साहित्य चक्र

29 August 2020

विधा -कुकुभ छन्द गीत





कोरोना से छिड़ी भयंकर,जंग जीत ही जायेंगे ।
अभी ज़रा विचलित हैं लेकिन,कब तक यूँ घबरायेंगे ।।

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मानवता के शुक्ष्म शत्रु का,छद्म रूप दिखलाना है ।
है सवार संकल्प शीश पर,अब पाषाण गलाना है ।
उग्र ज्वाल यदि हृदय भरेंगे, नष्ट तभी कर पाएंगे ।।
कोरोना से छिड़ी भयंकर........।

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रख कर  दूरी भीड़-भाड़ से, कहीं नहीं आएं जाएं ।
अभिवादन हो हाथ जोड़ कर,ना मिले न गले लगाएं।
अब सख्ती से अनुशासन के,नियम सभी अपनाएंगे ।।
कोरोना से छिड़ी भयंकर ......। 

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हमें बढ़ानी है  प्रतिरक्षा, नित्य  योग  व्यायाम  करेंगे ।
संक्रमण पर विजय प्राप्त कर,नहीं रुग्ण असमय मरेंगे ।
स्वच्छता को हथियार बना हम,भारत देश बचाएंगे ।।
कोरोना से छिड़ी भयंकर .......।

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सार समझ लो श्वास-श्वास का,बंद करो नित मनमानी ।
हां!बचाव में ही इलाज यह ,बात  समझ ले  हर प्राणी  ।
कब तक घेरेंगी विपदाएं,दिन यह भी टल जाएंगे ।।
कोरोना से छिड़ी भयंकर .......।

                           रीना गोयल

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