लेकिन आज की शिक्षा महज एक शिक्षा है..। आज की शिक्षा में इंटरनेट का महत्व काफी बढ़ गया है..। जो पहले की शिक्षा में था ही नहीं..। पहले अध्यापक और शिष्य का सीधा सामना होता था..। वही आज अध्यापक की भूमिका मात्र बराबर रह गई है..। पहले अध्यापकों का मान-सम्मान हुआ करता था..। पर आज ऐसा बिल्कुल भी नहीं है...। पहले के साहित्य में हाव-भाव, भावनात्मक, रचनात्मक होती थी। आज का साहित्य काफी अगल और बदल गया है..।


सवाल- आपने हरियाणा के रोहतक से पढ़ा है..। आप हरियाणा के बारे में क्या विचार रखती है..? 
जवाब- हाँ..! मैंने हरियाणा के रोहतक से ही शिक्षा प्राप्त की है..। हरियाणा एक अच्छा प्रदेश है..। आज हरियाणा जिस तरह ऊंचाई छू रहा है..। वो काबिले तारीफ है..। मुझे गर्व है हरियाणा और आपने देश पर..।  

सवाल- क्या हरियाणा में लड़कियों को पढ़ने का मौक कम मिलता है..? इस पर आपके क्या विचार है..?
जवाब- हाँ..। पहले ऐसा था..। अब ऐसा नहीं है..। अब जागरूकता फैल रही है..। हमें सबसे पहले खुद को साबित करना होगा..। हमें दृढ़ सकल्प के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है..। साथ ही लगन और मेहनती होना भी जरूरी है..। पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती..। यह मेरा मानना है..। 


सवाल- आप पीएचडी होल्डर है..। इस पर आप क्या कहेंगे..? पीएचडी करने के लिए क्या-क्या बिंदु जरूरी है..। 
जवाब- हाँ..! मैंने पीएचडी की है..। मैं समाज के लिए काम करना चाहती हूँ..और करती रहूंगी..। वैसे किसी को कुछ ऐसे ही प्राप्त नहीं होता है..। उसके लिए कड़ी मेहनत और दृढ़ सकल्प होना बेहद ही जरूरी है..। मेरी यहां तक की सफलता में मेरे परिवार का एक अहम रोल रहा है..। 
पीएचडी कोई भी कर सकता है..। लेकिन उसे अच्छे विषय और कड़ी मेहनत करनी होगी..। आपको जो विषय अच्छा लगे आप उस पर पीएचडी कर सकते है..। पीएचडी करने के लिए कड़ी मेहनत और दृढ़ सकल्प होना बेहद जरूरी है..। पीएचडी करने के लिए आपके पास पोस्ट डिग्री होना जरूरी है। पीएचडी करने मेंं लगभग तीन साल चाहिए..। जिसमें सामान्यत: दो से तीन लाख फीस होती है..। 

सवाल- आप दिल्ली रहती है..। आप दिल्ली के बारे में क्या सोचते है..? 
जवाब- दिल्ली देश की राजधानी ही नहीं..देश का दिल है..। दिल्ली मेट्रो सिटी है..। जो हर समय चलती रहती है। दिल्ली भारतीय राजनेताओं का मुख्य केंद्र भी है..। दिल्ली से ही देश की राजनीति पर नजर रखी जाती है..।

सवाल- अगर आपको दिल्ली का सीएम बना दिया जाए तो आप सबसे पहले क्या करना पसंद करेंगे..।
जवाब- मैं ऐसा ख्वाब नहीं देखती...हूँ..। और ना ही मुझे बनना है..। ना मैं बनना चाहती हूँ..। हमें सबसे पहले जागरूकता फैलानी चाहिए..। जनता को हर चीजों के बारे में जानकारी आसानी से उपलब्ध करनी चाहिए..।   

सवाल- आजकल की युवा पीढ़ी पर आप क्या कहेंगे...?
जवाब- आजकल हर बच्चा परिवार के साथ नहीं रह पा रहा है..। क्योंकि आजकल के मां-बाप अपने बच्चों को समय नहीं दे पा रहे है..। जिसका मुख्य कारण है..। मां-बाप दोनों का नौकरी करना..। जिसके कारण आजकल के बच्चों में भावनात्मकता की कमी मिलती है..। हर बच्चा इंटरनेट की दुनिया में खोता जा रहा है या खोया है..।

