संविधान के भाग
संविधान के भागों की मैं
गाथा तुम्हें सुनाता हूं।
किसका - किसमें वर्णन है
यह सहज तुम्हें बतलाता हूं।
पहले भाग में राज्यक्षेत्र और
संघ गया बतलाया है।
दूजे में वे नगर निवासी
कौन ? किधर से आया है।
भाग - 3 ने जन - जन को
उन्नति का अधिकार दिया।
भेद - भाव और छुआ - छूत
पर जमकर फिर प्रहार किया।
महिला दलित और पिछड़ों को
पढ़नें का अधिकार दिया।
शिल्पकार बाबा साहब ने
सबका है उद्धार किया।
भाग चार में नीति निदेशक
तत्वों का उल्लेख किया।
जनकल्याण नीति में विधि -
वेत्ताओं ने सहयोग किया।
जुड़ा 4 क भाग बाद में
मौलिक हैं कर्तव्य यहां।
करो आचरण विधि सम्मत
सबको सिखलाओ यहां- वहां।
भाग पांच में भारत संघ
का प्रशासन समझाया है।
षष्ठ भाग में संविधान के
राज्य का गया बताया है।
सप्त भाग में रियासतों का
किस्सा गया सुनाया था।
सन - 56 के संशोधन से
जिसको गया हटाया था।
भाग- 8 में संघ राज्य का
किया वर्णन गया अनोखा है।
राष्ट्रपति ने श्रम से अपने
सीधे इनको सींचा है।
भाग नौ में पंचायत और
नगर पालिका की चर्चा।
सहकारी समिति के इसी भाग
में लिखे मिले हमको पर्चा।
संविधान के दसवें भाग में
क्षेत्र है एससी एसटी का।
निर्भय हो सब रहें दलित
अवसान न हो निज बस्ती का।
कैसा है सम्बंध संघ का
राज्य ने हमें बताया है।
संविधान का भाग है ग्यारह
जिसमें गया लिखाया है।
वित्त और सम्पत्ति पर
वाद भाग बारह में है।
वाणिज्य, समागम, व्यापार का
जिक्र भाग तेरह में है।
भाग है चौदह सेवाओं का
और और न्याय अधिकरणों का।
पन्द्रह समर्पित निर्वाचन को
षोडश है कुछ वर्गों का।
सत्रह भाग विधि का देखो
भाषाएं बतलाता है।
भाग अट्ठारह संविधान का
आपातकाल समझाता है।
इधर-उधर के बचे हुए कुछ
नियम भाग नव दश में हैं।
संशोधन की शक्ति समेटे बीस
भाग अब वस में है।
इक्कीस में अस्थायी उपबंध
विशेष अनोखे हैं।
बाईस भाग में वे सब हैं जो
अन्य जगह से छूटे हैं।
इतना सब कुछ लिख पाने की
न हममें तनिक भी युक्ति है ।
सम्पादित हो लेख हमारा
मां वीणा पाणि की शक्ति है।
- करन सिंह करुण
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पूर्ण राज्य रा दर्जा अज्ज मिल्या था
मेरे छैल बांके प्रदेशा जो,रिज़ मैदाना ते,
वर्फ़ा रे पया करदे थे फाये आसमाना ते
भोले-भाले लोग मेरे प्रदेशा रे
खड़ूरे थे बिच वर्फा रे रिज़ मैदाना ते,
पूर्ण राज्य रा दर्जा अज्ज मिल्या था
मेरे छैल बांके प्रदेशा जो,रिज़ मैदाना ते...
बड़ी कुर्बानी दिती थी यशवन्त सिंह परमारे
छड्ढणा पया था सैशन जजा रा पद,
देश निकाला मिल्या था सिरमौर रियासता ते,
इच्छा थीं परमारा री, प्रदेशा री हो लग पच्छयाण
साकार हुय्या था सपना तिन्हा रा लोकों,
तांज़े इन्दिरा गांधीये घोषणा किती थी रिज़ मैदाना ते,
पूर्ण राज्य रा दर्जा अज्ज मिल्या था
मेरे छैल बांके प्रदेशा जो,रिज़ मैदाना ते...
