साहित्य चक्र

27 January 2020

गणतंत्र दिवस यह आया है।

नव उल्लास,नव उमंग लिए
गणतंत्र दिवस यह आया है।
जय हिन्द-जय भारत का
घर-घर अलख जगाया है।
गणतंत्र दिवस यह आया है।


छब्बीस जनवरी का वह दिन सुनहरा
अपना संविधान सबने पाया था।
वर्षों की खोई आजादी
पूर्ण स्वराज हमने पाया था।
नव उमंग,नव उल्लास लिए
गणतंत्र दिवस यह आया है।


तिरंगा झंडा यह मेरा
सत्य की राह दिखाता है।
कैसे पाया अपना कानून
पल-पल याद दिलाता है।

शहीदों को न्योछावर देकर
मां बहनों की आंचल सुनी कर के
अपना संविधान हमने पाया था।
नव उत्साह ,नव उमंग लिए
गणतंत्र दिवस यह आया है।


जरा याद करो उन लम्हों को
उन वीरों,वीर शहीदों को
जिनसे गौरवान्वित है भारत सारा
उन शहीदों की कुर्बानी पर
श्रद्धा सुमन अर्पित है मेरा
श्रद्धा सुमन अर्पित है मेरा।


वो सुखद एतिहासिक क्षण हमारा था
बजा था गणतंत्र का डंका
लोकतंत्र का नारा था।
राष्ट्र गान की मंगल ध्वनि
सबके लबों पर छाया था।

नव उत्साह नव उमंग लिए
गणतंत्र दिवस यह आया है
गणतंत्र दिवस यह आया है।

                                         अभिलाषा मिश्रा आकांक्षा



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