नववर्ष उम्मीदों का इक नया पैगाम
अब एक नया साल फिर है आया,
वादों का वही पुलिंदा फिर है लाया।
छूटे वादे जिन्हें इस साल नहीं था निभाया,
उन्हें पूरा करने का इक मौका फिर है आया।
नई उमंग नई ऊर्जा नया अहसास है लाया,
नया साल नई ताजगी संकल्पों संग है आया।
देखो फिर आलस में आकर न करना जाया,
मुश्किल से ये मौका दोबारा सबके हाथ है आया।
गिले शिकवे मिटा क्या हमने सबको गले लगाया,
जिन्हें हमने वक्त बेवक्त वजह बेवजह ही सताया।
सबके दिलों में छाए खुशियों का हसीन साया,
सबके हिस्से ये वक्त का बसंत फिर है आया।
इस बरस हमने जीवन में क्या खोया क्या पाया,
हर बशर हो सुखी जग में दूर रहे गमों का साया।
आओ मिलकर करें स्वागत इस नववर्ष का,
ये नववर्ष उम्मीदों का इक नया पैगाम है लाया।
- राज कुमार कौंडल
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नववर्ष में भुला दो
नववर्ष में भुला दो, सारे गिले-शिकवे
बीते वर्ष की बातों से, क्यों हम रोये
जो बीत गयी है, वो बात चली गयी
उसे ना दुहराया, देखो नववर्ष आ गयी है
दो-चार दिन की ही, ये जीवन हमारी है
सोचो सबकी भला हो, बात बहुत प्यारी है
क्या लेकर आये हो, क्या लेकर तुम जाओगे
शब्द तो छोटे हैं, अर्थ समझो तब जानोगे
एक दूजे से मिल-जुल कर, नयी शुरुआत करें
खुशियां दे, गम बांटे, सबों में प्रेम भाव भरें
तेरा है ,मेरा है, ये गीत अब पुरानी कर दें
यहाँ, सबका है, सबों से हैं, यही मन में सब्र दें
सिर्फ वर्ष बदलने की, खुशियाँ ना मनायें
हर पल, हर दिन-महीना बीते, ये भी नव ही गिनायें
मिलने-मिलाने वक्त बीतने का, कोई मौक ना छोड़े
हर पल को शुभ मान, सबों को अपनी ओर मोड़े
नया जोश, नयी उम्मीद, नये उमंग, जीवन में लायें
आओ नववर्ष में गिले-शिकवे भुला कर,जश्न मनायें
- चुन्नू साहा
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नववर्ष का हो रहा आगमन
मन है मुदित,हृदय है प्रफुल्लित
हर ओर नई उमंग है, नव उल्लास है,
नवीन आशाएं हैं, नवीन अपेक्षाएं हैं
नवचिंतन है, नवऊर्जा है
नववर्ष का हो रहा आगमन
बीता वक्त ,बीता साल था
उतार और चढ़ाव का
जय और पराजय का
गम और खुशी का
हर्ष और शोक का संमिश्रण
नव वर्ष का हो रहा आगमन
बीता साल क्या-क्या सीखा गया
बीता साल बहुत कुछ सीखा गया
कौन है अपना,कौन बेगाना
यह भेद करना, हमें बता गया
किस पर कर सकते हो एतवार
कौन है तुम्हारा सच्चा यार
कौन करता है तुमसे हृदय से प्यार
यह सब हमें बता गया
नव वर्ष का हो रहा आगमन
नव वर्ष हंसी और खुशी लेकर आये
सब रहें हर्षित और उल्लसित
ईश्वर से है करबद्ध प्रार्थना
इतनी शक्ति देना मुझे कि
औरों के आंसू पोंछ सकूँ
औरों के गम चुरा सकूं
जहां खो गई है मुस्कुराहटें
उन पाषाणों पर आनंद एवं
जीवटता को प्रतिबिम्बित कर सकूँ