अंग्रेजा रा बी दिल था म्हारा छैल बांका शिमला
हरे-भरे थे एथी चिल्ला होर दयारा रे दरख़्त
ठंडी-ठंडी चलदी थी हवा एथी प्यारी-प्यारी,
मिटी जांदी थी थकान सारी,तांज़े गीत गांदी थी बिमला,
पहाड़ी ए आसे माहणु ,लग ए रीति रिवाज म्हारे
चावा कन्ने मनान्दे तीज त्यौहार,देखा नाटी पांदे सारे,
पूर्ण राज्यत्व रा त्याड़ा, सभी जो हो बधाई
बरकत मिलो टब्बरा जो,सारे सुखी रहो मेरे भाई,
"धीमान" कितनी खुशियां री गल्ल थीं त्याड़े
तांज़े इन्दिरा गांधीये घोषणा किती थी रिज़ मैदाना ते,
पूर्ण राज्य रा दर्जा अज्ज मिल्या था
मेरे छैल बांके प्रदेशा जो, रिज़ मैदाना ते...
- बाबू राम धीमान
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गणतंत्र की सालगिरह
छब्बीस जनवरी आई है,
कितनी खुशियाँ लाई है,
सालगिरह गणतंत्र की हम मनायेंगे,
देश भक्ति के रंग में रंग तराने गुनगुनायेंगे,
उत्सव पूरे देश में होगा, अलग होगी राजपथ की छटा,
देशी- विदेशी मेहमानों से होगा राजपथ अटा,
तिरंगे के रंगों में लिपटे बच्चे शोभा बढ़ाते हैं,
बहादुरी को अंजाम देने वाले सम्मान यहाँ पर पाते हैं,
लगता जैसे देश है सारा आज यहाँ पर सिमटा,
झलक हर संस्कृति की मिलती, देख सुकून है मिलता,
सीमाओं के प्रहरी करते अपनी ताकत का प्रदर्शन,
सीना चौड़ा हो जाता, रोमांचित हो जाता तन-मन,
सरपट विकास की राह पर पर देश हो रहा अग्रसर,
हर सालगिरह ये बताती, बढ़ता चल ,बिन आराम कर,
कदम ,कदम से मिलाकर सैनिक जब बढ़ते आगे,
सीमा छोड़ दुस्साहसी दुश्मन दबे पांव भाग जाते,
जज्वा इनका देख नव उर्जा होती संचारित,
नवीन कुछ कर जायें, पाते अजब सी ताकत,
हाथी ,घोड़े और जवान होकर लयबद्ध जब आते,
सभी कोने पंडाल के करतल ध्वनी से गुंजायमान हो जाते,
देश भक्ति की धुन बजाता, सेना का बैंड जब आता,
रोम-रोम हमारा देश पर कुर्बान होने को तत्पर हो जाता,
शहीदों की याद से हर आँख हो जाती नम,
खुद व् खुद सर झुक जाते करते उन्हें नमन,
धरती पर तो उत्सव है होता, आसमां में भी होता खूब नजारा,
हर आँख टक-टकी देखे, कितना सुन्दर गणतंत्र हमारा,
सीना नभ का चीरते आते जब वायु सेना के यान,
हर कोई रह जाता देखता, हमारी आन,वान और शान,
तीन रंगों का धुआं छोड़ते जब आगे बढ़ते जहाज,
ऐलान करते कुछ ऐसे, नहीं शानी तिरंगे का कोई आज,
नजर जिधर भी जाती, हर ओर केसरिया, सफ़ेद और हरा है पाती,
खुद स्रष्टा भी देख तमाशा, सुध-बुद्ध अपनी खो जाती,
हर झांकी लाती हर राज्य की संस्कृति का सन्देश,
अलग-अलग हम राज्य जरूर हैं ,मगर देश हमारा एक,
भान्त-भान्त के प्रान्त-प्रान्त के गाने बच्चे जब गाते,
सब कुछ भूल भाल के हम मन मगन हो जाते,
राष्ट्रगीत की धुन बजाई जब जाती,
गौरवान्वित करती संग सावधान रहना सिखाती,
लाल किले की प्राचीर पर लहराता तिरंगा,
