साहित्य चक्र

08 April 2024

सुहागरात की कल्पनाएं!

मानव समाज में सुहागरात को लेकर इतनी सारी कल्पनाएं बनी हुई हैं, जिनको गिन पाना असंभव है। फिर भी मैं कुछ कल्पनाओं पर बात करूंगा, जो हमारे समाज में अपने पैर जमा चुके हैं। सबसे पहले लड़कों की कल्पनाओं पर बात करते हैं। अक्सर लड़कों के दिमाग में यह बैठा रहता है कि वह सुहागरात के दिन क्या करेगा ? कैसे करेगा ? कही वह पहले ही नाइट फेल तो नहीं हो जाएगा ? क्या वह अपनी पत्नी को खुश कर पाएगा ? 





आदि कल्पनाएं लड़कों के दिमाग में बैठी रहती हैं। इसके अलावा लड़कों के दोस्त लड़के को सुहागरात के दिन एक योद्धा के रूप में देखते हैं। जैसे लड़के को किसी युद्ध में जाना हो और उसे युद्ध को जीत कर आना ही होगा आदि। मगर इन कल्पनाओं से अलग सत्य कुछ और ही है। उस सत्य के बारे में हम अंतिम में बात करेंगे। अब हम बात करते हैं लड़कियों के मन में सुहागरात को लेकर चलने वाली कल्पनाओं के बारे में। लड़कियां अक्सर सुहागरात को लेकर सोचती हैं कि अगर सुहागरात के दिन उनकी योनि से ब्लड नहीं आएगा तो क्या होगा ? कही उनका होने वाला पति उनके चरित्र पर सवाल तो नहीं उठाएगा ? पहली बार सेक्स करने पर कितना दर्द होगा ? क्या वह दर्द मेरे से सहा जाएगा ? कही लड़का हवसी तो नहीं होगा ? जैसे क‌ई कल्पनाएं लड़कियों के मन में चलती हैं।


हकीकत यह है कि सुहागरात के दिन बहुत ही काम लोग ठीक से शारीरिक संबंध बना पाते हैं। इसके पीछे विभिन्न कारण हैं। जैसे- सुहागरात के दिन घर में मेहमानों की भीड़, दुल्हन और दूल्हे का सही से परिचित नहीं होना, दुल्हन-दूल्हे का थक जाना और दोनों का मानसिक रूप से शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार नहीं होना आदि। वर्तमान में प्रेम विवाह की संख्या लगातार पड़ रही है और ऐसे में अधिकतर लड़के-लड़कियां शादी से पहले ही शारीरिक संबंध बना चुकी होती हैं। इसके अलावा आज शादी से पहले लगभग हर लड़का-लड़की किसी ना किसी के प्रेम संबंध में रहे होते हैं या फिर सोशल मीडिया इत्यादि प्लेटफार्म के माध्यम से सेक्स इत्यादि के बारे में जानकारी प्राप्त कर चुके होते हैं। इसकी बावजूद भी सुहागरात को लेकर हमारे मानव समाज में कई तरह की कल्पनाएं होती हैं। खैर वक्त के साथ-साथ हमारी ये कल्पनाएं भी धीरे-धीरे मर जाएंगी।


                                                                          - दीपक कोहली


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