साहित्य चक्र

18 September 2020

।। हिंदी दिवस ।।


सबसे अद्वितीय, सबसे निर्मल, 
सबसे अनुपम ,सबसे सरल
वह भाषा जो जोड़े है हम सबको, 
एक गलियारा, एक शहर 
एक राज्य और एक वतन।।

जिसके हर अक्षर ज्ञान से ,
नित नये शब्द रचे हमने ,  
उन शब्दों को पिरो माला में
बोलना,पढ़ना सीखा हमने।

यही वो भाषा है जिसमें माँ,
सुलाती थी लोरी गा कर ।

इसी भाषा में आवाज दे,
साथियों संग खेला करते थे गली-गली।

सोने,चांदी,हीरे,मोती
जैसी है अपनी भाषा ।

सबसे सरल, श्रेष्ठ और सुंदर,
मिश्री सा रस देने वाली,
विश्व पटल पर ,
देश का अभिमान है हिंदी।

संस्कृत और उर्दू की बहन है, 
ग्रन्थों का भंडार है हिंदी।

जिस राष्ट्र में रक्खो कदम तुम ,
पहचान तुम्हारी है ये हिंदी।

व्यक्त कर सको स्वतंत्रता से भाव और विचार अपने,
ऐसी अपनी भाषा है हिंदी ।

उठो,सोचो और समझो कि
कितनी जीवनदायिनी भाषा है हिंदी।

लो संकल्प आज हिंदी दिवस पर, 
सिर्फ आज ही नहीं अपितु हर दिन बनायेंगे अपना दिवस हिंदी।

                                               तनूजा पंत


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