दूर बहती धाराओं में यमुना और गंगा,
कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से मणिपुर तक,
हर कोई एक ही रंग में है रंगा,
जश्न-ए-गणतन्त्र पर हमें शपथ आज है लेनी,
शान बचाने को इसकी हर कुर्बानी है देनी,
गणतंत्र की सालगिरह हो सबको मुबारक,
मेहनत कश बन हम सबको लिखनी है विकास की इबारत।
- धरम चंद धीमान
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गणतंत्र दिवस
2026 का फिर गणतंत्र दिवस आया है,
देश संग खुशी से झूमने का मौका आया है।
आज के दिन भारत ने संविधान को पाया है,
पूर्ण स्वराज्य का स्वप्न इस दिन पूरा हो पाया है।
हिंद के नभ में आज फिर तिरंगा लहराया है,
कितने वीरों ने इस तिरंगे का मान बढ़ाया है।
कर्तव्यपथ पर तीनों सेनाओं ने जोश दिखाया है,
युवा बच्चों ने उनसे कदम से कदम मिलाया है।
देश का मान कितने वीरों ने जान देकर बढ़ाया है
जयहिंद वंदे मातरम के गान से गगन गुंजाया है।
रंग बिरंगी झांकियों ने सबका मन बहलाया है,
ऐसे लगा सारा भारत कर्तव्यपथ पर आया है।
नभ में विमानों ने रंगो से तिरंगे को फहराया है,
देख गर्व से हर भारतवासी का मन हर्षाया है।
इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया है,
इस को अपना ही भारत लोकतंत्र बन पाया है।
- राज कुमार कौंडल
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कर्तव्य पथ
आओ गणतंत्र दिवस मनाएं
आओ गणतंत्र दिवस मनाएं, मनाए बड़ी धूमधाम से,
देश के वीरों की विजय गाथा गाएं,गाएं बड़ी शान से।
आओ गणतंत्र दिवस मनाएं, मनाए बड़ी धूमधाम से,
खूब सजा होता है आज के दिन दिल्ली में राजपथ,
बड़ी शान से गुजरते हैं,
यहां गणतंत्र दिवस पर झांकियों के रथ।
कर्तव्य पथ पर गुजरती है गणतंत्र दिवस परेड,
हर भारतवासी देखता है कि हमारा देश हुआ है कितना अप टू डेट।
हर वर्ष 26 जनवरी को मनाते हम गणतंत्र दिवस, हुआ राष्ट्र महान,
इसी दिन लागू हुआ था हमारे प्यारे भारत वर्ष का संविधान।
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने किया था यह अविस्मरणीय काम,
चल रहा इसी अनुसार पग पग पर पूरा हिंदुस्तान।
कर्तव्य पथ पर फहराते राष्ट्रपति तिरंगा झंडा प्यारा,
सारी परेड की सलामी लेते, लगता हर सैनिक दुलारा।
तरह-तरह की झांकियां निकाली जाती, हो जाते सब प्रसन्न,
जांबाज हमारे यूं करतब दिखाते , रह जाते सब सन्न।
आइए अपना झंडा कुछ ऐसे फहरायें,
अपने देश को विश्व में सबसे आगे ले जाएं।
ना रहे कोई भूखा नंगा, ना हो कोई बेरोजगार,
देश की प्रगति में हर हाल में साथ देंगे हम,
आओ करें यह उद्गार।
आओ गणतंत्र दिवस मनाएं, मनाए बड़ी धूमधाम से,
देश के वीरों की विजय गाथा गाएं,गाएं बड़ी शान से।
आओ गणतंत्र दिवस मनाएं
आओ गणतंत्र दिवस मनाएं, मनाए बड़ी धूमधाम से,
देश के वीरों की विजय गाथा गाएं,गाएं बड़ी शान से।
