साहित्य चक्र

01 January 2021

नव आंगल वर्ष

 
वर्ष 2020 का अनुभव बहुत ही खट्टा रहा,
आने वाला वर्ष  खुशहाली  लाए,
सबके चेहरे पर रौनक लाएं,
 जो बीत गया उसकी याद भी नहीं  दिलाएं,
 आने वाले साल में हर दिन,
 होली और रात दिवाली हो,
 जो साल बीता वैसा साल कभी ना आए,
नई उमंग नई आशा के साथ,
 नए साल का जश्न मनाए,
 नाचे कूदे मस्ती में,
 बड़ों का आशीर्वाद लें,
 सबके दिलों से नफरत हटाए,
 प्यार से सब को अपनाएं,
 नए साल की खुशी में,
हम सब के साथ साथ मस्त हो जाए।

                                       गरिमा लखनवी


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