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शपथ है हिंदी की
शपथ है हिंदी में, हिंदी की
जो कुछ कहूॅंगा, सच्चे अंदाज़ में कहूॅंगा
मदिरापान करते हुए मेला लगाऊॅंगा
निषिद्धताओं पर भूरे-भूरे प्रवचन दूॅंगा
मनगढ़ंत कथाऍं गढूॅंगा, चाहे जितनी
झूठ और फ़रेब और कपट से छलछलाती
अजूबा हो जाऊॅंगा बेमतलब ही
चीज़ों के बदलूॅंगा नाम क्रमशः और पुनः
उत्तरोत्तर अफ़लातून कहलाऊॅंगा
कहूॅंगा बच्चों से बार-बार कहूॅंगा यही-यही
अपनी ज़ुबान, अपनी भाषा, अपने रौब में
बचाते हुए नज़रें, मातृभाषा में कहूॅंगा
सीखें बार-बार सीखें शपथ ले लें
अच्छी है हिंदी, सरल है, सच्ची है हिंदी
कमी है यही कि किसी काम की नहीं है
दो दुनिया में,दो रोटी, दो दाम की नहीं है
घर के घर में भी बदनाम ही रही है
बस पीटते रहो ढ़ोल, खोजते रहो पोल
और बोलते रहो मनमर्ज़ी के लंपट बोल
हिंदी इज़ ए वैरी फ़न्नी लेंग्वेज़
रद्दी भी अंग्रेज़ी की बिकती है महॅंगी
दोहराऊॅंगा, कमोबेश यही सब दोहराऊॅंगा
पादुकाऍं उठाई हैं, पादुकाऍं उठाऊॅंगा
यहाॅं-वहाॅं बनाऊॅंगा ख़ास वातावरण स्वैग
सर्कस हो जाऊॅंगा, जोकर कहलाऊॅंगा
शपथ है हिंदी में, हिंदी की।
- राजकुमार कुम्भज
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वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा और चुनौतियां
अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस हर साल 10 जनवरी को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हिंदी भाषा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है। यह दिन 1975 में नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिंदी हिंदी सम्मेलन की याद में मनाया जाता है, जिसने हिंदी को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हिंदी दुनिया की चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है, जिसमें लगभग 600 मिलियन लोग हिंदी बोलते हैं। यह न केवल भारत में, बल्कि नेपाल, मॉरीशस, फीजी, सूरीनाम और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में भी बोली जाती है।
हिंदी की चुनौतियां-
विविधता- हिंदी में कई बोलियां और उप-भाषाएं हैं, जो इसकी एकता को प्रभावित कर सकती हैं।
अंग्रेजी का प्रभाव- भारत में अंग्रेजी का प्रभाव हिंदी के उपयोग को कम कर सकता है।
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म- हिंदी को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर बढ़ावा देने के लिए अधिक प्रयास करने होंगे।
शिक्षा- हिंदी को शिक्षा के माध्यम के रूप में बढ़ावा देने के लिए अधिक प्रयास करने होंगे।
आर्थिक अवसर- हिंदी में रोजगार के अवसरों की कमी इसके विकास को प्रभावित कर सकती है ।
इन चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें हिंदी को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयास करने होंगे। हमें हिंदी में शिक्षा, मीडिया, और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अधिक ध्यान देना होगा।
- डॉ. जय महलवाल अनजान
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हिंदी भक्ति गीत
तेरा गुण क्या गाऊँ हिन्दी मां,
सारे जग में तेरा नाम है ,
तेरे साथ मेरी सुबह उगे,
तेरे संग ही मेरी शाम है I
तेरा गुण..
तेरा गुण क्या गाऊँ मां भारती,
सारा जग उतारे तेरी आरती,
करे भक्ति सदा तेरी निष्काम
तुझे कोटि कोटि प्रणाम है I
तेरा गुण...
तेरे नाम से देश हिन्द है
तू ही सबकी पसंद है
जो डाले तुझपै बुरी नजर
उसका काम तमाम है I
तेरा गुण...
तेरी सूरत भोली सरल है
मानो मरु में भी तरल है
इस सादगी से जो बेखबर
वो जीना तो निष्काम है।
तेरा गुण ...
