साहित्य चक्र

21 August 2021

खुशबू इसकी ऐसी जैसे महके चंदन


रक्षा बंधन हर वर्ष आता है
मन में उत्साह प्यार और उमंग लाता है
कितने भी दूर हो भाई बहन
दिल से उनको पास बुलाता है

ऐसे भी हैं इस जग में कई भाई
सुनी रहती है हर वर्ष जिन की कलाई
बहुत हैं बहने हमने ऐसी देखी
जो आज तक राखी नहीं बांध पाई

इस रिश्ते में प्यार ही प्यार है भरा
चंद धागों का नहीं है यह बन्धन
किस्मत वालों के होते हैं भाई बहिन
खुशबू इसकी ऐसी जैसे महके चंदन

भगवान ने बनाये होते हैं रिश्ते
हम तो केवल उन्हें निभाते हैं
कहीं ज़िन्दगी गुज़र जाती है निभाने में
कहीं यह बीच रास्ते में टूट जाते हैं

एक दूसरे के विश्वास और 
प्यार का प्रतीक हैं राखी
जरूरत पड़ने पर यह रिश्ता
बन जाता है एक दूसरे की बैशाखी

मिल जुल कर सब मनाते रहें रक्षा बंधन
अटूट रहे  यह बन्धन कभी न छूटे
झोलियाँ भर जाएं भाई बहिनों की खुशियों से
भाई बहिन के रिश्तों की यह डोर कभी न टूटे


                                                            रवींद्र कुमार शर्मा



No comments:

Post a Comment