नव वर्ष का हो रहा आगमन
- प्रवीण कुमार
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नव वर्ष की बेला
आज एक और नववर्ष का आगमन हुआ
खुशियों ने फिर आसमान है छुआ।
मन हर्षित और प्रफुल्लित सा हुआ
मांगता है प्रत्येक जन के लिए दुआ।
कर रहा है एक नववर्ष की कामना
खुशियां ही खुशियां मिले कष्ट से न हो सामना।
गत वर्ष में जो मुकाम हासिल नहीं हुआ
प्राप्त हो, करते हैं बस यही दुआ।
अपनों से मिलने का सिलसिला चलता रहे
बिछड़े न कभी अपने यही हर मन कहे।
गत वर्ष कुछ ख्वाब अधूरे रहे
जज़्बात भी रह गए कुछ अनकहे।
अबके वर्ष कोई सपना अधूरा न रहे
कहे हर कोई चहुं ओर खुशहाली रहे।
स्वस्थ,निरोग जीवन व्यतीत करें सभी
सफलता कदम चूमे असफलता न मिले कभी।
- विनोद वर्मा
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उम्मीदों का नया साल
नई उम्मीदों का साल आ रहा है
गुजरा जो जैसे वो साल जा रहा है
कुछ दोस्त रिश्ते बिछड़ गए
कुछ नए लोग मिलेंगे
नई उम्मीदों का प्रस्फुटन होगा
निकलेगा नया सूरज
नई ईबारत लिखेगा
आने जाने की परंपरा है
ये तो लगा रहेगा
कुछ अच्छा करने का
प्रण लें हम
करें नित्यकर्म निष्काम
निः स्वार्थ!
- मनोज कौशल
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नव वर्ष- 2026
साल बदल रहा है, तुम नहीं बदलना,
जीवन है संघर्ष, देखो ज़रा संभलना!
अधूरी हैं ख़्वाहिश, तन्हा है सफ़र,
हाथ पकड़ कर मेरा, संग-संग चलना!
हो रही है रात, सर्द हवाओं से भरपूर,
घने कोहरे में, सूरज की तरह जलना!
दिसम्बर ने जाते हुए, कहा है कान में,
जनवरी में जाकर हमको मत भूलना!
देखें हैं आँखों ने उम्मीदों भरे सपने,
इन सपनों का, हक़ीक़त में पिघलना!
नूतन वर्ष की नई, अलबेली फ़िज़ाएँ,
शुरू हो गया, इस दिल का मचलना!
हर ग़म भुलाकर आओ एक हो जाएं,
ज़रुरी है अब, दुआओं का निकलना।
- आनन्द कुमार
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अलविदा 2025
सन 2025 के दिन गए,
नए साल के दिन आए,
लाए ढेर सारी उम्मीदें,
खुशियाँ अत्यधिक सजाए।
2025 ने साथ दिया,
बहुत कुछ सिखाया,
कुछ खुशियाँ दी,
कुछ दर्द भी छोड़ा।
जो बीत गया, उसे जाने दो,
नए साल में आगे बढ़ने दो।
गलतियों से सीखो, हौसला रखो,
जीवन की राह में खुशियाँ मिलें।
नए साल में सपने नए होंगे,
लाएंगे खुशियाँ, नए रंग होंगे।
हिम्मत रखो, आगे बढ़ो,
जीवन की कहानी तुम लिखो।
साल 2025, अलविदा कह दो,
2026 को गले लगाओ।
नई उम्मीदें, नए सपने,
नए साल में सब कुछ होगा माने।
- कैप्टन डॉ. जय महलवाल 'अनजान'
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मुबारक हो नववर्ष
बीत गया धीरे-धीरे गतवर्ष, देकर कई अनुभव,
किसी का हुआ बिछोह,मिलन हुआ किसी का संभव।
टूटे कई घरौंदे, और बने नये भी कई आशियाने,
