साहित्य चक्र

16 January 2026

बनना था विश्वगुरु, मगर बन गए विषगुरु!


भारत का इतिहास जितना पुराना है, उतनी ही पुराने इसकी विरासत, सभ्यता और संस्कृति है। एक समय हुआ करता था जब संपूर्ण विश्व भारत को विश्व गुरु या ज्ञान का मंदिर के रूप में देखा करता था। बाहरी आक्रांताओं के हमलों के कारण भारत लगातार अपना ज्ञान, धरोहर और विरासत को खोता गया।

1947 में हमारा देश आजाद हुआ, तब एक उम्मीद जगी थी कि भारत दोबारा से संपूर्ण विश्व में अपनी एक पहचान बनाएगा और अपनी विरासत को दोबारा से खड़ा करेगा। मगर हमारे राजनेताओं ने भारत को खोखला कर दिया। आज हम विश्व गुरु बनने की बात तो करते हैं मगर हमारे अधिकतर शहर विष का प्याला बन गए हैं।




शायद ही देश का कोई नागरिक होगा, जो मिलावटी खान-पान आदि से बचा होगा। आज भारत का हर नागरिक मिलावटी खाद्य पदार्थ से लेकर वस्तुओं का उपभोग कर रहा है। अभी हाल ही में देश के सबसे स्वच्छ माने जाने वाला शहर इंदौर में दूषित पानी से कई लोग मर गए। किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा। किसी को फर्क पड़ा तो सिर्फ मरने वालों के परिवार को। बाकी दो-चार दिन मीडिया और सोशल मीडिया पर लोगों ने चर्चा की उसके बाद चारों तरफ सन्नाटा है। इस सन्नाटे की जिम्मेदारी कोई नहीं लेना चाहता क्योंकि आज जिम्मेदारी लेने से हमारे राजनेता डरते हैं।

राजनेताओं द्वारा देश को विश्व गुरु बनाने का सपना देखना अच्छी बात है, मगर उस सपने को पूरा करना मील का पत्थर है। विश्व गुरु बनना असंभव तो नहीं है, मगर इस कार्य को करने के लिए जिम्मेदारी, दृढ़ संकल्प और कर्मठता की जरूरत है। वर्तमान में ये तीन चीजें मुझे देश के किसी भी राजनेता में नहीं दिखाई देती हैं।





देश की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। हमारे किसान आत्महत्या कर रही हैं और देश के नौजवान बेरोजगार घूम रहे हैं। महिलाएं के ऊपर हिंसा, रेप और उत्पीड़न जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। इतना ही नहीं बल्कि कई मामलों में तो हमारे राजनेता तक महिलाओं के साथ अत्याचार और उत्पीड़न करते हुए पकड़े गए हैं। और कुछ सालों से देश में जात-पात और धार्मिक हिंसाएं लगातार बढ़ रही हैं।

इन सब घटनाओं को देखकर मुझे विश्व गुरु बनने का लक्ष्य अभी कहीं खोता नजर नहीं आता है, बल्कि इन घटनाओं से इतना जरूर हो सकता है कि हमारे देश की हालत पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और ईरान जैसी हो सकती है। धार्मिक हिंसाएं किसी स्वस्थ राष्ट्र के लिए कैंसर का काम करती है। यह कैंसर किसी भी राष्ट्र को एक बार लग जाता है तो फिर कभी खत्म नहीं होता है, बल्कि वह राष्ट्र हमेशा के लिए उस कैंसर से ग्रस्त हो जाता है।




विश्व गुरु बनने के लिए हमें सबसे पहले अपने देश के नागरिकों को साफ पानी, स्वच्छ हवा और साफ पर्यावरण देना होगा। इसके बाद हमें अपने सभी नागरिकों के लिए समान शिक्षा, समान स्वास्थ्य व्यवस्था और समान अधिकार की रूपरेखा तैयार करनी होगी। देश को धार्मिक और जातीय हिंसाओं व टकरावों से बचना होगा।

सभी नागरिकों को साथ लेकर चलना होगा। आज भी हमारे देश में 10% नागरिकों के पास पूरे देश के संसाधनों का 90% हिस्सा है जबकि 90% नागरिकों के पास मात्र 10% संसाधन है। विश्व गुरु बनने का सपना देखना बहुत आसान है, मगर उस सपने को जमीनी हकीकत से पूरा करना एवरेस्ट की चढ़ाई चढ़ने के बराबर है।

हां! विश्व गुरु बनना असंभव नहीं है, क्योंकि हमारा देश भारत संसाधनों और प्राकृतिक स्रोतों से लबालब भरा है। बस हमें अपने संसाधनों का सही इस्तेमाल कर देश के हर नागरिक का जीवन बेहतर बनाना होगा और संपूर्ण विश्व को अपनी पहचान की शक्ति का एहसास करवाना होगा।


- दीपक कोहली


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