साहित्य चक्र

07 March 2021

तारीख पर तारीख


है हर ओर भ्रष्टाचार, भला क्या कर लोगे 

तुम कुछ ईमानदार, भला क्या कर लोगे ?

 

दूध में मिला है पानी या पानी में मिला दूध

करके खूब सोच-विचार, भला क्या कर लोगे ?

  

ईमान की बात करना नासमझी मानते लोग 

सब बन बैठे समझदार, भला क्या कर लोगे ?  

 

विकास की नैया फंसी पड़ी स्वार्थ के भंवर में  

नामुमकिन है बेड़ा पार,भला क्या कर लोगे ?

 

इंसाफ के नाम पर बस तारीख पर तारीख 

है लंबा बहुत इंतजार, भला क्या कर लोगे ?

 

फोड़ लोगे  सर अपना मार-मार कर दीवारों पर 

चलो, छोड़ो, बैठो यार, भला क्या कर लोगे ?  


                                                                     डॉ. शैलेश शुक्ला


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