साहित्य चक्र

07 March 2020

सरसी छन्द होली गीत




फागुन की छायी बहार है, सब मिल खेलो रंग ।
हर सू बिखरा रंग केसरी, मनवा हुआ मलंग ।

होली खेलें कुँवर कन्हाई, करें हास परिहास । 
चुपके से राधा रंग दीन्हि, श्याम रंग में खास ।
राधे बन मतवारी झूमें, सांवरिया के संग ।।

हर सू बिखरा रंग केसरी--------

धूम मची है  गाँव गली  में, रंगो  की  बौछार ।
पिचकारी ले नुक्कड़ नुक्कड़, मस्तों की भरमार।
सराबोर  सब आज  रंग में, मन  मे  भरे  उमंग ।

हर सू बिखरा रंग केसरी......

इंद्र धनुष के रंग गगन में, उड़े अबीर गुलाल ।
होली खेलो बन हमजोली, मन से मिटा मलाल ।
खतम करें हम चलो प्रेम से, नफरत की हर जंग ।

हर सू बिखरा रंग केसरी......

                                           रीना गोयल


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