सवाल- आज की नारी पर क्या कहेंगे..?
जवाब- आज की नारी खुद पर निर्भर है...। जो सब कुछ कर लेती है..। आज की नारी आत्म निर्भरता के साथ - साथ सब अपने - अपने में मस्त है..।

सवाल- आप एक कवियत्री भी है..। आपको कविता लिखने का शोक कहां से और कब से लिख रहे है..? 
जवाब- हाँ..! मैं एक कवियत्री भी हूँ..। हमारे परिवार में लगभग सभी लोग साहित्य और कविताओं से जुड़े हुए है..। यानि सब कविताएं लिखतें और पढ़ते है..। हमारे परिवार में पैतृक गुण है साहित्य, रचनाएं..। मैं कक्षा सात से कविताएं लिखती आ रही हूँ..। 

सवाल-  एक कवि होने के नाते आपको पता होगा एक कवि में क्या गुण होने चाहिए..?
जवाब- एक कवि में आत्मा, भावनात्मकता, दूसरों के प्रति प्रेम और ईश्वर के प्रति श्रद्धा और आस्था होना बेहद जरूरी है..। यह मेरा मानना है..।

सवाल-  आप देश के बारे में क्या कहना चाहेंगे..?
जवाब- जब से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनें है..। तब से मैंने देखा है देश के युवाओं में देश प्रेमी का भाव बढ़ा है...। हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी देश प्रेमी भाव के लिए पूरे देश में सबसे ताकतवार नेता के रूप में उभर कर  सामने आए है..।  

सवाल- आप जयदीप पत्रिका के माध्यम से देश के युवाओं को क्या संदेश देना चाहेगें...?
जवाब- सबसे पहले मैं जयदीप पत्रिका और उसके संपादक दीपक कोहली को धन्यवाद देना चाहूंगी..। जिन्होंने मुझे जयदीप पत्रिका के मंच पर आंमत्रित किया..। मैं देश के युवाओं और उनके परिजनों से एक ही बात कहूंगी..। आप भावनात्मक बनें और साहित्य को अपने जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान दें..। 


                                                                         रिपोर्ट- दीपक कोहली

08 August 2017

ऐ सरकार तुझे क्या हो रहा है..।


मेरे देश का लाल खो रहा है।
सरकार तुझे क्या हो रहा है।
देख इस माटी के रंगों 
में लहू बह रहा है..।
ऐ सरकार तुझे
क्या हो रहा है

एक एक करके देख यहाँ
हर लाल शहीद हो रहा है,
ऐ सरकार तुझे क्या हो रहा है।।

उसके भी बच्चे बिलख रहे
है,
उसकी भी पत्नी सिसक रही
है।
तू
क्यों तमाशा देख रहा है,
ऐ सरकार तुझे क्या हो रहा है


@अनिता पन्त अवस्थी

बेटियां...।



क्यों कहते हैं, लोग बेटियां बोझ होती हैं,
क्यों कहते हैं, लोग बेटियां बदनसीब होती हैं।

बड़ी अजीब है ना ये बेटियां..
दुख-सुख सब देखती है बेटियां..
दोनों घरों को संभालती है बेटियां..
अपने गमों को छिपाकर हंसती है।

दूसरों की खुशी के लिए सिर झुकाती है बेटियां,
पर फिर भी क्यों बोझ है...बेटियां..।।

इस धरती में आने से पहले ही,
क्यों उन्हें मार दिया जाता है...?
इस धरती में आने के बाद ,
क्यों उन्हें सताया जाता है...?

क्या इतनी बदनसीब है ये बेटियां..।
बड़ी अजीब है ना ये बेटियां...।

जब उम्र थी पढ़ने की, तो पढ़ाया नहीं,
जब लगन थी सीखने की, सीखाया नहीं।
नजर अटकी थी माता- पिता पे,
पर उन्होंने भी अपनाया नहीं..।

कितना कुछ सहती है बेटियां
फिर भी मुस्कराती है बेटियां।
दूसरों की खुशी के लिए...
शीश झुकाती है ये बेटियां...।

बड़ी अजीब है ना ये बेटियां...।


                                                                                       * कवियत्री- गंगा जोशी *

06 August 2017

* सच लिखता हूँ *




पाश  पर  भारी  गात यहाँ
फिर कैसे पाश की बात यहाँ
आये दिन दिखता बलात् यहाँ
जो पाश को देता मात यहाँ


