साहित्य चक्र

31 July 2021

शिवगीत




भोला मेरा अड़भंगी है
वो तो गौरा जी का ही संगी है
भोला मेरा अड़भंगी है
वो तो गौरा जी का ही संगी है


मौसम भी आ गया अब सावन का
भांग धतूरा  गंगाजल काँवर का
मौसम भी आ गया अब सावन का
भांग धतूरा  गंगाजल काँवर का
बाबा का करना श्रृंगार है
आने ही वाली वह बहार है

भोला मेरा अड़भंगी है
वो तो गौरा जी का ही संगी है
भोला मेरा अड़भंगी है
वो तो गौरा जी का ही संगी है


भोला अभिषेक को मन तरसा है
सावन में बरस रही अब बरसा है
भोला अभिषेक को मन तरसा है
सावन में बरस रही अब बरसा है
बाबाधाम जाने को मन बेकरार है
सावन में भक्तों की बहार है

भोला मेरा अड़भंगी है
वो तो गौरा जी का ही संगी है
भोला मेरा अड़भंगी है
वो तो गौरा जी का ही संगी है


सावन में जल हम चढ़ाएंगे
भोला बाबा को हम मनाएगे
सावन में जल हम चढ़ाएंगे
भोला बाबा को हम मनाएगे
भोले से जग को यह आधार है
यह तो भोला बाबा का प्यार है

भोला मेरा अड़भंगी है
वो तो गौरा जी का ही संगी है
भोला मेरा अड़भंगी है
वो तो गौरा जी का ही संगी है


                            डॉ कन्हैयालाल गुप्त किशन


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