साहित्य चक्र

24 April 2025

जवाब 'देह'ली किसकी है!

पहलगाम, जम्मू-कश्मीर में चार आतंकी आए और 26 निहत्थे लोगों को मार कर चले गए। इस बार के आतंकी हमले में कुछ नया देखने को मिला, जिसमें आतंकियों ने सिर्फ पुरुषों को अपना निशाना बनाया और नाम यानी धर्म पूछ कर निशाना बनाया। ऐसा बताया जा रहा है कि इस हमले में दो मुसलमान, एक विदेशी नागरिक और एक गैर हिंदू ईसाई भी मारा गया है।

भारतीय जनता पार्टी और उसके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर 'जाति नहीं, धर्म पूछा' नाम से कैंपेन चलाया है।‌ मगर कोई यह नहीं बोल रहा है कि यह हमला इंसानियत पर हुआ है। राजनीतिक से जुड़ा हर व्यक्ति इसमें अपना राजनीतिक स्वार्थ खोज रहा है। अगर सीधे शब्दों में बोलूं तो इस आतंकी हमले में मरने वालों की लाशों पर राजनीति हो रही है। यह सुनकर आपके मन में घृणा की भावना आ रही होगी, मगर क्या करें यह सत्य है।





सन् 2019 में पुलवामा आतंकी हमले में 40 से अधिक हमारे सेना के जवान शहीद हुए। मगर उस हमले की जांच अभी तक नहीं हो पाई। ऐसे में एक नागरिक होने के नाते मेरे मन में सवाल उठता है कि आखिर जांच अभी तक क्यों नहीं हो पायी और अगर जांच चल रही है तो कहां तक पहुंची है ? सरकार देश की सुरक्षा की जवाबदेही के नाम पर क्या कर रही है ?

राजनीतिक रोटियां लाशों पर नहीं सेंकी जानी चाहिए। आप किसी भी राजनीतिक पार्टी को समर्थन कीजिए, मगर देश की सुरक्षा के मुद्दे पर एक साथ एक मंच पर आइए और इस आतंकी घटना को किसी मज़हब, धर्म और जाति से मत जोड़िए। कभी भी कोई धर्म यह नहीं सिखाता कि आप निहत्थों पर गोलियां चलाओ और नाम पूछ कर गोलियां मार दो। कुछ दरिंदों और दुश्मन देश के आतंकवादियों के कारण देश में सामाजिक दूरियां यानी खाई पैदा मत कीजिए।

हमें यह नहीं भूलना चाहिए हमारे देश में डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान वैज्ञानिक पैदा हुए। जिन्होंने एक मुसलमान होने के बावजूद भी हमेशा देश को सबसे ऊपर रखा और भारत को परमाणु शक्ति दी है। समाज में नफरत फैलाना कुछ राजनीतिक शक्तियों को बढ़ावा दे सकता है। याद रखिए राजनेता किसी के नहीं होते हैं उनको सिर्फ अपने वोट बैंक से मतलब होता है। इस आतंकी हमले को हिंदू-मुस्लिम के नज़रिए से ना देख कर बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नज़रिए से देखना चाहिए।

यह पहला आतंकी हमला नहीं है इससे पहले भी हमारे देश में कई आतंकी हमले हुए हैं। हर हमले के बाद सोशल मीडिया और टीवी न्यूज़ चैनलों पर खूब बहस होती हैं और जब फिर दोबारा से ऐसे आतंकी हमले सामने आते हैं तो वही ढाक के तीन पात नजर आते हैं। आखिर कब तक और क्यों? इन हमलों की जवाबदेही कौन तय करेगा ? क्या देश की सुरक्षा भगवान भरोसे है ?





देश की सुरक्षा के जवाबदेही केंद्र सरकार की होती है। जिस तरह मुंबई हमले की जवाबदेही तत्कालीन सरकार की थी, ठीक उसी तरह पुलवामा और पहलगाम आतंकी हमले की जवाबदेही वर्तमान सरकार की है। हमारी इंटेलिजेंस क्या कर रही थी ? क्या यह इंटेलिजेंसी का फेलियर नहीं है ? क्या यह गृह मंत्रालय का फेलियर नहीं है ? क्या यह राष्ट्रीय सुरक्षा की लापरवाही नहीं है ? हमारी आईबी क्या कर रही थी ? इस वक्त कश्मीर में पर्यटन का सीजन है तो पर्यटकों की सुरक्षा में चूक कैसे हो गई ?

इस आतंकी हमले को हिंदू-मुस्लिम का चोला और रंग देने की कोशिश से बचिए। क्योंकि आतंकियों का यह भी साजिश हो सकती है कि भारत के मुसलमानों और हिंदुओं को आपस में लड़ाओ और भारत को गृह युद्ध में धकेल दो। हमें सोशल मीडिया पर आपसी भाईचारा और सामाजिक एकता और देश की अखंडता को ध्यान में रखना होगा। इस वक्त पूरा विश्व आर्थिकमंदी से जूझ रहा है। इसलिए देश में सांप्रदायिक माहौल बनाने वालों से बचिए, नहीं तो देश की आर्थिक रूप से कमर टूट जाएगी।




सरकार को अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को दूर रखते हुए देश का माहौल बेहतर बनाने के लिए सभी नागरिकों से आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील करनी चाहिए। सांप्रदायिकता देश का माहौल बिगड़ सकती है और कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक कर देश को गर्त में धकेल देंगे। आशा करता हूं कि आप देश का माहौल बेहतर बनाने में आपसी सहयोग करेंगे।


- दीपक कोहली 'मालुसरे'


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