साहित्य चक्र

13 June 2020

संस्कृति सभ्यता

हमर सिंगार पहिनावा के सुध ल छोड़ देहे
कइसे दूसर के जिनिस ल अपनावथे
का होंगे ये जबाना ल ग मंगलू
संस्कृति सभ्यता सबे हर नदांवथे

नानुक मनखे घलो उचपुल बनथे 
गोड दु बीतता छोटे परथे काते 
गाय भईस कस खुर लगावथे
अतेक सुग्घर मुँहू म मिट्ठू बरोबर
लिबिस्टिक ल छप छप ले रंगावथे
मालिस करे बर तेल कम होथे
आनी बानी के किरिम पाऊडर ल लगावथे
का होंगे ये जबाना ल ग मंगलू......

बारह हाँथ के बम्बई लुगरा छुटगे
सलवार संगे म दुपट्टा छुटगे
अऊ छुटगे लहंगा संग चोली ह
हाँथ भर ककनी बनुरिया अईठी छुटगे
अरे ओन्हा बर बिखारी कंगाल होंगे 
देख तो फेसन में अब अम्मर झम्मर 
आनी बानी के चेन्द्रा कस ओरमाथे
का होंगे ये जबाना ल ग मंगलू......

घेंच म छपछप ले पहिने सुतिया ह
तन भर के जेवर मोटरी म बंधागे 
कनिहा जांग ले ओरमे चुंदी के फुंदरा ह
पोलखा में फिटिंग झूल धरागे
अब तो माईलोगन के खिनवा बाला ह
टुरा मन बर पुरखौती जेवर  कस जोंगाथे
का होगे ये जबना ल ग मंगलू.....  

छाती ठोक कहिथव रे मैहा
छत्तीसगढिया हव खा जाबे तै धोखा
दु मिंट म तोर जीन्स पहिरहव
पन्द्रा मिंट लेले अऊ धोती पहिर के देखा
लुहँगी गमछा ल पागा बाँधे बर भूलाथे 
अऊ फूल पैंठ ह पिररी ले टँगावथे
का होंगे ये जबाना लग मंगलू.......

                                        अजयशेखर नेताम 'नैऋत्य'


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