साहित्य चक्र

25 May 2019

अगर नाथूराम गोडसे देशभक्त था, तो महात्मा गांधी क्या थे ?


देश की जनता के लिए सोचने वाली बात यह है, अगर नाथूराम गोडसे देशभक्त है तो महात्मा गांधी को देश की जनता क्यों राष्ट्रपिता मानती हैं। क्या महात्मा गांधी सच्चे देश भक्त नहीं थे ? या फिर महात्मा गांधी अहिंसा के पुजारी थे ? आज देश की जनता के मन में कई सवाल खड़े हो रहे होंगे। जिनमें महात्मा गांधी का हत्यारा नाथूराम गोडसे को देशभक्ति की उपाधि से लेकर गांधी जी का अपमान, गांधी के राष्ट्रपिता की उपाधि पर भी प्रश्न खड़े होते हैं। जिस व्यक्ति ने भारत को अंग्रेजों से आजादी दिलाई आज उसी पर सवाल उठाएं जा रहे है। हर इंसान के अंदर अच्छाई-बुराई दोनों छिपी होती हैं, बस देखने का नजरिया होना चाहिए। महात्मा गांधी (भारत के राष्ट्रपिता) के हत्यारा नाथूराम गोडसे को कुछ लोग देशभक्त तो कुछ लोग देश का पहला आतंकी कहते हैं।





जिससे देश की जनता के मन में कई सवाल पैदा हो रहे हैं, जैसे- क्या महात्मा गांधी या देश के राष्ट्रपिता का हत्यारा कैसे देशभक्त हो सकता है ? अगर गांधी का हत्यारा देशभक्त था, तो महात्मा गांधी क्या थे ? क्या देश की आजादी में महात्मा गांधी का योगदान कुछ भी नहीं था ? अगर नहीं था तो देश की जनता उन्हें क्यों आज भी सबसे ज्यादा प्यार और सम्मान की दृष्टि से देखती है ?

कही ऐसा तो नहीं..! महात्मा गांधी के खिलाफ एक साजिश के तहत देश में बुराइयां फैलाई तो नहीं जा रही हैं। अगर ऐसा है तो भारत सरकार को इन शक्तियों पर रोक लगानी चाहिए। महात्मा गांधी भारत के राष्ट्रपिता के रूप में जाने जाते है। इस साजिश के तहत आज देश की गरिमा और अखंडता खत्म होने के कगार पर है।

जिसका जो मन आ रहा है, वह व्यक्ति देश के महापुरुषों के लिए कुछ भी बोला जा रहा है। जो देश को बांटने का काम कर रही हैं। हमारी सरकारों और राजनीतिक पार्टियों को इस बारे में सोचना होगा, आखिर देश के सभी महापुरुषों का देश की आजादी में समान योगदान रहा है। चाहे वह भगत सिंह हो या फिर चंद्रशेखर आजाद सभी का देश की स्वतंत्रता में समान योगदान रहा हैं।
ऐसे में हमें उन शक्तियों को समझना चाहिए जो देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। 

हमें सभी स्वतंत्रता सेनानियों को एक समान रूप से देखना चाहिए। देश का आजादी में हर देश वासी का अपने-अपने स्तर पर योगदान रहा हैं। हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहां सभी धर्मों को एक समान मान्यता प्राप्त हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए हमारे देश ने हमें एपीजे अब्दुल कलाम, स्वामी विवेकानंद जैसे कई महान पुरुष दिए है। जिन्होंने पूरे विश्व में भारत वर्ष का नाम ऊंचा किया है।  

                                                          संपादन-  दीपक कोहली



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