आओ गणतंत्र दिवस मनाएं, मनाए बड़ी धूमधाम से,
खूब सजा होता है आज के दिन दिल्ली में राजपथ,
बड़ी शान से गुजरते हैं,
यहां गणतंत्र दिवस पर झांकियों के रथ।
कर्तव्य पथ पर गुजरती है गणतंत्र दिवस परेड,
हर भारतवासी देखता है कि हमारा देश हुआ है कितना अप टू डेट।
हर वर्ष 26 जनवरी को मनाते हम गणतंत्र दिवस, हुआ राष्ट्र महान,
इसी दिन लागू हुआ था हमारे प्यारे भारत वर्ष का संविधान।
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने किया था यह अविस्मरणीय काम,
चल रहा इसी अनुसार पग पग पर पूरा हिंदुस्तान।
कर्तव्य पथ पर फहराते राष्ट्रपति तिरंगा झंडा प्यारा,
सारी परेड की सलामी लेते, लगता हर सैनिक दुलारा।
तरह-तरह की झांकियां निकाली जाती, हो जाते सब प्रसन्न,
जांबाज हमारे यूं करतब दिखाते , रह जाते सब सन्न।
आइए अपना झंडा कुछ ऐसे फहरायें,
अपने देश को विश्व में सबसे आगे ले जाएं।
ना रहे कोई भूखा नंगा, ना हो कोई बेरोजगार,
देश की प्रगति में हर हाल में साथ देंगे हम,
आओ करें यह उद्गार।
आओ गणतंत्र दिवस मनाएं, मनाए बड़ी धूमधाम से,
देश के वीरों की विजय गाथा गाएं,गाएं बड़ी शान से।
- कै. डॉ. जय महलवाल
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मैं हूं मतदाता
देश का भाग्य विधाता
सत्ता से
सवाल करता हूं
तभी तो
लोकतंत्र बचाता हूं
मेरा वोट,मेरी ताक़त
बदल देता हूं
ताज ओर तख्त
जाति, धर्म, लिंग, वर्ण,
क्षेत्र, संप्रदाय से
ऊपर उठकर
सत्य के पक्ष में
करता हूं मतदान
बनाता हूं देश महान
सुनता हूं सब की
करता हूं मन की
दूरदृष्टी रखता हूं
मद,लोभ,लालच से
विरत रहता हूं
प्रत्याशी के मन में
अगर हों खोट
करता हूं
वोट की चोट
मैं मतदाता हूं
मतदान करना कब
चूकता हूं
सजग मतदाता
शत प्रतिशत मतदान
तब लोकतंत्र महान
देश का भाग्य विधाता
सत्ता से
सवाल करता हूं
तभी तो
लोकतंत्र बचाता हूं
मेरा वोट,मेरी ताक़त
बदल देता हूं
ताज ओर तख्त
जाति, धर्म, लिंग, वर्ण,
क्षेत्र, संप्रदाय से
ऊपर उठकर
सत्य के पक्ष में
करता हूं मतदान
बनाता हूं देश महान
सुनता हूं सब की
करता हूं मन की
दूरदृष्टी रखता हूं
मद,लोभ,लालच से
विरत रहता हूं
प्रत्याशी के मन में
अगर हों खोट
करता हूं
वोट की चोट
मैं मतदाता हूं
मतदान करना कब
चूकता हूं
सजग मतदाता
शत प्रतिशत मतदान
तब लोकतंत्र महान
- जितेंद्र बोयल
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गणतंत्र दिवस आया।
सभी भारतवासियों का उर हर्षाया,
तिरंगे ने हम सबको लुभाया।
भारत माता की जय हो,
गणतंत्र दिवस की जय हो,
आज के दिन संविधान लागू हुआ,
जिसके अनुसार भारत देश में,
शासन व्यवस्था आरंभ हुआ,
भारत एक गणतंत्र लोकतंत्र देश हुआ।
बिना भेदभाव के भारत के नागरिकों को,
एक समान अधिकार-कर्तव्य प्राप्त हुआ।
गणतंत्र दिवस का पर्व हम मानाएंगे,
