साहित्य चक्र

11 April 2021

कल्पना की उड़ान



अरमान कल्पना की उड़ान, भरने का जोश रखना।
कहीं वजूद ई; न' खो जाए, बस इतना होश रखना।

यूँ तो लोग जन्म जात से ही, झूठ से नाता रखते हैं।
बस दूसरे को जताने के लिए, सच का दम भरते हैं।

मैं नहीं कहता कि बेईमान के लिए आक्रोश रखना।
कहीं वजूद ई; न' खो जाए, बस इतना होश रखना।

बेफिजूल; आक्रोश भी तो, नफ़रत को हवा देता है।
कभी-कभी ये; मुहब्बत भरे रिश्ते भी; तोड़ देता है।

रिश्ते की कद्र, हर कद्र' दिल में, संभाल कर रखना।
कहीं वजूद ई; न' खो जाए, बस इतना होश रखना।

संभाल कर; और संभल कर, ज़िन्दग़ी में चलना है।
गज़ल को; दिल में दफ़न करना, यूं कोई; हल न है।

                                                अमनदीप सिंह


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