दिल से स्वागत करें हम नववर्ष का गाकर खुशी के तराने।
बाढ़ का भी देख लिया हमने खौफनाक मंजर,
उपजाऊ जमीन को देखा फिर बनते हमने बंजर।
देखे दौलतमंद लोग भी छूते हुए अर्श से फर्श,
फिर से नई मंजिलें तलाशने आओ मनाएं नववर्ष।
मन से मिटा दें गिले शिकवे, दुश्मनी, वैर भाव,
ईर्ष्या, द्वेष को जला, स्नेह सम्मान से रखें समभाव।
सांप्रदायिकता,जाति- पाति का भेद त्याग दें सहर्ष,
हर मानव मन में एकता का सूत्र हो, कुछ ऐसा करें इस नववर्ष।
पर्यावरण की स्वच्छता, शिष्टाचार को व्यवहार में लाएं,
कर्तव्यनिष्ठा, आत्मनिर्भरता, स्वरोजगार, कृषि को अपनाएं।
देशभक्ति, सत्यनिष्ठा को आत्मसात कर, आत्मा को करें स्पर्श,
सुख समृद्धि की बयार बहे नित करें प्रगति इस नववर्ष।
कर्म करें ऐसे हम,अमीर गरीब में पटती खाई हो जाए कम,
शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं सभी को एकसम।
प्रसन्नता का वातावरण हो और करें सभी जीवन संघर्ष,
सभी देशवासियों को मुबारक हो मुबारक हो ये नववर्ष।
- लता कुमारी धीमान
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नया साल
नए साल की शुरुआत
हे!माँ काली
तेरे विश्वास पर करता हूँ।
मानता हूँ
कि मैं खास नहीं
मगर तेरे ऐतबार पर
नए साल पर
एक नई शुरुआत करता हूँ।
छोड़ चुके हैं जो लोग
उनको भूलाने की एक
कोशिश करता हूँ,
और जो आ रहे हैं जीवन में
बनकर तेरा साया
उनको अपनाने की कोशिश करता हूँ।
ढूंढता रहा हर साल
हर इंसान में
खुशियां अपनी
अब शून्य में लीन होकर
गुरुदेव शिव पर ऐतबार करता हूँ।
- डॉ. राजीव डोगरा
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नया साल
नया साल आने को है,
पुराना साल जाने को है,
कैसी विचित्र सी बात है-
पुराने के जाने का ग़म मनाएँ
या नए के आने की ख़ुशी में मुस्कराएँ।
पुराने साल के जाने का दर्द है,
क्योंकि उससे जुड़ी अनगिनत यादें हैं,
कुछ हँसी, कुछ आँसू,
कुछ अपने, कुछ छूटे हुए सपने हैं।
नए साल की ख़ुशी इसलिए है,
कि वह ढेरों खुशियाँ लाने वाला है,
नई उम्मीदें, नए अरमान,
जीवन को फिर से सजाने वाला है।
आओ, नए साल का स्वागत करें,
खुशियों की सौगात को अपनाएँ,
पुराने का दुःख तो रहेगा ही,
क्योंकि यही जीवन का नियम है-
जो आता है,
उसे एक दिन जाना होता है।
- गरिमा लखनवी
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नया साल नया संकल्प
नये साल में नये संकल्प करें
अपने परिवेश को हराभरा करें
जहाँ भी दिखे गंदगी फैली हुई
मिट्टी से गड्ढे भरें स्वच्छता करें
जो अनपढ़ हैं गली मोहल्ले में
उन्हें पढ़ाएं लिखाएं आगे बढ़ाएं
समाज को करें शिक्षित मिलकर
फिर नये साल की खुशियां मनाएं
नये साल में बढ़ती महंगाई रोकें
युवाओं को रोजगार से जोड़ें
जो बैठे हताश होकर घरों में
