साहित्य चक्र

21 January 2024

कविताः राम मंदिर



बूढे से ले कर बच्चों तक सब ने किया था,
 जिस का इंतजार।
गाँव से ले कर शहर तक,
जिस के लिए  थे सब बेकरार।।

राम लला के राज तिलक की वो घड़ी आ गई।
हर तरफ नयी खुशी की लहर छा गई।।

22 जनवरी सुनश्चित हुई वो शुभ घड़ी।
प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी जोर से चल रही।।

हर घर पर भगवा लहरायेगा।
हर बच्चा बच्चा दीप जलायेगा

बन्दरवान बंधेंगे द्वारे द्वारे।
रंगोली से द्वार सजायेंगे।।

लड्डू और बर्फी का भोग लगायेंगे।
भजन राम लला के गायेंगे।।

500 वर्षो की कठिन तपस्या आज हुई साकार।
लाखों कार सेवकों के प्राणों की आहुति से मन्दिर हुआ तैयार।।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण नया
युग बदलाव लाया है।
हर भारतीय को ढेरों बधाई।।


                                         - संध्या चतुर्वेदी


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