अमेरिका पूरे विश्व में लोकतंत्र का प्रहरी बनने की कोशिश करता है। मगर एपस्टीन फाइल्स ने अमेरिका के लोकतंत्र को नंगा कर दिया है। सोचने वाली बात है कि अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश में मासूम बच्चियां तक सुरक्षित नहीं हैं। इतना ही नहीं बल्कि मासूम बच्चियों के शोषण और बलात्कार के इस कांड में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक का नाम आ रहा है। सोचिए! जो लोग अमेरिका के लोकतंत्र को चला रहे हैं, उनके कांड (एपस्टीन फाइल्स) कैसे हैं ?
अमेरिका पूरी दुनिया को ज्ञान बांटता फिरता रहता है, मगर अपने देश की मासूम बच्चों की सुरक्षा तो दूर उन्हें न्याय तक नहीं दे पा रहा है। इससे साबित होता है कि अमेरिका की ताकत, कैप्सूल खाकर सेक्स पावर बढ़ाने वालों जैसी है। एपस्टीन फाइल्स कांड अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का सबसे काला व कलंकित कांड है। बतौर मनुष्य ये हम सभी के ऊपर भी एक कलंक है, जिसे भविष्य में हमारी आने वाले पीढ़ी इतिहास में पढ़ेगी और हमारे ऊपर थूकेगी।
एपस्टीन फाइल्स के आरोपी अधिकतर वो गोरे लोग हैं, जो समाज में रंगभेद और आर्थिक भेद फैलाकर पूरे दुनिया के बाप बनने की कोशिश करते हैं, मगर काम इनके नरपिशाचों जैसे है। इस एपस्टीन कांड से एक और बात साबित होती है कि इस दुनिया में ना तो जीसस गॉड है, ना अल्लाह है और ना ही भगवान है। अगर होते तो उन मासूम बच्चियों की मदद के लिए आगे आते और सालों तक इस कांड को नहीं चलने देते। अभी तो इस कांड के और भी कड़ी खुलने बाकी है। दुनिया के कई ताकतवर लोगों की हकीकत इस कांड ने हम सबके सामने लाकर रख दी है। पैसा होने का मतलब यह नहीं है कि वो पैसे वाला इंसान अच्छा गुणी और चरित्रवान ही होगा, बल्कि नरपिशाच भी हो सकता है, यह एपस्टीन फाइल्स ने साबित कर दिया है।
आज अमेरिका को अपने लोकतांत्रिक व्यवस्था में दोबारा से झांकने की जरूरत है। जिस तरह अमेरिका में अमीरी और गरीबी का फर्क लगातार बढ़ता जा रहा है और ऐसे कांड सामने आ रहे हैं, यह अमेरिका के भविष्य के लिए गंभीर संकेत है। अगर अमेरिका इस कांड में आरोपियों को कड़ी सजा नहीं दिला पता है तो अमेरिका के लोकतंत्र और शक्तिशाली होने पर कई प्रश्न खड़े हो जाएंगे।
- दीपक कोहली
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