भारत देश में तिरंगा झंडा फहराएंगे,
गली, मोहल्ले, शासकीय कार्यालयों,
पाठशालाओं, घर-घर तिरंगा ध्वज लहराएंगे।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,झंडा ऊंचा रहे हमारा,
राष्ट्रगान जन-गण-मन गाएंगे,जयहिंद,जयहिंद,
बोलेंगे, भारत माता की जय हो का जयघोष करेंगे,
वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत गाएंगे।
सभी भारतवासियों का उर हर्षाया,
तिरंगे ने हम सबको लुभाया।
भारत माता की जय हो,
गणतंत्र दिवस की जय हो,
आज के दिन संविधान लागू हुआ,
जिसके अनुसार भारत देश में,
शासन व्यवस्था आरंभ हुआ,
भारत एक गणतंत्र लोकतंत्र देश हुआ।
बिना भेदभाव के भारत के नागरिकों को,
एक समान अधिकार-कर्तव्य प्राप्त हुआ।
गणतंत्र दिवस का पर्व हम मानाएंगे,
भारत देश में तिरंगा झंडा फहराएंगे,
गली, मोहल्ले, शासकीय कार्यालयों,
पाठशालाओं, घर-घर तिरंगा ध्वज लहराएंगे।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,झंडा ऊंचा रहे हमारा,
राष्ट्रगान जन-गण-मन गाएंगे,जयहिंद,जयहिंद,
बोलेंगे, भारत माता की जय हो का जयघोष करेंगे,
वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत गाएंगे।
- संगीता सूर्यप्रकाश
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गणतंत्र दिवस
गणतंत्र दिवस की सुबह आई है,
हर चेहरे पर खुशियाँ छाई हैं।
अधिकार हमें इसी दिन मिले,
जिनसे सपनों को उड़ान मिली है।
नई उम्मीद, नया पैगाम लाया,
आगे बढ़ने का पथ दिखाया।
देश हमारा करे तरक्की,
यही एहसास दिलाता है।
संविधान का करें हम सम्मान,
हर दिल में यही भावना जगाता है।
हाथ थामकर एक-दूजे का,
आगे कदम बढ़ाना है।
वीरों के संघर्ष, उनके बलिदान,
न कभी हम भूल पाएँगे।
हँसी-खुशी और गर्व के संग,
गणतंत्र दिवस मनाएँगे।
गणतंत्र दिवस की सुबह आई है,
हर चेहरे पर खुशियाँ छाई हैं।
अधिकार हमें इसी दिन मिले,
जिनसे सपनों को उड़ान मिली है।
नई उम्मीद, नया पैगाम लाया,
आगे बढ़ने का पथ दिखाया।
देश हमारा करे तरक्की,
यही एहसास दिलाता है।
संविधान का करें हम सम्मान,
हर दिल में यही भावना जगाता है।
हाथ थामकर एक-दूजे का,
आगे कदम बढ़ाना है।
वीरों के संघर्ष, उनके बलिदान,
न कभी हम भूल पाएँगे।
हँसी-खुशी और गर्व के संग,
गणतंत्र दिवस मनाएँगे।
- गरिमा लखनवी
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कहता है गणतंत्र।
बात एक ही यूँ सदा, कहता है गणतंत्र।
बने रहे वो मूल्य सब, जन- मन हो स्वतंत्र।
संसद में मचता गदर, है चिंतन की बात।
हँसी उड़े संविधान की, जनता पर आघात।।
भाषा पर संयम नहीं, मर्यादा से दूर।
संविधान को कर रहे, सांसद चकनाचूर।।
दागी संसद में घुसे, करते रोज मखौल।
देश लुटे लुटता रहे, खूब पीटते ढोल।।
जन जीवन बेहाल है, संसद में बस शोर।