तेरे गीतों में जो सुर ताल है
वो नादो-ब्रम्ह सा कमाल है
तेरे छन्द में वो आनंद है
जैसे मयकदे में जाम है।
तेरा गुण...
मेरी ज़िंदगी का तू अंग है
मेरी हर ख़ुशी तेरे संग है
तेरे बिना जो बीते लम्हें
वो लम्हें भी बे-नाम है।
तेरा गुण...
तेरे नाम से करे जो राजनीति
बड़ा धूर्त है वो या है जड़मति
क्यों है वो इतना भी बेखबर
वसुधैव कुटुम्बकम तेरा काम है।
तेरा गुण...
- डॉ. अनेक राम सांख्यान
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विश्व स्तर पर हिंदी
हिंदी भाषा न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। दुनिया भर में लगभग 60 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं,जो इसे विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा बनाती है ।नेपाल में हिंदी को दूसरी सबसे लोकप्रिय भाषा माना जाता है, और यहां के लोग हिंदी को सहजता से बोल और समझ लेते हैं जबकि मॉरीशस में हिंदी सिर्फ बोली ही नहीं जाती, बल्कि स्कूलों में पढ़ाई भी जाती है।
यहां की लगभग एक-तिहाई आबादी हिंदी बोलती है।फिजी में हिंदी को आधिकारिक भाषाओं में गिना जाता है, और यहां के लोग फिजियन हिंदी बोलते हैं।अमेरिका में लगभग 6 लाख लोग हिंदी बोलते हैं, जो इसे वहां की दूसरी सबसे लोकप्रिय भाषा बनाती । ब्रिटेन में भारतीय प्रवासियों ने हिंदी को जीवित रखा है, और यहां हिंदी फिल्मों, टीवी और साहित्य के जरिए हिंदी ने अपनी अलग जगह बनाई है।हालांकि यहां अधिकतर लोग अंग्रेज़ी बोलते हैं लेकिन भारत व आस पास के देशों से गये लोग हिंदी को अधिमान देते हैं।
कनाडा में हिंदी भाषियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, खासकर टोरंटो और वैंकवर जैसे बड़े शहरों में। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के काफी लोग रहते हैं, जो हिंदी में बात करते हैं।सिंगापुर में भी भारतीय मूल के काफी लोग रहते हैं, जो रोजमर्रा के काम के लिए हिंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं।
हिंदी की विश्व स्तर पर स्वीकार्यता बढ़ रही है।हिंदी के विश्व स्तर पर महत्व का पता इसी बात से चलता है कि इसे विश्व के 200 विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जा रहा है। हिंदी भाषा का भविष्य उज्ज्वल है, और यह विश्वभर में भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व कर रही है। यह अलग बात है कि भारत में राजनितिक विवशताओं के चलते हिंदी को वह स्थान नहीं मिला है जिसकी वह हकदार है।
- रवींद्र कुमार शर्मा
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हमारी हिन्दी
बोलो हिंदी, लिखो हिंदी,
पढ़ो हिंदी, सीखो हिंदी।
हिंदी को बनाएँ जन जन की भाषा,
हिंदी हमारी हो विश्व की भाषा।
ऐसा ही हमसब मिलकर करे प्रयास
हरेक जन को हिंदी का करायें अभ्यास।
घर में, समाज मे,राज्य मे हो हिंदी,
निज देश संग हरेक देश में प्रयोग हो हिंदी।
हरेक भाषा अपने मे है श्रेष्ठ
लेकिन हिंदी भाषा को बनाएँ सर्वश्रेष्ठ।
हमसबो की यही है अभिलाषा,
जन जन मे बनाएँ हिंदी को मातृभाषा।
हिंदी सीखने की कला को विकसित करे,
चलचित्र, नाटक धारावाहिक को प्रयोग करे।
विद्यालय, महाविद्यालय मे अनिवार्य हो हिंदी,
कार्यालयों, व्यापारों मे विस्तार हो हिदी।
