साहित्य चक्र

29 December 2019

मैं स्त्री

मैं (स्त्री) क्या हूँ


मैं काली दुर्गा सीता हूँ , मैं ही रामायण गीता हूँ I
मैं वीरो की भी गाथा हूँ , मैं ही भारत माता हूI
अश्वमेध का यज्ञ हूँ मै , यथा तथा सर्वज्ञ हूँ मैं I
संपूर्ण जगत की जननी हूँ , मैं तनया भार्या भगिनी हूँ I
मर्यादा और सम्मान हूँ मैं, दो परिवारों का अभिमान हूँ मैं I
मैं रानी लक्ष्मीबाई हूँ , वीरों को जानती माई हूँ I
मैं दुष्टों की संघारक हूँ , मैं पाल्यों की भी पालक हूँ I
मैं ही पहली अध्यापक हूँ , मैं सीमित भी हु व्यापक हूँ I
गंगा की बहती धारा हूँ , मैं रूप प्रकृति का प्यारा हूँ I
मैं सारे तीरथ धाम हूँ  , मैं सूर्य हूँ मै शाम हूँ I
मैं अलखनंद की ज्वाला हूँ , मैं हिम की पर्वतमाला हूँ I
मैं आदि अन्त आरम्भ हूँ , हर पृष्ठ का प्रारंभ हूँ I
मैं देवनागरी भाषा हूँ , मैं ग्रंथों की परिभाषा हूँ I
मैं लय ताल संगीत हूँ , मैं रति प्रेम के गीत हूँ I
इतिहासों का गुणगान हूँ मैं , खुद में विस्तृत नाम हूँ मैं I
मैं बिना बंधी से वेणी हूँ , मैं स्वमिर्भर एक गृहणी हूँ i
मैं ना अबला बेचारी हूँ , मैं एक अनेक पे भारी हूँ I
मैं काली दुर्गा सीता हूँ , मैं ही रामायण गीता हूँ I
मैं वीरो की भी गाथा हूँ , मैं ही भारत माता हूँ I
मैं ही भारत माता हूँ II

                                आंशिकी त्रिपाठी 'अंशी'

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