उन्हें छोटे छोटे उधोगो से जोड़ें
नई उमंग के संग नववर्ष मनाएं
अतीत की घटनाएं भुलाकर
नये विचारों के साथ आगे बढ़ें
नये संकल्प लेकर नये काम करें
ज्ञान विज्ञान कला में नाम कमाएं
खेलकूद में अपना नाम चमकाएं
नये साल में विश्व पटल पर जा
भारत का तिरंगा उँचा लहराएं
- डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
*****
निरंतर
समय, एक ही लय और गति से
निरंतर चलती रहती है,
एक एक क्षण से महाशून्य की ओर।
असंख्य इतिहास इस पृथ्वी के परतों में
जमा हो रहा है।
और मानव देह के भीतर अदृश्य मन के पिंजरे में
बंदी है कई अमूल्य स्मृतियां।
जो खुली खिड़की से केवल आकाश देखते है
पर खुले दरवाजे से बाहर कभी खो नहीं जाते।
आज फिर अवकाश ले लिया
365 दिनों का वो झुंड, जिसका नाम था 2025।
फिर हम सब सवार हो गए 2026 की समय गाड़ी पर
इस उम्मीद से कि यात्रा सफल और मंगलमय हो।
समय, एक ही लय और गति से
निरंतर चलती रहती है,
एक एक क्षण से महाशून्य की ओर।
असंख्य इतिहास इस पृथ्वी के परतों में
जमा हो रहा है।
और मानव देह के भीतर अदृश्य मन के पिंजरे में
बंदी है कई अमूल्य स्मृतियां।
जो खुली खिड़की से केवल आकाश देखते है
पर खुले दरवाजे से बाहर कभी खो नहीं जाते।
आज फिर अवकाश ले लिया
365 दिनों का वो झुंड, जिसका नाम था 2025।
फिर हम सब सवार हो गए 2026 की समय गाड़ी पर
इस उम्मीद से कि यात्रा सफल और मंगलमय हो।
- सुतपा घोष
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नया साल मुबारक
जिनके अधूरे सपने हैं,
और पूरे हुए जिनके सपने हैं,
जिनका सारा जहां अपना कहने को,
पर साथ नहीं कोई तैयार रहने को।
नया साल मुबारक उनको,
जिनके लिए सब रिश्ते व्यापार हैं,
उनको भी जो अपनों के खातिर,
जान हथेली पर लिया तैयार हैं।
मुबारक हो उनको भी जिनके
पास न रोटी और ना लंगोटी है,
और मुबारक हो जिनको
महल भी लगती छोटी है।
नया साल में मुबारक मेरी
वफादार, प्यारों को।
और दोस्तों में छुपे गद्दारों को।
मुबारक को समाज और देश के
रक्षक को, और लूटेरों,
भ्रष्टाचारी और भक्षक को।
नया साल मुबारक हो हर शहंशाह को,
तीनों जहां के फकीर, और
बादशाह को।
नया साल मुबारक हो लाचार,
कमजोर, असहाय को,
और संग दिल निर्मम कसाई को।
उनको भी जो घूमे, सैर करे हवाई,
और उनको जिनके,
पैरों में न चप्पल और न इस जाड़े में रजाई।
इस नए साल में सभी को बधाई,
फिर से नई साल नए उम्मीद लाई।
नया साल मुबारक
जिनके अधूरे सपने हैं,
और पूरे हुए जिनके सपने हैं,
जिनका सारा जहां अपना कहने को,
पर साथ नहीं कोई तैयार रहने को।
नया साल मुबारक उनको,
जिनके लिए सब रिश्ते व्यापार हैं,
उनको भी जो अपनों के खातिर,
जान हथेली पर लिया तैयार हैं।
मुबारक हो उनको भी जिनके
पास न रोटी और ना लंगोटी है,
और मुबारक हो जिनको
