साहित्य चक्र

31 July 2021

कुछ इस तरह


हम बिखरगे
कुछ इस तरह
कि तुम संभाल भी न पाओगे।

हम टूटेंगे
कुछ इस तरह
तुम जोड़ भी न पाओगे।

हम लिखेंगे
कुछ इस तरह
कि तुम समझ भी न पाओगे।

हम सुनाएंगे दास्तां
कुछ इस तरह
कि तुम कुछ कह कर भी
न कह पाओगे।

हम जाएंगे इस जहां से
कुछ इस तरह
कि तुम्हारे बुलाने पर भी
कभी लौटकर न आएंगे।

                                             राजीव डोगरा 'विमल'


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