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प्रिय राजीव जी,
सादर प्रणाम आज आपकी बहुत याद आ रही है। आपसे बात करने के लिए मैंने फोन भी लगाया लेकिन आप व्यस्त थे फोन उठाते ही बोले थोड़ी देर बाद बात करता हूंँ। मन में बहुत कुछ था आपसे कहने के लिए इसलिए पत्र लिख रही हूं।
हमने कभी वैलेंटाइन्स नहीं मनाया क्योंकि हमें आपसी प्रेम को जाहिर करने के लिए किसी विशेष दिन की आवश्यकता नहीं पड़ी।जब भी चाहते एक दूसरे की परवाह करके एक दूसरे की पसंद का कुछ भी करके आपसी प्रेम को और भी प्रगाढ़ करते हैं।आपका मेरे जीवन में होना ही एक सर्वोत्तम उपहार है।
जीवन के कठिन दिनों को भी आपके सहयोग और स्नेह से बड़ी आसानी से बीता लिया आगे भी जीवन में हर एक परिस्थिति में आपका साथ चाहती हूंँ। मुझे पूरी उम्मीद है कि आप मेरा साथ कभी नहीं छोड़ेंगे। जीवन के आखिरी पल में मैं आपका हाथ और साथ दोनों चाहती हूं मुझे यकीन है आप मेरी यह इच्छा अवश्य पूरी करेंगे ।
सिर्फ आपकी
अनुरोध त्रिपाठी
प्रयागराज, यूपी
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