मोबाइल के इस युग में आपको राह चलते लोगों की अखबार पढ़ती तस्वीरें जब दिख जाती है तो लगता है कि अखबार पढ़ना इस मोबाइल के युग में कितना जरूरी है, बहुत से लोग या फिर घर में बैठे बच्चे और उनके पेरेंट्स जब कोई काम में उलझ जाते हैं तो अपने बच्चों को शांत रखने के लिए तुरंत मोबाइल फोन थमा देते हैं लो बेटा थोड़ी देर फोन देख लो, अच्छा टीवी में कार्टून देख लो इससे बच्चे के दिमाग और शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता जा रहा है।
बच्चे ज्यादा देर नजर गड़ाए फोन देखते हैं वो देखते-देखते तो कई बार इंस्टाग्राम रील भी देखने लगते हैं और कई रील्स ऐसे होते हैं या फिर उसके स्क्राल करने के बाद कुछ ऐप्स के ऐड ऐसे आते हैं जिसमें दिखाया जाता है कि आप इस ऐप पर बस वीडियो देखों और हजारों रूपए कमाओं यह कहीं ना कहीं बच्चों पर पूरी तरह हावी हो जाता है।
इसलिए बच्चे को मोबाइल देते समय सोच समझकर दें देखने के लिए या फिर पेरेंट्स मोबाइल देने के बजाय उन्हें उपन्यास, कहानी की किताबें पढ़ाए या बच्चे के लायक जो अखबार आ रहे हैं जैसे बाल भास्कर उसे दिखाएं जिससे बच्चे पढ़ने की ओर कदम बढ़ाएं।
आपने हाल ही में पढ़ा और सुना भी होगा कि हमारे देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में वहां की सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य कर दिया है यह इसलिए किया गया है क्योंकि बच्चा मोबाइल स्क्रीन पर नजर कम डालें और पढ़ने की आदत डालें हर दिन प्रार्थना के समय कम से कम 10 मिनट अखबार पढ़ना जरूरी है और हिंदी के साथ अंग्रेजी भाषा के अखबार को भी पढ़ने के लिए कहा गया है।
विधार्थियों में पढ़ने की रूची बढ़े और इसके साथ उनका करेंट अफेयर्स भी मजबूत हो और फेक न्यूज को पहचान सकें ऐसा नियम हर राज्य के सरकारी स्कूलों में लागू किया जाना चाहिए ताकि बच्चे मोबाइल फोन से दूरी बनाकर पूरी ध्यान पढ़ाई पर लगाएं अखबार पढ़ने उसमें चित्र देखकर बच्चे धीरे-धीरे प्रेरित होकर किताब पढ़ना भी सीख जाएंगे और मोबाइल स्क्रीन से उनकी दूरी बनती चली जाएगी। अखबार पढ़ना इसलिए भी जरूरी है कि इससे जनरल नॉलेज में भी सुधार होता है और भाषा के साथ शब्द पर भी पकड़ अच्छी हो जाती है।
- आशीष रंजन


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