साहित्य चक्र

27 March 2020

वनस्पति जीवन की धारा



विषैली वायु हर पल अब उपजे 
सघन वन प्रान्त जब से उजाड़े ।

रहे विपिन प्राणवायु के द्योतक
फिर भी कुल्हाड़ी चला दी इनपर।

रक्तिम कतरा लिए रो रहा बीहड़
अब न उजाडो रोक सब विनाश ।

तरुवर से है श्रृंगार हर  बीहड़ का 
जन जन पर बड़ा उपकार वनों का ।

जीवन की है सब आपूर्ति बीहड़ से 
करो न अब इनका विनाश जड़ से।

अंकित परोक्ष है ये अमिट इतिहास 
मिले जन-जन  को तरुवर से श्वास ।

उपजे वनस्पति  जीवन की धारा
गुण बीहड़ के हैं शतकोटि अपारा।

संजो रख दुर्लभ औषधि धरा पर
जनजीवन सब टिका है इन्हीं पर ।

                                              राज शर्मा 


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