नैतिकता और कानून एपीस्टीन फाइल्स
एपीस्टीन फाइल्स केवल एक अंतर्राष्ट्रीय अपराध कथा नहीं है, यह सत्ता मोह का वैश्विक दस्तावेज है। यह बताती है कि जब सत्ता सेवा नहीं, भोग बन जाती है, जब पद उत्तरदायित्व नहीं, सुरक्षा कवच बन जाता है,तब अपराध केवल होता नहीं, छिपाया भी जाता है। भारतीय परम्परा में सत्ता को कभी अंतिम लक्ष्य नहीं माना गया, इतिहास साक्षी है कि जब मर्यादा टूटी, तो सत्ता छोड़ी गई, राम का वन गमन हो या महाभारत का युद्ध,हर कथा यही कहती है, कि पद से बड़ा धर्म होता है।
आधुनिक भारत में भी लंबे समय तक यही परंपरा रही, दो दशक पहले सरकारों के दौर में ऐसे उदाहरण मिलते है, जब सिर्फ नाम आने मात्र से मंत्रियों को पद त्याग करना पड़ा। आरोप सिद्ध हुए या नहीं, यह बाद की बात थी, नैतिक जिम्मेदारी तय होती थी। अब पद छोड़ना नही,पद बचाना प्राथमिकता बन गया है। आरोपों को राजनीतिक साजिश कह कर खारिज कर देना, नैतिकता को कानूनी तकनीक में उलझा देना, और कुर्सी से चिपके रहना, सब सत्ता मोह के लक्षण है।
एपीसटीन प्रकरण इसी मानसिकता का चरम रूप है, वह सत्ता, धन और प्रभाव ने कानून को भी बंधक बना लिया। वर्षों तक गंभीर आरोपों के बावजूद प्रभावशाली लोग सुरक्षित रहे।यह केवल न्याय की विफलता नहीं, बल्कि उस व्यस्था का नैतिक दिवालीपियन है जहां मोह सर्वोपरि हो चुका है।
भारत के लिए यह चेतावनी है। लोकतन्त्र केवल चुनाव से नहीं चलता, वह त्याग से जीवित रहता है। पद छोड़ने की क्षमता ही सत्ता को वैध बनाती है। सत्ता साधन है,साध्य नहीं। पद सेवा का माध्यम है,ढाल नहीं। यदि सत्ता मोह पर नियंत्रण नहीं हुआ,तो कानून बचेगा, लेकिन न्याय नहीं, संस्थाएं रहेंगी, लेकिन विश्वास नहीं, शरीर रहेगा लेकिन आत्मा नहीं बचेगी।
- रोशन कुमार झा
*****
जेफरी एपस्टीन
एक अमेरिकी अरबपति फाइनेंशियर जो बहुत प्रभावशाली लोगों से जुड़ा था- राजनेता, व्यवसायी, रॉयल फैमिली के सदस्य, और सेलिब्रिटीज। उसके पास कैरेबियन में एक निजी द्वीप था! यंहा नाबालिग लड़कियों की सेक्स ट्रैफिकिंग और यौन शोषण का एक संगठित नेटवर्क चलता था। एपस्टीन एक अमेरिकी फाइनेंशियर था जो 2019 में सेक्स ट्रैफिकिंग और नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।
एपस्टीन के मामले में कई हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों के नाम सामने आए, जिनमें राजनेता, व्यवसायी और सेलिब्रिटीज शामिल थे। एपस्टीन फाइल्स एक विस्तृत, विवादास्पद और बेहद गहरी जांच का हिस्सा हैं जो दुनिया भर में शक्तियों, अपराधों और नेटवर्क के संबंधों पर बहस जगा रहे हैं। एपस्टीन की मृत्यु हो गई, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया, हालांकि इस पर कई षड्यंत्र के सिद्धांत भी सामने आए।
- नरेंद्र मंघनानी
*****
No comments:
Post a Comment