साहित्य चक्र

09 August 2020

सार ललित छन्द



हिदुस्तान हमारा प्यारा, जन जन का है नारा ।
भारत माँ के जयकारों से, गूंज रहा जग सारा ।
           
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छटा प्रकृति की अद्भुत बिखरी, अनुपम रूप घनेरे ।
ऋषियों, मुनियों, विद्वानों के, सदा रहे हैं डेरे ।

गंगा, जमुना ,सरस्वती की, बहती निर्मल धारा ।
भारत माँ के जयकारों से, गूंज रहा जग सारा ।।

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लाल किला है शान देश की, ध्वजा यहीं फहराते ।
चिह्न प्रेम का ताजमहल  है, सभी  देखने आते ।

वीर सपूतों ने इस भू पर, तन मन अपना वारा ।।
भारत माँ के जयकारों से, गूंज रहा जग सारा ।।

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नीलवर्ण परिधान पहन नभ,  करता करतब न्यारे ।
सागर में भी गहरे कितने , मोती बिखरे प्यारे ।।

सूरज निकले बाँह पसारे, करे दूर अँधियारा।।
भारत माँ के जयकारों से, गूंज रहा जग सारा ।।

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सुरभित,सुंदर पुष्प निराले, नई ताजगी देते ।
औषधियों से पूरित वन भी, कठिन रोग हर लेते ।

इस भारत माता पर अपना, अर्पण जीवन सारा ।।
भारत माँ के जयकारों से, गूंज रहा जग सारा ।।

                         रीना गोयल


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