जीवन के पल-पल में बसते हो तुम,
मेरी उदासी में उदास और मेरी हंसी में हँसते हो तुम,
चूड़ी, बिंदिया, पायल तो
महज एक प्रदर्शन सा लगता है,
सच तो यह है कि जिंदगी के हर क्षण-क्षण में बसते हो तुम।
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प्रिय राजेश चंदेल जी,
सप्रेम चरण स्पर्श स्वीकार करें।
मैं अपने स्थान पर कुशल मंगल हूं तथा आशा करती हूं कि परमपिता परमात्मा की दया से आप भी कुशल मंगल होंगे जी। प्रिय मैं जानती हूं कि जितनी जरूरत मुझे आपकी है, उतनी ही जरूरत देश की सरहदों को आपकी है।
मुझे खुशी है कि आप अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं, किंतु अब बसंत आ गया है और सरसों में पीले-पीले फूल खिल गए हैं, तो मेरे मन में उदासी आना स्वाभाविक है। अतः अपनी विरह वेदना को शब्दों में बयां करना असंभव है, किंतु आप मेरे मन के प्रत्येक भाव को समझ लेते हैं।
मैं शरद रातों में छत पर जाकर तारों से भरे अंबर को देख कर खुश होती हूं क्योंकि मैं जानती हूं कि आप भी इन्हीं तारों की छाया में खुले आसमान के नीचे सरहद पर ड्यूटी दे रहे होते हैं। मैं इंतजार कर रही हूं फागुन का, जब आप आओगे, फूलों, झूलों, मेलों का वह मौसम मेरे साथ बिताओगे।
इस पत्र के माध्यम से एक मन की बात कहना चाहती हूं। एक डरपोक नाजुक सी गुड़िया थी मैं, आपने मुझे एक स्वाभिमानी नारी बनना सीखाया। नहीं जानती हूं किन शब्दों में धन्यवाद करूं आपका, जीवन के प्रत्येक अच्छे-बुरे पलों में सदैव मेरा साथ देने के लिए आपका धन्यवाद प्रिय...।
फरवरी माह के दूसरे सप्ताह को प्रेम उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस प्रेम प्रतीक सप्ताह की आपको ढेरों शुभकामनाएँ।
किसी गुलाब, टेडी, चॉकलेट या किसी महंगे आभूषण का लालच नहीं है मुझे, बस आपकी एक झलक, अमूल्य-अनमोल है मेरे लिए प्रिय। बाकी की बातें चांदनी रातों में इकट्ठे बैठकर करेंगे, जब आप सीमा पर से छुट्टी लेकर घर आओगे। आपके सुखमय जीवन की कामना करते हुए इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपकी सहधर्मिणी रचना अपनी बातों को विराम देती हूँ।
रचना चन्देल "माही"
जिला- बिलासपुर, हिप्र
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