साहित्य चक्र

13 September 2020

ताउम्र और के भरोसे


हर बात पे यूँ  हंगामा नहीं किया जाता
प्यास लगने पे समंदर नहीं पिया जाता

बात जिन्दगी की  है, सोचना पड़ता है
बेटियों का हाथ यूँ ही नहीं दिया जाता

भूख जब  पिघलाने लगती  हैं  हड्डियाँ
फिर बारिश का पानी नहीं पिया जाता 

बच्चे  जब करने लगे जिद्द  हर बात पे
तो उन को लाके चाँद नहीं दिया जाता

ज़ुल्म जब तक दूसरों पे हो , अच्छा है
जब खुद पे हो,  लब नहीं सिया जाता

अपनी  अदद  पहचान  भी  जरूरी  है
ताउम्र और के भरोसे नहीं जिया जाता

                                                 सलिल सरोज



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