हिंदी भाषा सीखाने हेतु हो प्रचार प्रसार,
हिंदी भाषा का फैलाव हो समस्त संसार।
बहुत ही सहज सरल भाषा है हिंदी,
किसी भी भाषा में समा जाती है हिंदी।
निज भाषा मे भी मिश्रण करे हिंदी,
बेहिचक सबो से बात करें हिंदी।
चुन्नू कवि का है सबो से आह्वान,
हिंदी भाषा के विस्तार मे दे ध्यान।
- चुन्नू साहा
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अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भाव, संस्कृति और चेतना का सेतु है। आधुनिक दौर में, जब तकनीक और वैश्वीकरण ने दुनिया को निकट लाया है, हिंदी की भूमिका और भी व्यापक हुई है। डिजिटल माध्यमों, सोशल मीडिया, सिनेमा और साहित्य के द्वारा हिंदी निरंतर विकसित हो रही है।
आज हिंदी ज्ञान-विज्ञान, व्यापार और संवाद की सशक्त भाषा बनकर उभरी है। आवश्यकता है कि हम इसके शुद्ध, सरल और सृजनात्मक प्रयोग को बढ़ावा दें, ताकि हिंदी विश्वपटल पर और अधिक प्रभावशाली स्वर बन सके।
- नरेंद्र मंघनानी
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हमारी हिन्दी
हमारी वाणी को विचारों में,
शब्दों में, समारोह में,
व्यक्त करने का आधार है हिन्दी!
हृदय में उत्पन्न अहसास को,
प्रेम को और विश्वास को,
जताने का एक द्वार है हिन्दी!
प्रकृति में बसे हर गीत को,
राग को, मधुर संगीत को,
सुनाने का सितार है हिन्दी!
गगन में फ़ैली तरंगिनी का,
स्वर का या ध्वनि का,
वास्तव में संसार है हिन्दी!
हमारा पावन राष्ट्र से,
बात से, स्वभाव से,
उमड़ता सच्चा प्यार है हिन्दी!
लिखने वाले ख़्वाबों में,
कविता में, किताबों में,
जीवन का उद्धार है हिन्दी!
बोलने वाली हर भाषा का,
संस्कृति का, अभिलाषा का,
एक प्यारा सा परिवार है हिन्दी।
- आनन्द कुमार
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हिन्दी की विश्व में चाल
स्वर व्यंजन के मेल से सजी हिन्दी की वर्णमाल,
वर्णमाला से जाने फिर सबके दिल का हाल।
हिन्दी तेरा जगत में रूप हो विशाल,
सारे जग में जले तेरे वैभव की मशाल।
तेरी मिठास से सब हो जाते निहाल,
अपनापन जो तुझमें है वो है बेमिसाल।
समेटे अपने अंदर तू प्रेम का सागर विशाल,
संवेदनाओं की लहरें मारे हिलोरें बेमिसाल।
विश्व पटल पर हिंदी का चमके भाल,
महके सुगंध तेरे रूप की साल दर साल।
मान तेरा बढ़ाएं हम,हिन्दी से मिलाएं ताल,
तब बहुर जायेगी हिन्दी की विश्व में चाल।
- राज कुमार कौंडल
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हमारी प्यारी हिंदी
हिंदी अपनी प्यारी भाषा,
हमको है इससे हर आशा।
भारत भर में जेष्ठ रहे यह,
भाषाओं में श्रेष्ठ रहे यह।
वर्ण हमारे बावन होते,
जैसे बूंद ये सावन होते।
वर्णमाल से जब हैं झड़ते,
शब्दों का आँगन हैं भरते।
पहले मन में हैं यह आते ,
पीछे बोल सभी हैं पाते ।
गुण इसके हम सब हैं गाते,
सबके मन को हैं यह भाते।
अर्थ हमें बतलाते हैं यह,
जन में भाव जगाते हैं यह।
वैचारिक विनिमय हैं करते।
और सहज मन को हैं करते।
हरदम इसके साथ रहेंगे,
इसका ऊँचा माथ करेंगे।
हर बोली से इसकी यारी,
भारत भर की है यह प्यारी।
अपने को वरदानित कर लें।
हिंदी को सम्मानित कर लें।
- प्रीतम कुमार पाठक
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विश्व हिंदी दिवस- 2026