हित सौरभ बस सोचते, सांसद अपनी ओर।।
संसद में श्रीमान जब, कलुषित हो परिवेश।
कैसे सौरभ सोचिए, बच पायेगा देश।।
लोकतंत्र अब रो रहा, देख बुरे हालात।
संसद में चलने लगे, थप्पड़, घूसे, लात।।
जनता की आवाज का, जिन्हें नहीं संज्ञान।
प्रजातंत्र का मंत्र है, उन्हें नहीं मतदान।।
हमें आज है सोचना, दूर करे ये कीच।
अपराधी नेता नहीं, पहुंचे संसद बीच।।
अपराधी सब छूटते, तोड़े सभी विधान।
निर्दोषी है जेल में, रो रहा संविधान।।
बात एक ही यूँ सदा, कहता है गणतंत्र।
बने रहे वो मूल्य सब, जन- मन हो स्वतंत्र।
संसद में मचता गदर, है चिंतन की बात।
हँसी उड़े संविधान की, जनता पर आघात।।
भाषा पर संयम नहीं, मर्यादा से दूर।
संविधान को कर रहे, सांसद चकनाचूर।।
दागी संसद में घुसे, करते रोज मखौल।
देश लुटे लुटता रहे, खूब पीटते ढोल।।
जन जीवन बेहाल है, संसद में बस शोर।
हित सौरभ बस सोचते, सांसद अपनी ओर।।
संसद में श्रीमान जब, कलुषित हो परिवेश।
कैसे सौरभ सोचिए, बच पायेगा देश।।
लोकतंत्र अब रो रहा, देख बुरे हालात।
संसद में चलने लगे, थप्पड़, घूसे, लात।।
जनता की आवाज का, जिन्हें नहीं संज्ञान।
प्रजातंत्र का मंत्र है, उन्हें नहीं मतदान।।
हमें आज है सोचना, दूर करे ये कीच।
अपराधी नेता नहीं, पहुंचे संसद बीच।।
अपराधी सब छूटते, तोड़े सभी विधान।
निर्दोषी है जेल में, रो रहा संविधान।।
- डॉ. सत्यवान सौरभ
*****
देशभक्ति ग़ज़ल
मेरा ये दिल है लिख देना तू मेरी जान लिख देना
कफ़न के हर सिरे पर मेरे हिंदुस्तान लिख देना
नहीं महदूद तुम करना हमें हिंदू-मुसलमान तक
यहां पर मिलके रहते हैं सभी इंसान लिख देना
हमें मतलब नहीं कोई किसी की ज़ातो-मज़हब से
फ़क़त इंसानियत हम सब की है पहचान लिख देना
हमारे देश के दुश्मन को जो पैग़ाम तुम भेजो
ज़मीने-हिंद के बच्चे भी हैं बलवान लिख देना
मेरी हो रुख़्सती जिस दम जहां से उस घड़ी यारो
मेरे दिल पर हमारे देश का तुम गान लिख देना
हमें काशी से उल्फ़त है हमें का'बे से निस्बत है
सभी पर है निछावर ये हमारी जान लिख देना
भगत सिंह हो, के बिस्मिल हो, के हो अशफ़ाक़ सा ग़ाज़ी
लुटाई है वतन पर सब ने अपनी जान लिख देना
वतन की शान में जब भी तराना तुमको लिखना हो
बहुत प्यारा है अपना मुल्क हिंदुस्तान लिख देना
तिरंगा है हमें प्यारा मुहाफ़िज़ हम तिरंगे के
हमारे दिल में है इसका बड़ा सम्मान लिख देना
ये गांधीजी का भारत है ये है आज़ाद की भूमी
यहीं पैदा हुए हैं तुलसी-ओ-रसख़ान लिख देना
हुआ पैदा दिलों में जोश 'क़ासिम' ने कहा जिस दम
'मिटाना हक परस्तों को नहीं आसान लिख देना
मेरा ये दिल है लिख देना तू मेरी जान लिख देना
कफ़न के हर सिरे पर मेरे हिंदुस्तान लिख देना
नहीं महदूद तुम करना हमें हिंदू-मुसलमान तक
यहां पर मिलके रहते हैं सभी इंसान लिख देना
