साहित्य चक्र

31 July 2021

'निर्भय'




अब "कृष्ण" बचाने न आएंगे, 
तुम्हे खुद "काली" बनना पड़ेगा।

हथेलियो पर मेहंदी भी रचा लो, 
पर तलवार भी पकड़ना पड़ेगा।

जब 'राक्षसी' प्रवर्तिया बढ जाऐ, 
तुम्हें भी' चण्डी 'रूप धरना पडेगा।

मरने के बाद "निर्भया" मत बनो 
जीते जी 'निर्भय' बनना पड़ेगा।

अब कृष्ण बचाने न आएंगे 
तुम्हे खुद काली बनना पड़ेगा"।।


                                     विभा श्रीवास्तव


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