साहित्य चक्र

15 May 2021

उसे अपनों की फिक्र है




चिल्लाते चिल्लाते महक का गला सुख गया, माँ देवकी ने उसे सोफे पर बैठाया और उसे ही समझाने लगी, बेटा रहने दे जब तक हमारे घर मे कोरोना ना आ जाये और किसी की कोरोना से मौत ना हो जाये तब तक ये दोनों बाप बेटे हमारी बात नही मानेंगे। 

महक के पिता को ताश खेलने का बहुत शोख हैं अभी कोरोना काल में भी ना खाने की फिक्र ना सोने की फिक्र  किसी की कोई बात नही मानते और चले जाते हैं बाजार बहुत सारे लोगों के साथ ताश खेलने के लिए ।
 
दूसरी और महक का बड़ा भाई उदय शराब पीने की ऐसी आदत की शराब के लिए रातों घर से गायब रहता है... दोस्तो संग मस्ती और मजे उसे कोरोना के डर का एहसास नहीं होने देता ।

वही परिवार की संबसे समझदार सदस्य महक रोज रोज अपने पिता और भाई से घर से बाहर ना जाने के लिए झगड़ती रहती है लेकिन दोनों के काम जू भी नही रेंगती रोज महक और देवकी परेशान होकर सो जाते हैं ।

लेकिन अब गाँव मे हो रही कोरोना की मोतों से महक आज कुछ ज्यादा ही परेशानी में है लेकिन फिर भी अपने आप को संभालकर माँ के साथ खाना खाकर वो सो गयी । लेकिन आज उसे नींद कहां आ रही हैं क्यो की उसे तो अपनो की फिक्र हैं । 

अपने और अपने परिवार का ख्याल रखें, कुछ दिन घर में ही रहो और सुरक्षित रहो यही जिंदा रहने का हथियार हैं। 


                                                  ✍️ दीपक बारूपाल


 

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