आदिकाल से ही हिंदी भाषा विश्व में संवाद के रूप में प्रयोग की जा रही है धीरे-धीरे इसका वर्चस्व बढ़ता गया और आज विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। आज विश्व के लगभग 600 मिलियन लोग हिंदी को भाषा के रूप में प्रयोग कर रहे हैं।
हिंदी बोलने वाले विश्व के लगभग सभी महाद्वीपों में मिलते हैं। जिसका सबसे बड़ा कारण यह है कि विश्व के लगभग 132 देशों में भारतीय मूल के लोग बसे हैं और वे हिंदी को माध्यम बनाकर अपने कार्य का निष्पादन करते हैं। एशिया महाद्वीप में हिंदी ने अपना वर्चस्व बनाए रखा है और विश्व में एशिया की भाषा का प्रतिनिधित्व करती है।
हिंदी भाषा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसने कभी भी दूसरी भाषाओं का विरोध नहीं किया। करती भी कैसे क्योंकि यह विश्व की विभिन्न भाषाओं को खुद में समेटे हुए है। अगर शब्दकोश की बात करें तो हिंदी भाषा का शब्दकोश विश्व का सबसे बड़ा शब्दकोश भी है।
आज हिंदी की लोकप्रियता इतनी बढ़ चुकी है कि इंटरनेट ने भी हिंदी को स्वीकार कर लिया है और अधिकतर सूचनाएं हिंदी में ही उपलब्ध करवाई जा रही है जो कि एक गर्व की बात है।
आज विश्व के अनेक देशों में हिंदी के शिक्षा व प्रशिक्षण केंद्र खोले हैं जो कि हिंदी के प्रसार के जीते जागते उदाहरण है यहां तक कि अमेरिका में भी कई विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है।
हमें अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए इसके प्रचार प्रसार में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए और वो दिन भी अब दूर नहीं जब भारत विश्व गुरु बनेगा और जन जन तक हिंदी को पंहुचाएगा।
- विनोद वर्मा
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हिन्दी का प्रचार प्रसार करें हम और इसको गले लगाए,
बढ़ता जा रहा कुनबा इसका,देखो हिन्दी फूली न समाए।
जिसको कहीं जगह न मिले, खुशी से वह हिन्दी में आए,
अरबी फ़ारसी की बात ही क्या ?अंग्रेजी भी खप्प जाए।
लाख कोशिश करें बाहर निकलने की, तड़पती रह जाए,
कह कविराय सुन- सुन मीत मेरे, क्यों मीठी हिन्दीको बिसराय।
लख-लख बधाई हो विश्व हिन्दी दिवस की क्यों न गले लगाए ?
उन्नति हो निज भाषा की सदैव, प्रेरणा स्त्रोत बन जाए,
ज़्यादा से ज्यादा हो अनुप्रयोग इसका, हिन्दी मन को भाए।
बोलने में प्यारी लगे, देखने में न्यारी लगे, सभी पर भारी लगे,
हिन्दी है हिन्द की शान और लिपि देवनागरी है इसकी पहचान,
मात्र हिंदुस्तान में ही नहीं, विदेशों में भी है हिन्दी का मान।
कह कविराय सुन- सुन मीत मेरे, क्यों मीठी हिन्दी को बिसराय,
लख-लख बधाई हो विश्व हिन्दी दिवस की क्यों न गले लगाए ?
प्रगति हो हिन्दी की,आओ संकल्प लें, करें हिन्दी में काम,
विकसित भारत को छोड़ कर पूरे विश्व में हो हिन्दी का नाम।
जगमगाता रहे दीपक हिन्दी का,फैलता रहे अलौकिक प्रकाश,
नियम योजनाएं बने हिन्दी में,माकूल होता रहे सबका विकास।
हिन्दी तेरी पावन धरा पर ,सुखी रहें सभी,हो दुखियारा न कोय,
कह कविराय सुन- सुन मीत मेरे, क्यों मीठी हिन्दी को बिसराय।
लख-लख बधाई हो विश्व हिन्दी दिवस की क्यों न गले लगाए ?
- बाबू राम धीमान
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आओ उत्सव मनाएँ!
