साहित्य चक्र

26 April 2021

पीड़ा




जैसे छीन रहे हो मुझसे उन्हें
वैसे खुदा तुमसे
कोई अपना छीने तो
क्या तुम्हें दर्द नहीं होगा ?

जैसे जी रहा हूं मैं
तडफ़ तडफ़ उसके बिना
अगर तुम्हें भी जीना पड़े
किसी अपने के बिना तो ?

जैसे मुस्कुरा रहा हूं
छुपाए सीने में दर्द अपने
अगर तुमको भी जीना पड़े
किसी अपने के लिए दर्द में तो ?

जैसे मर रहा हूं हर पल
मैं उनके बिना
अगर तुम्हें नहीं जीना पड़े
हर पल किसी अपने के बिना तो ?

                                     राजीव डोगरा 'विमल'


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