हमें मतलब नहीं कोई किसी की ज़ातो-मज़हब से
फ़क़त इंसानियत हम सब की है पहचान लिख देना
हमारे देश के दुश्मन को जो पैग़ाम तुम भेजो
ज़मीने-हिंद के बच्चे भी हैं बलवान लिख देना
मेरी हो रुख़्सती जिस दम जहां से उस घड़ी यारो
मेरे दिल पर हमारे देश का तुम गान लिख देना
हमें काशी से उल्फ़त है हमें का'बे से निस्बत है
सभी पर है निछावर ये हमारी जान लिख देना
भगत सिंह हो, के बिस्मिल हो, के हो अशफ़ाक़ सा ग़ाज़ी
लुटाई है वतन पर सब ने अपनी जान लिख देना
वतन की शान में जब भी तराना तुमको लिखना हो
बहुत प्यारा है अपना मुल्क हिंदुस्तान लिख देना
तिरंगा है हमें प्यारा मुहाफ़िज़ हम तिरंगे के
हमारे दिल में है इसका बड़ा सम्मान लिख देना
ये गांधीजी का भारत है ये है आज़ाद की भूमी
यहीं पैदा हुए हैं तुलसी-ओ-रसख़ान लिख देना
हुआ पैदा दिलों में जोश 'क़ासिम' ने कहा जिस दम
'मिटाना हक परस्तों को नहीं आसान लिख देना
- क़ासिम बीकानेरी
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देखो गणतंत्र दिवस आया
देखो फिर से गणतंत्र दिवस आ गया,
जो आते ही हमारे दिलो-दिमाग पर छा गया।
यह है हमारे देश का राष्ट्रीय त्यौहार,
इसलिए तो सब करते हैं इससे प्यार।
इस अवसर का हमें रहता विशेष इंतजार,
क्योंकि इस दिन मिला हमें गणतंत्र का उपहार।
आओ लोगों तक गणतंत्र दिवस का संदेश पहुचाएं,
लोगों को गणतंत्र का महत्व समझाएं।
गणतंत्र द्वारा भारत में हुआ नया सवेरा,
इसके पहले तक था देश में तानाशाही का अंधेरा।
क्योंकि बिना गणतंत्र देश में आ जाती है तानाशाही,
नहीं मिलता कोई अधिकार वादे होते हैं हवा-हवाई।
तो आओ अब इसका और ना करें इंतजार,
साथ मिलकर मनाये गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय त्यौहार।
- रवि वर्मा
देखो फिर से गणतंत्र दिवस आ गया,
जो आते ही हमारे दिलो-दिमाग पर छा गया।
यह है हमारे देश का राष्ट्रीय त्यौहार,
इसलिए तो सब करते हैं इससे प्यार।
इस अवसर का हमें रहता विशेष इंतजार,
क्योंकि इस दिन मिला हमें गणतंत्र का उपहार।
आओ लोगों तक गणतंत्र दिवस का संदेश पहुचाएं,
लोगों को गणतंत्र का महत्व समझाएं।
गणतंत्र द्वारा भारत में हुआ नया सवेरा,
इसके पहले तक था देश में तानाशाही का अंधेरा।
क्योंकि बिना गणतंत्र देश में आ जाती है तानाशाही,
नहीं मिलता कोई अधिकार वादे होते हैं हवा-हवाई।
तो आओ अब इसका और ना करें इंतजार,
साथ मिलकर मनाये गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय त्यौहार।
- रवि वर्मा
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यौमे जम्हूरियत की पुरखुलुस मुबारकबाद
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
इक विनती आशिक ए वतन से
ज़रा ख़्याल रखना "तिरंगा" का सम्मान रखना,
परचम उतना ही लेना कर सको ताज़ीम जितना !!!
