साहित्य चक्र

25 January 2026

नेता जी सुभाष चंद्र बोस पर लिखी रचनाएँ पढ़िए





सुभाषचन्द्र बोस- पदावली


मां प्रभावती की गोद में
जन्मा एक सितारा था।
बोस जानकीनाथ की
आखों का वह तारा था।
पिता की इच्छा थी सुभाष
बैरिस्टर बनकर आये।
राष्ट्रप्रेम की भरी भावना
न बड़े - बड़े पद भाये।

चयन हुआ नौकरशाही में
थे उसमें अव्वल आये।
देश प्रेम के लिए बोस
परित्याग जिसे कर आये।
मारग में आये कंटक का निज
करि से जिसने शमन किया।
भारत माता की आजादी का
मिलकर फिर संकल्प लिया।

बन्धन मुक्त करेंगे मां को
ऐसी उनकी आशा थी।
देशभक्ति क्या ? होती है
दिखलाने की अभिलाषा थी।
युवा प्रेरणा लेकर उनके
पीछे - पीछे चल पड़े ।
आजाद हिंद का गठन हुआ
फिर बैरी के थे होश उड़े।

आजाद हिंद के जय हिंद वाला
नारा सिर चढ़ बोल गया ।
बोस के सम्मुख मानो सारा
ब्रिटिश मण्डल सा डोल गया।
अहसास हो गया था उनको
कि बोस नहीं ये मानेगा ।
दबा दिया यदि आज इसे
कल फिर से युद्ध ये ठानेगा ।

षड्यंत्र रचा उन दुष्टों ने
बोस को अगवा कर डाला।
कुछ घर के भेदी थे जिसने
षड्यंत्र यज्ञ में घृत डाला।
आजाद हिंद की आजादी में
बोस की महिमा भारी है।
सम्पूर्ण हिंद के हम सब जन
उस योद्धा के आभारी हैं।


- करन सिंह "करुण"


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संकल्प

खुद को मत कमजोर समझो
हां जीत धरा तुम जाओगे।
संकल्प करो गर राणा सा
जो चाह वो पा जाओगे।
उस हल्दीघाटी के रण में
राणा का पलड़ा भारी था।
चेतक के करतब .देख समूचा
जन जन भी आभारी था।

एक तरफ मानसिंह अकबर
ने डाला फौजी डेरा था।
भारी भरकम लश्कर से
चौतरफा से राणा घेरा था।
राणा को सुन चेतक ने
पदचाप की गति बढ़ाई थी।
व्यूह चीरकर चेतक ने
प्रताप की लाज बचायी थी।

जान बचाकर राणा की
चेतक ने धर्म निभाया था।
स्वामिभक्ति और निष्ठा का
एक प्यारा पाठ पढ़ाया था।
जो पाठ पढ़ाया चेतक ने
न कुछ भी मानव सीखा है।
छल प्रपंच में लिप्त नर से
ढोर सही में नीका है।

बतलाती है रेखा तुमको
त्याग यदि कर जाओगे।
इतिहास के स्वर्णिम अक्षर में
अंकित तुम हो जाओगे।
जब जब इतिहास लिखा
जायेगा तब तब आदर पाओगे
संकल्प करो गर राणा सा
जो चाह वो पा जाओगे।

- रेखा शर्मा



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बस तुम मुझे खून दो

समय की बाढ़ में सब बह जाया करते हैं।
प्रबल तूफान के आगे पर्वत झुक जाया करते हैं।
जहां कायर कदम-कदम पर चक्कर खाते हैं।
सच्चे वीर वहीं पर नया इतिहास बनाया करते हैं।

यह कविता नहीं इतिहास पुरुष की अनुपम कहानी है।
खून से लिखी इबारत है जय हिंद की अमर निशानी है।
वीर सुभाष,प्यारा सुभाष,नेता सुभाष धधकती ज्वाला था।
आजादी के अग्नि कुंड में आहुति अपने खून का चढ़ा डाला था।

जन्मना चक्रवर्ती था, त्यागी था, था अनुपम सन्यासी।
जिसकी गौरव गाथा युगों युगों तक गाएगा हर भारतवासी।
मुखविरों की गद्दारी से जिन्हे अंग्रेजों ने जेल में डाला था।
पर सुभाष नर नाहर था कब फंदे में फसने वाला था।

बांधे जाते इंसान यहां,कहां तूफान बांधे जाते हैं।
तन बंध जाए तो बंध जाए मन कहां बांधे जाते हैं।
मां का कर्ज उतारने खातिर मौका पाकर जेल से निकल गए।
शेर ए हिंद सुभाष वह पारा था अंग्रेजों की मुट्ठी में आकर फिसल गए।

छत्रपति शिवाजी ने जैसे मुगलों को छक्काया था।
वैसे ही सुभाष ने फिरंगियों को खून के आंसू रुलाया था।
वह कहां गए वह कहां रहे यह धूमिल अभी कहानी है।
आगे की सारी गौरव गाथा दुनिया ने आजाद हिंद फौज से जानी है।

