साहित्य चक्र

14 February 2026

प्रेम उत्सव विशेषः लेखक कुणाल जी का पत्र पढ़िए




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सिमरन,

फिल वक्त वैलेंटाइन वीक चल रहा है। मुझे नहीं मालूम इसके क्या मायने हैं या यह कितना ख़ास है लेकिन बस इतना जानता हूं कि बीते 5-6 सालों में जिस तरह से हमारा रिश्ता परवान चढ़ा है, गुज़रते वक्त के साथ मैं तुम्हारे और भी करीब आता जा रहा हूं। मुझे अहसास है कि हमारे इस रिश्ते को सामाजिक तौर पर मान्यता कभी नहीं मिल सकती है, फिर भी तेरे इश्क़ के मामले में मैं कोई सही-गलत पर कभी कोई विचार ही नहीं करना चाहता हूं।

हमने एक-दूसरे को जिस तरह से इतने अरसे से दुनिया से छुपाकर भी प्यार का रिश्ता बरकरार रखा है, बेशक काफ़ी उतार-चढ़ाव भी आए, कभी अनबन भी ज़रूर हुई, लेकिन दिल में एक विश्वास मजबूती से कायम हुआ है कि जब तक सांसें चलेंगी तेरे-मेरे बीच कभी भी ब्रेकअप जैसा शब्द नहीं आएगा। मैं कभी भी लफ़्ज़ों में ज़ाहिर नहीं कर पाऊंगा कि मेरी ज़िंदगी में तेरी मौजूदगी के क्या मायने हैं, पर बस इतना कहूंगा कि कभी-कभार तेरी नाराजगी, अनबन के चलते तुमसे दूर होने की कल्पना भी मेरे दिल में दहशत पैदा कर देती है। उस दौरान मेरी दिनचर्या या यूं कहो कि मेरी दुनिया ही तहस-नहस हो जाती है। 

इसलिए मैं तुम्हारे बगैर की जिंदगी क्या होगी, कैसी होगी यह ना तो कभी सोचा हूं और ना सोचूंगा। ऐसे मौकों पर मैं इतना ज्यादा जिद्दी हूं कि जबतक तुम्हें फिर से अपनी अहसासों के क़ब्ज़े में न ले लूं मैं एक पल के लिए भी शांत नहीं रह सकता। एक बात का और जिक्र करना चाहूंगा कि मुझे मालूम है कि मेरी कुछ बुरी आदतों की वज़ह से तुम्हें ठेस पहुंची है, लेकिन मुझ पर विश्वास रखना कि मैं उन पर काम भी कर रहा हूं। देखना बहुत जल्दी मैं उनसे निजात पा लूंगा और तुम्हारी जैसी ख्वाहिश है, वैसे ही बन जाऊंगा। 

अंत में इतना कहना चाहूंगा कि इन 5-6 सालों में बेशक हम बहुत कम ही दफे एक-दूसरे के करीब रहकर वक्त गुजार पाए, लेकिन उन सारे लम्हों को न केवल भरपूर जिया हूं बल्कि उन्हें दिल में संजोकर बहुत सुरक्षित रखा हूं। मैं बार-बार वो लम्हें हासिल करना चाहता हूं, लेकिन फिर भी वक्त की नज़ाकत की वज़ह से हम मिल नहीं भी पाते हैं तो भी मैं कभी-कभी उन यादों को महसूस कर तुम्हें खुद में समेट लेता हूं और उन्हीं में खोकर तसल्ली कर लेता हूं। 

अभी भी वैसा ही दौर ज़रूर चल रहा है लेकिन मुझे यकीन है कि जल्द ही ये धुंध छंटेंगे और एक बार फिर से तुम मेरी बाहों में होगी। बाक़ी एक बार फिर इस वैलेंटाइन डे मैं तेरे क़दमों पर पेश-ए-खिदमत होकर गुज़ारिश करता हूं कि कभी भी अपने दामन से मुझे दूर न जाने देना मैं तो खैर जहन्नुम तक भी पीछा नहीं छोड़ने वाला। तू सिर्फ मेरी है मैं सिर्फ़ तुम्हारा...


- कुणाल


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