साहित्य चक्र

13 June 2021

मानव बुद्धि



मानव   बुद्धि   बड़ी  गजब ,
लोहा  मानते  उसका   सब ।

उसकी  ऐसी  ऊँची  छलांग ,
आसमान  भी   जाती  लाँघ ।

मनुष्य  जग मे करता है जो ,
बुद्धि का ही खेल है सब ओ ।

इतिहास या  भूगोल  की बात ,
ढूँडता   रहता   है   दिन-रात ।

पहुँचाया  है  मानव चाँद पर ,
विचरण नव  थल  जल  पर ।

विज्ञान  के  सब  आविष्कार ,
मानव बुद्धि का ही चमत्कार ।

राजनीति - भाषा   की   बात ,
खोजता  मिलकर   के  साथ ।

चित्रकला  कृषि  चाहे  खेल ,
इनसे   भी    करवाता   मेल ।

मानव  बुद्धि   का  ही   खेल ,
हवाई जहाज  हो   चाहे  रेल ।

धरती  के  भीतर है  खजाना ,
बुद्धि  से  मानव  ने  है  जाना ।

योनि  जो  हैं   चौरासी  लाख ,
इसीलिए  उनमें  इसकी धाक ।

सबसे   अधिक   संवेदनशील ,
तन - मन  में  काम की  जील ।

बुद्धि सभी चमत्कार दिखाती ,
ब्रह्माण्ड  का  ज्ञान   सिखाती ।

चिकित्सा  क्षेत्र के  सभी शोध ,
मानव   बुद्धी  करवाती   बोध ।

भूत   वर्तमान   और   भविष्य ,
बुद्धि  जानती   सबका  रहस्य ।

                  डॉ. सुरेन्द्र दत्त सेमल्टी

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