साहित्य चक्र

08 August 2021

दर्द की सज़ा


हुआ न दर्द
मुझे भी हुआ करता था,
जब तुम बेमतलब
मुझे तकलीफ देते थे।

आए न आंखों में आंसू
मेरी आंखों में भी आते थे,
जब तुम बिना मेरे कुछ बोले
मुझे दर्द दिया करते थे।

टूटा न दिल
मेरा भी टूट जाता था,
जब तुम पास होकर भी
अनजान बन निकल जाते थे।

हुई न तकलीफ
मुझे भी हुआ करती थी,
जब तुम औरों के लिए
मुझे छोड़ चले जाते थे।

                         राजीव डोगरा 'विमल'



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