हिंदी दिवस मनाएँ!
संस्था प्रधान ने
चपरासी को बुलाया
उसे सूचना पंजिका थमाई
वो दौड़ा- दौड़ा कक्षाओं में गया
कक्षाध्यापकों ने सूचना सुनाई
सभी सभागार में पहुँचें
विद्वता से विभूषित मंच
बच्चे उत्सुकता से निहार रहे थे
सब मिलकर हिंदी दिवस मना रहे थे
हिंदी भाषा के गुणगान में
उसके सुनहरे इतिहास का
महिमा मंडन कर रहे थे
बच्चों ने भी प्रस्तुतियाँ दी ।
तालियाँ बजी, मिठाईयाँ बटी
विद्यार्थी टूटी फूटी अंग्रेजी में
खुसर-पुसर कर रहे थे
हमारा इंस्टीट्यूट तो
इंग्लिश मीडियम है!
हेड क्लर्क के
माथे पसीना छूट रहे
अंग्रेजी में आई मेल का
हिंदी में जवाब ढूँढ़ रहा
आओ उत्सव मनाएँ
हिंदी दिवस मनाएँ।
- जितेंद्र बोयल
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शब्दों की तलाश
यह कैसा युग है, कैसा समय,
जहाँ मन है ऑनलाइन, आत्मा मौन।
हाथों में स्क्रीन, आँखों में चमक,
पर भीतर सूना-भावनाहीन कोण।
भाव अब इमोजी में ढलने लगे,
संवाद सिमटकर पोस्ट हुए।
संस्कृति पीछे छूट गई,
रिश्ते बस डेटा होस्ट हुए।
पड़ोसी पास हैं, फिर भी दूर,
दोस्ती स्टेटस तक सीमित है।
चाय ठंडी, बातें अधूरी,
मानव ऊष्मा आज क्षीणित है।
सूचनाएँ हैं, पर सोच नहीं,
ज्ञान है- पर विवेक नहीं।
शब्द बहुत हैं, भाव नहीं,
भीड़ है- पर संवाद नहीं।
किताबें चुप हैं अलमारियों में,
धूल ने ओढ़ी है पहचान।
पन्नों में कैद कविताएँ पूछें-
क्या पढ़ना अब बोझ समान?
उपन्यास, कथा, निबंध, ग़ज़ल,
सब लिखे जाते हैं- पढ़े नहीं।
“समय नहीं है” कहकर हम
संवेदना से जुड़े धागे गढ़े नहीं।
साहित्य से मनुष्य
धीरे-धीरे निराश हो रहा है,
क्योंकि शब्दों की साधना छोड़
वह केवल दृश्य में खो रहा है।
आज हर कोई लेखक है,
पर पाठक दुर्लभ हो चला।
जहाँ सुनने का धैर्य न हो,
वहाँ साहित्य कैसे फला?
और एक प्रश्न
मन को बार-बार झकझोरता है-
जब अपने ही देश में
हिंदी बोलने में संकोच होता है।
जब अपनी भाषा
आधुनिकता की राह में
पुरानी समझी जाती है,
तो कैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर
उसकी पहचान बनाई जाती है?
जब अपने घर में
सम्मान नहीं, अपनापन नहीं,
तो बाहर दुनिया में
प्रतिष्ठा की अपेक्षा क्यों ?
आज अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस है,
यह उत्सव नहीं-आह्वान है।
हिंदी को जीने, पढ़ने, रचने का
यह अंतिम नहीं-प्रारंभिक स्थान है।
(संस्था के लिए केवल चार पंक्तियाँ)
फिर भी एक स्वर है जो थमता नहीं,
एक दीप है जो बुझता नहीं।
यह संस्था उसी आशा का नाम,
जो शब्दों को मरने देता नहीं।
क्योंकि भाषा
केवल बोलने से नहीं बचती,
वह पढ़ने, सुनने,
और संवेदना में रचने से बचती।
जब डिजिटल शोर थक जाएगा,
जब दिखावा मौन हो जाएगा,
तब साहित्य-
फिर से मनुष्य को
मनुष्य होना सिखाएगा।
- बीना सेमवाल
*****












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