आज कोई तारीख़ नहीं,
आज एक क़सम याद करने का दिन है।
आज उस दस्तावेज़ को सलाम करने का दिन है
जिसने भीड़ को नागरिक बनाया,
और ताक़त को ज़िम्मेदारी का नाम दिया।
आज उस किताब का दिन है
जो सिर्फ़ क़ानून नहीं,
ज़मीर की तर्जुमानी है।
जिसमें लिखा है
मेरी आस्था तुम्हारी आस्था से बड़ी नहीं,
मेरा हक़ तुम्हारे हक़ को कुचलने के लिए नहीं।
आज वह दिन है
जब हमने दुनिया से कहा था
हम अलग-अलग सोचते हैं,
अलग-अलग इबादत करते हैं,
अलग-अलग बोलियाँ बोलते हैं,
मगर हमारा इंसाफ़ एक है,
हमारी आज़ादी साझी है,
और हमारी ज़िम्मेदारी बराबर।
हमारे बुज़ुर्गों ने
सिर्फ़ लहू से नहीं,
समझ से मुल्क लिखा था।
उन्होंने तख़्त नहीं,
उसूल खड़े किए थे।
और जाते-जाते बस इतना कहा था
इसे सदा बचाए रखना।
आज वही दिन है।
और आज भी वही इम्तिहान है।
गणतंत्र कोई जश्न भर नहीं,
यह रोज़-रोज़ बचाई जाने वाली अमानत है।
यह सवाल पूछने का हक़ भी है,
और जवाबदेह रहने का फ़र्ज़ भी।
आइए,
इस गणतंत्र दिवस पर
हम सिर्फ़ झंडा न लहराएँ,
अपने किरदार को भी सीधा रखें।
ताकि आने वाली नस्लें कह सकें
हमें सिर्फ़ आज़ादी नहीं मिली,
हमें उसे सँभालने वाले लोग भी मिले।
गणतंत्र दिवस की दिल से मुबारकबाद।
महान पूर्वजों को नमन,
और हर भारतीय को बराबरी का सलाम।
- तौसीफ़ अहमद
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
इक विनती आशिक ए वतन से
ज़रा ख़्याल रखना "तिरंगा" का सम्मान रखना,
परचम उतना ही लेना कर सको ताज़ीम जितना !!!
आज कोई तारीख़ नहीं,
आज एक क़सम याद करने का दिन है।
आज उस दस्तावेज़ को सलाम करने का दिन है
जिसने भीड़ को नागरिक बनाया,
और ताक़त को ज़िम्मेदारी का नाम दिया।
आज उस किताब का दिन है
जो सिर्फ़ क़ानून नहीं,
ज़मीर की तर्जुमानी है।
जिसमें लिखा है
मेरी आस्था तुम्हारी आस्था से बड़ी नहीं,
मेरा हक़ तुम्हारे हक़ को कुचलने के लिए नहीं।
आज वह दिन है
जब हमने दुनिया से कहा था
हम अलग-अलग सोचते हैं,
अलग-अलग इबादत करते हैं,
अलग-अलग बोलियाँ बोलते हैं,
मगर हमारा इंसाफ़ एक है,
हमारी आज़ादी साझी है,
और हमारी ज़िम्मेदारी बराबर।
हमारे बुज़ुर्गों ने
सिर्फ़ लहू से नहीं,
समझ से मुल्क लिखा था।
उन्होंने तख़्त नहीं,
उसूल खड़े किए थे।
और जाते-जाते बस इतना कहा था
इसे सदा बचाए रखना।
आज वही दिन है।
और आज भी वही इम्तिहान है।
गणतंत्र कोई जश्न भर नहीं,
यह रोज़-रोज़ बचाई जाने वाली अमानत है।
यह सवाल पूछने का हक़ भी है,
और जवाबदेह रहने का फ़र्ज़ भी।
आइए,
इस गणतंत्र दिवस पर
हम सिर्फ़ झंडा न लहराएँ,
अपने किरदार को भी सीधा रखें।
ताकि आने वाली नस्लें कह सकें
हमें सिर्फ़ आज़ादी नहीं मिली,
हमें उसे सँभालने वाले लोग भी मिले।
गणतंत्र दिवस की दिल से मुबारकबाद।
महान पूर्वजों को नमन,
और हर भारतीय को बराबरी का सलाम।
- तौसीफ़ अहमद
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