पूंजीवाद यानी Capitalism एक प्रकार की आर्थिक प्रणाली है। इसमें उत्पादन के साधनों का स्वामित्व निजी कंपनियों व व्यक्तियों के हाथों में होता है। इन सब का उद्देश्य सिर्फ अधिक से अधिक लाभ कमाना होता है। आज आप और हम सभी पूंजीवाद का शिकार हो चुके हैं। पूंजीवाद के प्रोपेगेंडा ने हमें अपना इतना आदी बना दिया है कि हम चाह कर भी इसके जाल से बाहर नहीं निकाल सकते हैं।
जब कोई कंपनी किसी वस्तु का उत्पादन करती है तो उत्पादन के लिए कई चीजों की जरूरत पड़ती है और उत्पादन के दौरान विभिन्न तरह का पर्यावरण प्रदूषण भी होता है। उदाहरण के लिए एक सूती यानी कॉटन के शर्ट को बनाने में औसतन 2700 लीटर पानी खर्च होता है, जबकि एक व्यक्ति इतना पानी ढाई साल तक पी सकता है। ऐसे में सवाल है- पूंजीवाद का यह नशा हमें जिस बर्बादी की ओर लेकर जा रहा है, क्या हमें वह बर्बादी दिखाई दे रही है ?
एक जमाना हुआ करता था जब एक व्यक्ति के पास सीमित और साधारण कपड़े हुआ करते थे। मगर आज एक व्यक्ति एक महीने के कई जोड़ी कपड़े खरीदता और बदलता है। आखिर इतने कपड़े खरीदने और बदलने की क्या जरूरत है ? जब हमारा सीमित कपड़ों से काम चल सकता है तो फिर पूंजीवाद का फैशन नाम का नशा हमें क्यों बार-बार चटाया जा रहा है ? और कुछ अमीर लोगों की साजिश पूंजीवाद का शिकार साधारण व भोली भाली जनता को क्यों बनाया जा रहा है ?
हम सभी को पूंजीवाद नाम के कैंसर को पहचानने की जरूरत है। अगर वक्त रहते आप इस कैंसर को नहीं पहचानेंगे तो आपके पास या आपके आने वाले पीढ़ी के पास कुछ नहीं बचेगा; बस आप और आपकी आने वाली पीढ़ी पूंजीवाद की गुलाम बनकर घूमेगी।
- दीपक कोहली

No comments:
Post a Comment