साहित्य चक्र

16 February 2022

कविताः आंख भर पानी





आंख भर पानी, गुजरी निशानी ।
शर्माे-हया अब, बीती कहानी ।।

हर तरफ है , भीड़ लेकिन ,
भर बाजार भी, हावी विरानी ।।

कद्र-कायदे, रीत रिवाजे ,
बदल गया है, हवा औ पानी ।।

मतलबी इस दौर में अब ,
हो गई है, दुनिया दुकानी ।।

अमन क्या थे, क्या हुए हम,
किस बात की, किसे हैरानी ।।


                              लेखकः मुकेश बोहरा अमन


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