साहित्य चक्र

21 August 2021

कविताः संविधान



ये मेरा संविधान है
ये शान है, ये वतन का सम्मान है
और यही मेरा अभिमान है
ये मेरा संविधान है।

ये क्षमता है, ये बंधुता है
और यही एकता है
ये हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई
सभी धर्मो को समेटता है
यही एकता की पहचान है
ये मेरा संविधान है।

कर्तव्य है, अधिकार है
ये हर धर्म, हर संस्कृति का अभिमान है
और यही अखंडता और निरपेक्षता का मान है
ये मेरा संविधान है।

ये आजा़दी का गहना है,ये न्याय का चेहरा है
ये पूरे भारतवर्ष का अभिमान है
और इसी से वतन महान है
ये मेरा संविधान है।


                                            डॉ.सारिका ठाकुर “जागृति”


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