साहित्य चक्र

20 June 2019

मधुर मिलन की आस

 " मधुर मिलन की आस "

नीर भरे नयनों से मैं ,
      प्रेमी प्रियतम को देखूँगी ।



अभिलाष कुंज की छाँव तले ,
     पुलकित क्षण , अपलक दृष्टि से
      अलौकिक छवि निहारूँगी ।


हृदय पटल पर शीश नवाकर ,
      मन दर्पण की वाणी से 
      विरह वेदना कह दूँगी ।


प्रेम ऋतु का आलिंगन भर ,
      उनके अधरों की तृष्णा को
       प्रीत सुधा से पी लूँगी ।


चरण कमल की पूजन कर ,
       पग चिन्हों की रोली से 
        सूनी माँग सँजो लूँगी ।


मधुर मिलन की बेला में ,
        रति पुष्पों को अर्पित कर 
         लाज के घूँघट खोलूँगी ।


परिणय सूत्र के गठबंधन से ,
         पावनता की ड़ोली में 
         आत्मिक समर्पण कर दूँगी ।


         मैं प्रेमी- प्रियतम को देखूँगी 
         मैं प्रेमी -प्रियतम को देखूँगी ।

                                                - आरीनिता पांचाल 

No comments:

Post a Comment