न रोक यहाँ न टोक यहाँ
स्त्री बनी है जोक यहाँ
हम कैसे करें इन पर नाज सुनो
बुरे हालत इनके आज सुनो


गर नजरें नत हो वहाँ
दिखे मातृ शक्ति जहाँ
तो निश्चित ही मीत यहाँ
हो राखी की जीत यहाँ


लेकिन सुनता कहाँ कोई
इस राह को चुनता कहाँ कोई
बाँध के बन्धन जाते भूल
राखी हो या माला फूल


सुन्दर घटा सावन मास है
प्यार का यह पावन पाश है
गर ईमान से पाश का पालन हो
सम्भव है स्वच्छ धरा का दामन हो


बन चुकी नजरो की भी भाषा है
हर नजर की अलग परिभाषा है
जब तक संवेदनाओं को ये हताशा है
बावले तब तक राखी एक तमाशा है


                                                        रचनाकार- कवि बलवन्त बावला

05 August 2017

🎂 बहना की फरियाद 🎂


कवियत्री- सुमन जांगड़ा


हीरा है लाखों में एक पीतल वो कमजोर नही,
मेरे राजा भैया जैसा दुनियां में कोई और नहीं।
जमाने भर की खुशियां देना, हे ईश्वर मेरे भाई को,
एक बहना फरियाद करें, चुम कर उसकी कलाई को।।

🎂🎂🎂🎂🎂

मैंने मेरे भाई की आँखों में सपना देखा है,
पूरा कर देना प्रभु जो उसके हाथों की रेखा है।
रखना दूर विधाता उनसे उलझन और बुराई को,
एक बहना फरियाद करें, चुम कर उसकी कलाई को।।

🎂🎂🎂🎂🎂

बहन -भाई का प्यार हमेशा रहे सलामत दुनियां में,
रब का दुजा नाम है भाई सच कहे ये दुनियां में।
दुर हो चाहे कितनी बहना तो भी फ़िक्र है भाई को,
एक बहना फरियाद करे चुम कर उसकी कलाई को।।

🎂🎂🎂🎂🎂

रक्षाबंधन का त्यौहार साल में एक बार आता है,
कितनी भी हो मुसीबत लेकिन भाई भूल न पाता है,
मिट जाते है गिले-शिकवे भूले सभी लड़ाई को।

🎂🎂🎂🎂🎂


                                              *सुमन जांगड़ा*

* बचपन *



बचपन

लड़खड़ाते हुए क़दमों से चला जा रहा हूँ,
कभी गिरता-कभी उठता संभलता जा रहा हूँ।


खिल जाते है सबके चेहरे मेरी एक मुस्कान पर,

सारे गम मिट जाते है एक तुतलाती जुबान पर।


ख़ुशी आती है आँगन में जब-जब मस्ती में गा रहा हूँ,

  कभी गिरता कभी उठता सम्भलता जा रहा हूँ।


दादा-दादी का लाडला, नाना-नानी का अभिमान हूँ,

अंधेरे घर का दीपक मैं बड़ा ही उज्जवल नाम हूँ।


सबके दिलों में प्यार के दीये जला रहा हूँ,

कभी गिरता कभी सम्भलता जा रहा हूँ।


सब के जिगर का टुकड़ा मैं अपने परिवार में,

ऐसा मोती हूँ, जीवन में जैसे नौलखा हार में।


सबके गले में माला जैसे धागे में जुडवा रहा हूँ,

कभी गिरता कभी उठता सम्भलता जा रहा हूँ।


ऐसा मनमोहक चेहरा  जिस पर सब कुर्बान है,

सबका प्यारा सबसे न्यारा सबका यहीं विहान है,


रूकती नही हँसी जब मुँह में ऊँगली डलवा रहा हूँ,

कभी गिरता कभी उठता सम्भलता जा रहा हूँ।


पापा आपके जीवन में खुशहाली लेकर आया हूँ,

मम्मी क्या सोचती हो आपका ही तो साया हूँ।


आप दोनों का बचपन फिर से लहरा रहा हूँ,

कभी गिरता कभी उठता सम्भलता जा रहा हूँ।
                   
                                     
                                                           * सुमन जांगड़ा *