साहित्य चक्र

04 August 2019

महकती रूह

दोस्ती इसी से ज़िन्दगी आसां
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रिश्ता ये है अनमोल ,
बेशुमार प्यार देता है ।
महकती रूह जिससे है,
ये वो संसार देता है ।

मौज मस्ती की 
है साकार परिभाषा
ज़िन्दगी इसमें है,
इसी से ज़िन्दगी आसां ।

:यादों के खजाने हैं
नादानी बचपन सी
कविता है ये मीठी
लिए अपनापन सी ।

धड़कन में छिपी बातें
तो दोस्त जान लेता है ।
महकती रूह है जिससे
ये वो संसार देता है ।

कच्ची इमली  सी 
कहीं रंगीन कंचे सी
गुड़िया के वालों सी
है मीठे सवालों सी

गंगा सी है पावन 
ऊंची है अम्बर सी ।
चंदा सा तन उजला
गहरी समन्दर सी ।

मुस्कान के आँसू 
भी पहचान लेता है ।
महकती रूह जिससे है
ये वो संसार देता है ।

                              रागिनी स्वर्णकार


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