जहां रण बाकुरों को ललकारा अगर तुम में है जोश जज्बा और जुनून।
तो आज अपने खून से लिख दो आजादी की खातिर नया मजमून।
आओ आज मिलकर सब खोओ सौगंध भारत मां की,
मैं तुम्हें आजादी दूंगा बस तुम मुझे दे दो अपना खून,
बस तुम मुझे दे दो अपना खून।


- राधेश विकास


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नेताजी की जयंती

नेताजी की जयंती को नमन है
बसे जो हमारे तन मन में हैं
भूले न भूलेंगे ये देश उन्हें
जो आजादी के मतलब सीखा गये हमें
देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्ति हेतु
वृहद भारत के थे वे एक सेतु
सबों के भीतर आजादी का बिगुल बजाया
बिखरे,उजड़े लोगों को मिलाया
देश ये हमारा है का दिया नारा
भगाओ गोरों को,
एक दूजे का बनकर सहारा
एकता बनाओ, शक्ति बढ़ाओ
हरेक घर से क्रान्ति का मशाल जलाओ
शांति नहीं अशांति फैलाओ
अहिंसा नहीं अब, हिंसा फैलाओ
हाथ जोड़ो नहीं, तोड़ो हाथ
जैसे भी हो, जो भी हो मिलाओ हाथ
लेकिन इन गोरे चमड़ी वालों को भगाओ
देश को इन सबों से आजादी दिलाओ
नेताजी ने सबों के भीतर भाव जगाने
आजादी को खड़े किये लाखों दीवाने
हर एक ओर से गूंजने लगा नारा
जयहिन्द के साथ दिल्ली चलो का लिया सहारा
आवाज़ नेताजी के सुनकर पूरे देशवासी
आजाद होने हेतु, कमर कसी
अब तो आजादी पाकर ही रहेंगे
भले इस हेतु खून क्यों न बहायेगे ?
ऐन वक्त पर नेताजी सुभाष चंद्र ने
आजाद हिन्द फौज लाए सबके सामने
बनाकर अपना एक सशक्त सेना
सबों से कहा- बातें मेरी ध्यान से सुनना
इस आजादी के क्रांति में, मैं साथ दूंगा
तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दिलाऊगा
बस, क्या था ? इस नारे ने ऐसी पकड़ी जोर
हम है खून देने का आवाज़ हुआ चारों ओर
सारे के सारे देशवासी हुए तैयार
आजादी तो हर हाल में चाहिए इसबार
अंततः सबके मेहनत रंग आने लगी
देश में आजादी के संकेत आने लगी
उसी वक्त कुछ अनसुलझी घटी घटना
नेताजी रहे या ना रहे से हुआ सामना
किसी ने आकस्मिक मौत मानी
तो किसी न रहस्यमयी बताई कहानी
वस्तुतः हमारे बीच नेताजी नहीं थे
जी सच में अब हमारे साथ नहीं ही थे
शौक की लहर में डुबा पूरा हिन्दुस्तान
खो दिया हमने एक सच्चे वीर जवान
आधिकारिक पुष्टि तो सब स्वीकारते है
लेकिन वास्तविक जानकारी भी तो हम चाहते है
कि वो घटना के बाद ही वो हुए लापता है
फिर कही देखा न देखा रहस्य पता है
आज 23 जनवरी को उनकी जयंती पर
देश उन्हें याद करता है सर झुकाकर
कि वृहद भारत को एक रूपता दिलाने वाले
एकलौता जवान थे,
सबके दिलों में राज करने वाले
पुनः दिल से नमन करता हूँ
नेताजी सुभाषचंद्र बोस को याद करता हूँ।


- चुन्नू साहा


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सुभाष को नमन

मेरी लेखनी का आज उनको प्रणाम,
देशप्रेम निभाया जिसने बिना थके, बिना विराम।
आज मैं उनको हृदय से याद करती हूँ,
जिन्हें सारा संसार सुभाष कहता है।
देशभक्ति का वो अद्भुत मतवाला,
मातृभूमि की रक्षा का सच्चा रखवाला।
सूझबूझ और कूटनीति से क्रांति जलाई,
युवाओं के मन में मशाल सदा जगाई।
इतिहास नया रच डाला था उसने,
अंग्रेजों की नींद उड़ा डाली थी।
आजादी की मजबूत नींव रखकर,
जन-जन में चेतना भर डाली थी।
आज जंजीरें टूटी हैं पर खतरा बाकी है,
अराजकता और आतंक अब भी साथी है।
आओ सुभाष के पथ पर हम चलें,
आजाद हिन्द की भावना फिर से बलें।
हे सुभाष, जन्मदिवस पर नमन स्वीकारो,
माँ भारती के दुख हरने फिर से पधारो।


- गरिमा लखनवी


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