महल भी लगती छोटी है।
नया साल में मुबारक मेरी
वफादार, प्यारों को।
और दोस्तों में छुपे गद्दारों को।
मुबारक को समाज और देश के
रक्षक को, और लूटेरों,
भ्रष्टाचारी और भक्षक को।
नया साल मुबारक हो हर शहंशाह को,
तीनों जहां के फकीर, और
बादशाह को।
नया साल मुबारक हो लाचार,
कमजोर, असहाय को,
और संग दिल निर्मम कसाई को।
उनको भी जो घूमे, सैर करे हवाई,
और उनको जिनके,
पैरों में न चप्पल और न इस जाड़े में रजाई।
इस नए साल में सभी को बधाई,
फिर से नई साल नए उम्मीद लाई।
नया साल मुबारक
- रोशन कुमार झा
*****
नव वर्ष मंगलमय हो
नव वर्ष की बेला है आई
सबको नव वर्ष की बधाई
लड़ें न आपस में छोटी छोटी बातों पर
समझें संस्कृति और भाईचारे की गहराई
ऐसा काम करें नव वर्ष में
किसी के मन को न पहुँचे ठेस
मिल जुल कर रहें हम सारे
एक दूजे का बढ़ाएं हौसला करें न कोई क्लेश
बच्चों का हो उज्ज्वल भविष्य ऐसा करें हम काम
मान बढ़े हम सबका भारत का हो ऊंचा नाम
प्रण लें नशे को मिल कर हमने है भगाना
नशा बांटने वालों का करना है अब काम तमाम
नई पीढ़ी है नया जोश है नई नई है जवानी
जोश में होश कहाँ रहता है कर जाते है नादानी
होश में भी रहना है और जोश भी कायम रखना है
तभी बढ़ेंगे आगे सब मिल कर लिखेंगे नई कहानी
न रुकेंगे हम न झुकेंगे हम बस आगे है बढ़ते जाना
समय है भारत का अब भारत का परचम है लहराना
विश्व तिरंगा बन जायेगा मिलजुल जो करेंगे काम
मंजिल हमसे दूर नहीं बस थोड़ा जोर है और लगाना
भूल सबसे हो जाती है भूल जाओ आगे बढ़ो
काम दूसरों के आओ बुजुर्गों की सेवा करो
दूसरों को खुश देखकर बहुत मिलती है मन को खुशी
बस अच्छे काम करते रहो ईश्वर से डरो
बिछुड़ गए कुछ इस वर्ष कुछ अगले वर्ष जाएंगे
अटल सत्य है जानते हैं सभी कि लौट कर नहीं आएंगे
अच्छे कर्म जो किये होंगे वही रहेंगे वही साथ जाएंगे
याद बहुत करेंगे लेकिन एक खालीपन सा पाएंगे
- रवींद्र कुमार शर्मा
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नई खुशियाँ ले आया।
नया साल आया है यार,
दिल को चैन दे गया,
पुराने ग़म भुला दो,
नई खुशियाँ ले आया।
नया साल आया है यार,
दिल को चैन दे गया,
पुराने ग़म भुला दो,
नई खुशियाँ ले आया।
दिल की किताब खोल दो,
हर पन्ना ताज़ा लिखो,
उम्मीदों का दीया जला,
अंधेरा मिटा दो दिल से सारा।
वक्त की रेत बहती जाए,
हर कण सोना बनेगा,
सकारात्मक नज़र से देखो,
जहाँ भी मन का फूल खिलेगा।
प्राणायाम करो अच्छा ही होगा
आयुर्वेद को अपनाओ मेरे यार,
हर साँस में है बसी जिंदगी,
इसे गले लगा लो देदो प्यार।
नया साल मुबारक हो,
ग़ज़ल गीत सी बहे ज़िंदगी,
हर लम्हा जश्न मनाओ,
खुश रहो हमेशा यार।
- डॉ. मुश्ताक़ अहमद
*****











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