साहित्य चक्र

08 July 2017

*अटल के नाम, मेरी कविता..।


विदुषी शर्मा
 श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के
     नाम का पूर्ण एवं सार्थक अर्थ

        अ- अदब से सर झुकाना ही 
        नहीं जानते हैं हम फकत,  

      ट- टल नहीं सकते हमारे 
   हौसले हैं सर परस्त ।

   ल- लहु रंग लाता है 
       हमेशा खौलने के बाद, 

         बि- बिखरकर सीप में बनती है 
     बूंदनूर-ए-आफताब

        हा- हारने का सबक हमने 
         सीखा नहीं है आज तक, 

   री- रीत सदा जीतने की,
            बनती रही है एक सबक ।

 वा- वायदों से हम जी 
      बहलाना नहीं जानते, 

       ज-  जग में शांति को ही 
     अपना सर्वस्व मानते

   प- परिंदों की तरह लंबी 
        परवाज़ लेनी है अब हमें, 

     यी- विजयी भव का भाव 
      सत्य करना है अब हमें
   
                               *विदुषी शर्मा*

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