साहित्य चक्र

21 July 2019

कण-कण इस माटी का...


 " निकिता "

सारी दुनिया जिस में समाई 
उस निकिता को प्रणाम हैं

कण-कण इस माटी का
अनुपम और ललाम है 

इश्क मोहब्बत में तेरे खातिर 
कितना ही लहूलुहान हुआ है 

हे-निकिता !तुम्हारे खातिर
महा भीषण -महासंग्राम हुआ

भारत की पावनतम माटी 
शत-शत तुझे प्रणाम है

गंगा -सिंधु चरण पखारे
जग मे ऊंचा नाम रहे 

कश्मीर हिमालय भी तुम्हारे 
छदम सौंदर्य का परिधान है 

हे-निकिता !तुझमें समाया 
ये अक्षरश :हिंदुस्तान है

सारा जहान तुझमें पलता 
तुझसे ही सजता और सवॅरता

तुमसे ही जीवन सबका 
तुमसे ही उद्धार है

कर्म- कर्तव्य भी तुझमें 
तुझसे ही इंसान है

ऐसी निकिता तुझको हम
करते है बारंबार प्रणाम
...................................

                                                      कुमार गिरीश 



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